ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना का ‘मिशन फ्यूल’: तेल और गैस संकट से निपटने का मास्टर प्लान तैयार, जानें कैसे बचेगी ऊर्जा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में छिड़े ईरान युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट (Oil & Gas Crisis) गहरा दिया है। तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका के बीच भारतीय सेना ने एक दूरदर्शी और रणनीतिक ‘मिशन प्लान’ तैयार किया है। सेना ने अपनी युद्धक क्षमता (Operational Capability) से समझौता किए बिना ईंधन और गैस की खपत में भारी कटौती करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने का फैसला किया है।

बायोगैस और सोलर पावर पर शिफ्ट होगी सेना

भारतीय सेना में प्रतिदिन लगभग 1,56,000 किलो कुकिंग गैस की खपत होती है। इस निर्भरता को कम करने के लिए सेना ने बायोगैस स्टोव खरीदने के आदेश जारी कर दिए हैं। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, बायोगैस के इस्तेमाल से एलपीजी की खपत में 20 फीसदी तक की कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा, अगले पांच वर्षों में सेना की खाली पड़ी जमीनों पर बड़े पैमाने पर सोलर प्लांट और पवन चक्की (Wind Turbines) लगाने की योजना है, ताकि बिजली की जरूरतों के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।

सैनिकों के मूवमेंट और वाहनों के लिए नए नियम

सेना के पास करीब 2 लाख वाहन हैं, जिनमें रोजाना भारी मात्रा में फ्यूल खर्च होता है। तेल संकट को देखते हुए अब जवानों के मूवमेंट को 400 किलोमीटर के दायरे में सीमित करने का फैसला लिया गया है।

  • व्हीकल पूलिंग: अब एक ही रूट पर जाने वाले कई कामों के लिए अलग-अलग गाड़ियों के बजाय पूलिंग सिस्टम अपनाया जाएगा।

  • CNG और इलेक्ट्रिक वाहन: सेना के बेड़े में इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है।

  • हवाई उड़ानों पर लगाम: प्रशिक्षण और गैर-जरूरी सैन्य उड़ानों को भी सीमित किया जा रहा है ताकि कीमती एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की बचत की जा सके।

होर्मुज संकट के बीच ‘देश गरिमा’ की सुरक्षित वापसी

ईरान-इजरायल तनाव के केंद्र ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जहां जहाजों पर हमले हो रहे हैं, वहीं भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘देश गरिमा’ 18 अप्रैल को इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित पार करने में सफल रहा। 31 भारतीय नाविकों और कच्चे तेल से भरा यह जहाज 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। यह भारत के लिए बड़ी राहत की बात है क्योंकि इससे पहले दो भारतीय जहाजों को गोलीबारी के कारण वापस लौटना पड़ा था।

अगले महीने से मिशन मोड में होगा काम

अधिकारियों के अनुसार, ईंधन बचाने के कुछ नियम लागू हो चुके हैं और शेष अगले एक-दो हफ्तों में पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे। सेना का यह कदम न केवल युद्ध जैसी स्थितियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे तेल के बोझ को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगा। भारतीय सेना अब अपनी जरूरतों के लिए ‘ग्रीन एनर्जी’ को प्राथमिकता दे रही है, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए एक मजबूत कवच साबित होगा।

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