
भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सम्मान ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ (Dadasaheb Phalke Award) की घोषणा हो चुकी है। भारतीय सिनेमा में पांच दशकों से अधिक समय तक अपने सहज, स्वाभाविक और असाधारण अभिनय से अमिट छाप छोड़ने वाले दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में आयोजित होने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में औपचारिक रूप से प्रदान किया जाएगा। कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में डॉ. राजकुमार के 31 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह सर्वोच्च सम्मान एक बार फिर कन्नड़ इंडस्ट्री की झोली में आया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर अनंत नाग को बधाई दी और उनके शानदार योगदान की सराहना की। आइए जानते हैं कि पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर ‘KGF: चैप्टर 1’ में दमदार भूमिका निभाने वाले अनंत नाग आखिर कौन हैं और उनका सिनेमाई सफर कैसा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई, अभिनय की गहराई को सराहा
केंद्र सरकार द्वारा पुरस्कार की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा, “दिग्गज कलाकार अनंत नाग जी को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई। कई दशकों से उनके सहज अभिनय, उल्लेखनीय बहुमुखी प्रतिभा और असाधारण कलात्मकता ने भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने जिस भी किरदार को निभाया, उसमें एक दुर्लभ गहराई और प्रामाणिकता ला दी। यह वास्तव में एक बेहद प्रतिष्ठित और विशिष्ट कलाकार के लिए पूरी तरह से योग्य सम्मान है। मैं इस विशेष अवसर पर उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।”
मुंबई के रंगमंच से हुई शुरुआत, श्याम बेनेगल के समानांतर सिनेमा का बने चेहरा
अनंत नाग का जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के शिराली गांव में एक कोंकणी भाषी परिवार में हुआ था और उनका पूरा नाम ‘अनंत नागरकट्टे’ है। जब वे महज 11 वर्ष के थे, तो आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई चले गए। मुंबई में पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव थियेटर की तरफ हुआ। 1960 के दशक के आखिर में उन्होंने कोंकणी, कन्नड़, मराठी और हिंदी नाटकों के मंचन से अपने अभिनय करियर का सफर शुरू किया।
थियेटर में अनंत नाग के स्वाभाविक और संजीदा अभिनय को मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने पहचाना। बेनेगल ने साल 1974 में अपनी क्लासिक फिल्म ‘अंकुर’ से अनंत नाग को हिंदी सिनेमा में ब्रेक दिया। इसके बाद अनंत नाग 1970 और 80 के दशक के पैरेलल सिनेमा (समानांतर सिनेमा) के सबसे प्रमुख और भरोसेमंद चेहरों में शुमार हो गए। उन्होंने श्याम बेनेगल के साथ ‘निशांत’ (1975), ‘मंथन’ (1976), ‘भूमिका’ (1977) और ‘कोंडूरा’ (1978) जैसी भारतीय सिनेमा की मील का पत्थर साबित हुई फिल्मों में शानदार काम किया।
‘मालगुडी डेज’ से घर-घर में मिली पहचान, 300 से ज्यादा फिल्मों का अनुभव
अनंत नाग के करियर को अखिल भारतीय स्तर पर जो सबसे बड़ी और अमर पहचान मिली, वह थी दूरदर्शन की ऐतिहासिक टीवी सीरीज ‘मालगुडी डेज’ (Malgudi Days)। प्रख्यात लेखक आर. के. नारायण की कहानियों पर आधारित इस कल्ट सीरीज का निर्देशन अनंत नाग के छोटे भाई और मशहूर दिवंगत अभिनेता-निर्देशक शंकर नाग ने किया था। इस धारावाहिक के विभिन्न किरदारों में अनंत नाग के सादगी भरे अभिनय ने उन्हें देश के हर घर का चहेता बना दिया।
अनंत नाग ने अपने पांच दशक से अधिक लंबे करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। इनमें से 250 से ज्यादा फिल्में सिर्फ कन्नड़ भाषा में हैं, जबकि उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी सिनेमा में भी अपनी छाप छोड़ी। कन्नड़ सिनेमा में अभिनेत्री लक्ष्मी के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी ने 25 से अधिक फिल्मों में काम किया और यह जोड़ी कन्नड़ इतिहास की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में गिनी जाती है। जहां डॉ. राजकुमार कन्नड़ कमर्शियल सिनेमा के बेताज बादशाह थे, वहीं अनंत नाग ने कमर्शियल और आर्ट सिनेमा के बीच एक ऐसा अनूठा संतुलन बनाया जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
‘KGF’ और नई पीढ़ी के सिनेमा में भी छाया जादू
बदलते दौर के साथ अनंत नाग कभी अप्रासंगिक नहीं हुए। नई पीढ़ी के फिल्ममेकर्स ने उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और गंभीर आवाज का भरपूर इस्तेमाल किया।
प्रशांत नील के निर्देशन में बनी पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर ‘KGF: चैप्टर 1’ (2018) में अनंत नाग ने पत्रकार और लेखक ‘आनंद इंगलागी’ का बहुचर्चित किरदार निभाया था। फिल्म में ‘रॉकी भाई’ के साम्राज्य और कोलार गोल्ड फील्ड्स की पूरी दास्तान उन्हीं की गंभीर और प्रभावशाली आवाज में दर्शकों तक पहुंची थी, जिसने नई पीढ़ी के हिंदी और वैश्विक दर्शकों के बीच भी उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। इसके अलावा अल्जाइमर मरीज पर आधारित फिल्म ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’, ‘सरकारी हि. प्रा. शाले’ और ‘777 चार्ली’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने हर किसी को भावुक कर दिया था।
पद्म भूषण से लेकर दादा साहेब फाल्के तक के सम्मान
सिनेमा के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए अनंत नाग को 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (साउथ), 5 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार और कर्नाटक सरकार का प्रतिष्ठित राज्योत्सव पुरस्कार मिल चुका है। साल 2025 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा था। अभिनय के अलावा वे कर्नाटक की राजनीति में भी सक्रिय रहे और मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। अब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ की घोषणा उनके 50 साल से अधिक के समर्पण और अद्वितीय कला का सबसे बड़ा मुकाम है।
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