इस्लामाबाद: मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी विनाशकारी युद्ध को थामने के लिए आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक केंद्र बन गई है। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली इस ‘ऐतिहासिक लेकिन जटिल’ शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद को पूरी तरह सुरक्षित किले में बदल दिया गया है। 10 अप्रैल 2026 की दोपहर तक इस्लामाबाद का ‘रेड जोन’ पूरी तरह सील है और सेरेना होटल में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
कौन-कौन पहुंच रहा है इस्लामाबाद? (प्रतिनिधिमंडल की सूची)
यह वार्ता अप्रत्यक्ष (Indirect) होगी, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारी अमेरिका और ईरान के बीच सेतु का काम करेंगे।
1. अमेरिकी दल (नेतृत्व: जेडी वेंस)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सबसे भरोसेमंद और हाई-प्रोफाइल टीम भेजी है:
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जेडी वेंस: अमेरिकी उपराष्ट्रपति (2011 के बाद किसी अमेरिकी उपराष्ट्रपति का यह पहला पाकिस्तान दौरा है)।
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जेरेड कुशनर: ट्रंप के दामाद और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार (मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ)।
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स्टीव विटकॉफ: ट्रंप के विशेष दूत।
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संभावित: एडमिरल ब्रैड कूपर (CENTCOM कमांडर) के भी शामिल होने की चर्चा है।
2. ईरानी दल (नेतृत्व: मोहम्मद बघेर गालिबाफ)
ईरान ने अपने अनुभवी राजनीतिक और सैन्य रणनीतिकारों को भेजा है:
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मोहम्मद बघेर गालिबाफ: ईरानी संसद के स्पीकर और पूर्व IRGC कमांडर।
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अब्बास अरागची: ईरान के विदेश मंत्री।
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नोट: लेबनान पर इजरायली हमलों के विरोध में ईरान ने वार्ता से हटने की चेतावनी दी थी, लेकिन ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी मध्यस्थों के मनाने के बाद ईरानी दल गुरुवार रात इस्लामाबाद पहुंच चुका है।
3. मेजबान पाकिस्तान (नेतृत्व: शहबाज शरीफ)
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शहबाज शरीफ: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (औपचारिक मेजबान)।
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इशाक डार: उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री (मुख्य वार्ताकार)।
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जनरल आसिम मुनीर: सेना प्रमुख (सुरक्षा और रणनीतिक इनपुट के लिए पर्दे के पीछे सक्रिय)।
इस्लामाबाद में ‘वार रूम’ जैसी सुरक्षा
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सेरेना होटल: रेड जोन स्थित इस होटल को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। 15 दिनों तक यहां केवल इस वार्ता से जुड़े लोग ही रह सकेंगे।
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सार्वजनिक अवकाश: सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 9 और 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में छुट्टी घोषित की गई है।
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ट्रैफिक प्रतिबंध: रेड जोन की ओर जाने वाले सभी रास्ते बंद हैं, केवल विशेष पास वाले वाहनों को अनुमति है।
वार्ता की मेज पर मुख्य मुद्दे और विवाद
| मुद्दा | ईरान का रुख (10-सूत्रीय योजना) | अमेरिका की मांग |
| होर्मुज जलडमरूमध्य | ईरान का पूर्ण नियंत्रण और निगरानी हो। | व्यापारिक जहाजों के लिए तुरंत और सुरक्षित रास्ता। |
| परमाणु कार्यक्रम | संप्रभुता का मुद्दा, प्रतिबंध हटने चाहिए। | ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम सौंप दे (गैर-परक्राम्य मांग)। |
| सैन्य उपस्थिति | मध्य-पूर्व से अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी। | क्षेत्रीय स्थिरता के लिए उपस्थिति अनिवार्य। |
| लेबनान विवाद | इजरायली हमले रुकें, वरना युद्धविराम टूटेगा। | युद्धविराम की शर्तें लेबनान पर लागू नहीं होतीं। |
पाकिस्तान ही क्यों?
ईरान और अमेरिका दोनों के लिए पाकिस्तान एक सुविधाजनक मध्यस्थ है:
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ईरान के लिए: पाकिस्तान की सीमा ईरान से लगती है और वहां कोई अमेरिकी सैन्य अड्डा नहीं है।
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अमेरिका के लिए: पाकिस्तान 2004 से एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (Major Non-NATO Ally) है।
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