शराब घोटाला: ‘मैडम, आप मेरी बात सुन लीजिए’, दिल्ली हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल ने खुद रखी दलीलें

नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 1 में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने खुद अपना पक्ष रखा। केजरीवाल ने ‘जज रिक्यूजल’ (जज को केस से हटाने) की मांग करते हुए अदालत के सामने कई गंभीर तर्क पेश किए।


केजरीवाल ने खुद संभाली कमान, वकील को हटने को कहा

सुनवाई शुरू होते ही अदालत ने नोटिस किया कि एक वकील केजरीवाल की मदद कर रहे हैं। इस पर जस्टिस शर्मा ने सख्त लहजे में कहा कि जब केजरीवाल खुद अपना पक्ष रखने की बात कह चुके हैं, तो कोई अन्य वकील ‘प्रॉक्सि’ (Proxy) नहीं कर सकता। इसके बाद केजरीवाल ने सीधे बेंच को संबोधित करना शुरू किया।

कोर्ट रूम में केजरीवाल और जज के बीच सीधी बातचीत

  • केजरीवाल: “मैं निजी तौर पर न्यायमूर्ति और न्यायालय की बहुत इज्जत करता हूं।”

  • बेंच: “सम्मान पारस्परिक है। आप सीधे मुद्दे पर आएं और अपनी बात रखें।”

  • केजरीवाल: “मैं यहां एक आरोपी की तरह खड़ा हूं, हालांकि ट्रायल कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है। मैडम, आप मेरी बात सुन लीजिए।”

  • जज स्वर्णकांता: “सुनाइये।”

केजरीवाल के 3 मुख्य तर्क: क्यों उठाई जज बदलने की मांग?

  1. बिना प्रतिवादी के आदेश: केजरीवाल ने कहा कि 9 मार्च को सीबीआई की याचिका पर अदालत ने उनकी मौजूदगी के बिना ही आदेश पारित कर दिया और टिप्पणी की कि निचली अदालत के फैसले में खामियां हैं।

  2. 40,000 पन्नों की चार्जशीट: उन्होंने दलील दी कि जिस मामले में 40 हजार से अधिक पन्ने हों, उसमें इतनी जल्दबाजी में बिना पूरा अध्ययन किए टिप्पणी करना उनकी निष्पक्षता पर आशंका पैदा करता है।

  3. कानून का हवाला: केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा, “कानून सीधा है—बात यह नहीं कि जज वास्तव में पक्षपाती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि मुकदमा लड़ने वाले के मन में कोई आशंका है या नहीं।”


सीबीआई का कड़ा विरोध: “यह अदालत नाटक का मंच नहीं”

सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की इस अर्जी का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने इसे “अवमाननापूर्ण” करार देते हुए कहा कि केजरीवाल और अन्य आरोपी सिर्फ समय बर्बाद करने और न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत कोई ‘नाटक का मंच’ नहीं है।

मामला क्या है?

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था और सीबीआई की जांच पर सख्त टिप्पणी की थी। इसी फैसले को सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस शर्मा ने प्रारंभिक सुनवाई में निचली अदालत की टिप्पणियों को ‘त्रुटिपूर्ण’ बताया था, जिसके बाद केजरीवाल ने आशंका जताई कि उन्हें इस बेंच से न्याय नहीं मिलेगा।

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