असम में चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से दिया इस्तीफा…

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है और मतदान में अब महज 20 दिन का समय शेष रह गया है। ऐन वक्त पर राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार की देर रात पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के इतने बड़े चेहरे का साथ छोड़ना पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे आगामी चुनावी नतीजों पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

आंतरिक कलह और उपेक्षा बनी इस्तीफे की वजह

प्रद्युत बोरदोलोई ने अपने त्यागपत्र में कांग्रेस के भीतर चल रही गहरी खींचतान और आंतरिक समस्याओं का खुलकर जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से निष्ठावान कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। बोरदोलोई ने इस्तीफे में स्पष्ट लिखा कि वे पार्टी में हो रही अपनी निरंतर उपेक्षा से आहत हैं। उनके अनुसार, शीर्ष नेतृत्व स्थानीय स्तर की समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहा है, जिसके चलते अब उनके पास पार्टी छोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।

कांग्रेस के चुनावी समीकरणों पर मंडराया संकट

असम की राजनीति में प्रद्युत बोरदोलोई का एक बड़ा जनाधार रहा है। ऐसे में चुनाव से ठीक 20 दिन पहले उनका जाना कांग्रेस के ‘महाजोत’ (गठबंधन) की रणनीतियों को पटरी से उतार सकता है। जानकारों का मानना है कि बोरदोलोई का जाना न केवल एक सांसद का जाना है, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष की उस चिंगारी को भी हवा दे रहा है, जो चुनाव के समय पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। अब राज्य में विपक्षी खेमे के सामने अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

भाजपा को मिल सकता है रणनीतिक फायदा

बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद से ही असम की सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। सत्ताधारी भाजपा इस घटनाक्रम को कांग्रेस की डूबती नैया के रूप में पेश कर रही है। हालांकि, बोरदोलोई ने अभी अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके इस फैसले ने असम की चुनावी जंग को और भी रोचक बना दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस बड़े नुकसान की भरपाई कैसे करती है और क्या इसका सीधा फायदा भाजपा को चुनाव के दौरान मिलेगा।

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