नई दिल्ली: राजनीति और कानून के गलियारों में अपनी पैनी दलीलों के लिए मशहूर अभिषेक मनु सिंघवी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। तेलंगाना से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करते ही सिंघवी की धन-दौलत का कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक हो गया है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी और उनके परिवार के पास कुल 2,558 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है, जो उन्हें देश के सबसे अमीर राजनेताओं की श्रेणी में खड़ा करती है।
हर साल ₹300 करोड़ से ज्यादा की कमाई, वकालत का ‘पावर गेम’
अभिषेक मनु सिंघवी की आय का ग्राफ किसी रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है। हलफनामे के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में उनकी घोषित आय 374 करोड़ रुपये से अधिक रही। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उनकी औसत सलाना कमाई ₹300 करोड़ के आसपास रही है। 2020-21 में जहां उनकी आय ₹158 करोड़ थी, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर ₹333 करोड़ तक पहुंच गई। देश के सबसे महंगे वकीलों में शुमार सिंघवी की यह आय मुख्य रूप से उनके लीगल प्रैक्टिस और निवेश से आती है।
पत्नी के पास ₹157 करोड़ के गहने और करोड़ों की पेंटिंग्स
सिंघवी की जीवनशैली कितनी भव्य है, इसका अंदाजा उनके शौक से लगाया जा सकता है। हलफनामे के अनुसार, सिंघवी की पत्नी अनिता सिंघवी के पास 157.53 करोड़ रुपये के आभूषण हैं, जबकि खुद अभिषेक मनु सिंघवी के पास ₹2.40 करोड़ के गहने दर्ज हैं। इतना ही नहीं, कला के प्रति उनके प्रेम का प्रमाण उनके पास मौजूद ₹25 करोड़ से अधिक की पेंटिंग्स और बेशकीमती आर्टवर्क (कलाकृतियां) हैं। उनके पास दिल्ली की प्राइम लोकेशंस पर आलीशान रिहायशी संपत्तियां भी मौजूद हैं।
₹352 करोड़ का पर्सनल लोन और ₹163 का कंप्यूटर
सिंघवी के हलफनामे में एक दिलचस्प पहलू उनके द्वारा दिए गए कर्ज का भी है। उन्होंने करीब ₹353.32 करोड़ के पर्सनल लोन दे रखे हैं, जबकि उनकी पत्नी ने भी विभिन्न कंपनियों को लगभग ₹73 करोड़ का लोन दिया है। हलफनामे की सबसे विचित्र बात “अन्य फिक्स्ड एसेट्स” की सूची में दिखी, जहां उन्होंने अपने ऑफिस के सामान का ब्यौरा देते हुए एक पुराने कंप्यूटर की कीमत मात्र ₹163 दर्ज की है। वहीं, उन पर ₹63 करोड़ से अधिक का आयकर (Income Tax) बकाया भी दर्ज है।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में भारी निवेश
2,558 करोड़ की इस विशाल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और बैंक डिपॉजिट में निवेशित है। हलफनामे के अनुसार, सिंघवी और उनके हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) ने वित्तीय बाजारों में बड़ा दांव लगा रखा है, जिससे उन्हें हर साल करोड़ों रुपये का रिटर्न मिलता है। वकालत के पेशे से होने वाली भारी भरकम फीस और इन निवेशों ने मिलकर सिंघवी को भारतीय राजनीति का ‘कॉर्पोरेट चेहरा’ बना दिया है।
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