मुंबई। हिंदी सिनेमा में जब भी सावन, रोमांस और बारिश के सबसे खूबसूरत तरानों की बात होगी, तो साल 1979 में आई फिल्म ‘मंजिल’ (Manzil) का एक गाना हर किसी के जेहन में सबसे पहले कौंधेगा— ‘रिमझिम गिरे सावन’। मुंबई की मूसलाधार बारिश में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और मौसमी चटर्जी (Moushumi Chatterjee) पर फिल्माया गया यह गाना आज पांच दशक बाद भी मानसून का राष्ट्रीय गीत बना हुआ है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस रूहानी गाने को अपने शब्दों से सजाने वाले महान गीतकार योगेश गौड़ (जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ ‘योगेश’ के नाम से जानती थी) को अपने समकालीन गीतकारों जैसी शोहरत और व्यावसायिक पहचान कभी नहीं मिल सकी।
7 साल में बनकर तैयार हुई थी फिल्म ‘मंजिल’
दिग्गज निर्देशक बासु चटर्जी (Basu Chatterjee) के निर्देशन और ललिता पवार के बेटे जय पवार के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘मंजिल’ के बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। इस फिल्म का निर्माण साल 1972 में ही शुरू हो गया था, जब अमिताभ बच्चन को एक ‘फ्लॉप एक्टर’ के रूप में देखा जाता था। फिल्म को रिलीज होने में 7 साल का लंबा वक्त लगा और यह 1979 में सिनेमाघरों में आई।
उस दौर के चलन के विपरीत इस फिल्म में केवल 3 गाने थे, लेकिन आर.डी. बर्मन (R.D. Burman) के संगीत और योगेश के लिखे शब्दों ने जादू कर दिया। इस ऐतिहासिक गाने के सफर का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में व्यवस्थित है:
| गाने का नाम (Song) | गायक और संगीतकार (Credits) | गाने के दो अलग वर्जन और उनका मिजाज |
| रिमझिम गिरे सावन | संगीत: आर.डी. बर्मन | गीतकार: योगेश | पहला वर्जन (किशोर कुमार): बेहद शांत, गंभीर और इनडोर सेटअप में फिल्माया गया रूमानी गीत। |
| मंजिल (1979) | मुखड़ा: रिमझिम गिरे सावन, सुलग-सुलग जाए मन | दूसरा वर्जन (लता मंगेशकर): मुंबई की खुली सड़कों और मरीन ड्राइव पर बारिश में भीगते हुए फिल्माया गया आइकॉनिक वीडियो। |
इस गाने का अंतरा जितना सरल है, उतना ही दिल को छूने वाला है— “पहले भी यूं तो बरसे थे बादल, पहले भी यूं तो भीगा था अंचल, अब के बरस क्यों साजन…”
आनंद बक्शी जैसी शोहरत नहीं मिली, पर लिखे ‘कालजयी’ गीत
गीतकार योगेश गौड़ को कभी आनंद बक्शी, मजरूह सुल्तानपुरी या साहिर लुधियानवी जैसे बड़े बैनर्स और सुपरस्टार्स का साथ लगातार नहीं मिला, जिसके कारण वे बड़े व्यावसायिक मुकाम से दूर रहे। लेकिन उन्होंने जब भी कलम उठाई, सीधा दर्शकों के दिलों पर राज किया।
उनकी लेखनी से निकले कुछ सबसे बेहतरीन और सदाबहार गीतों की सूची इस प्रकार है:
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फिल्म ‘आनंद’: “कहीं दूर जब दिन ढल जाए…” और “जिंदगी कैसी है पहेली हाय…” (राजेश खन्ना के करियर के सबसे बेहतरीन गीत)।
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फिल्म ‘मिली’: “बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी…” और “आए तुम याद मुझे…” (अमिताभ बच्चन पर फिल्माए भावुक गीत)।
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फिल्म ‘रजनीगंधा’: “कई बार यूं भी देखा है…” (जिसके लिए उन्हें काफी सराहना मिली)।
फिल्म ‘मंजिल’ की कास्टिंग का दिलचस्प किस्सा
फिल्म ‘मंजिल’ से जुड़ा एक और मजेदार वाकया इसकी कास्टिंग को लेकर है। शुरुआती दिनों में इस फिल्म में मशहूर अभिनेता किरन कुमार (Kiran Kumar) भी एक अहम भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ एक-दो दिन शूटिंग भी कर ली थी।
तभी कुछ वैचारिक मतभेद के कारण किरन कुमार ने डायरेक्टर बासु चटर्जी से अमिताभ को फिल्म से हटाने की सिफारिश कर दी। बासु चटर्जी अपने काम और कलाकारों को लेकर बेहद पक्के थे; उन्होंने किरन कुमार की बात मानने के बजाय उन्हें ही फिल्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया और उनकी जगह अभिनेता राकेश पांडे को कास्ट कर लिया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि किरन कुमार ने खुद ही यह फिल्म छोड़ दी थी। खैर, फिल्म की अंदरूनी राजनीति जो भी रही हो, लेकिन योगेश का लिखा यह बारिश गीत सदियों तक प्रेम और सावन का अहसास कराता रहेगा।
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