मोहिनी एकादशी और रात्रि जागरण: श्रीहरि की विशेष कृपा पाने का अचूक मार्ग; जानें क्यों है रात भर जागने का विधान

नई दिल्ली: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। समुद्र मंथन के दौरान जब असुरों से अमृत की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने विश्वमोहिनी रूप धारण किया था, वह यही पावन तिथि थी। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, बिना जागरण के एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।


एकादशी की रात क्यों जरूरी है जागरण?

एकादशी का व्रत केवल अन्न त्यागने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी इंद्रियों को भगवान में लीन करने का पर्व है। रात्रि जागरण को लेकर शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है:

  • अनंत गुना फल: मान्यता है कि जागरण के समय श्रद्धापूर्वक एक क्षण के लिए भी ‘गोविन्द’ नाम लेने से व्रत का फल चौगुना हो जाता है। यदि कोई भक्त एक पहर (3 घंटे) तक नाम संकीर्तन करता है, तो उसे कोटि गुना फल की प्राप्ति होती है।

  • अश्वमेध यज्ञ के समान: भगवान विष्णु के निमित्त रात भर जागकर कीर्तन करने वाले व्यक्ति को एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य मिलता है।

  • प्रभु की प्रसन्नता: जो भक्त रात में भगवान के विग्रह के समक्ष नृत्य, कीर्तन और पुराण कथा का श्रवण करते हैं, श्रीहरि उन पर जन्म से मृत्यु काल तक अपनी कृपा बनाए रखते हैं।


समुद्र मंथन से जुड़ी है मोहिनी अवतार की कथा

मोहिनी एकादशी का सीधा संबंध देवासुर संग्राम और अमृत वितरण से है। जब असुरों ने देवताओं से अमृत कलश छीन लिया, तब भगवान विष्णु ने अत्यंत सुंदर ‘मोहिनी’ रूप धारण कर असुरों को मोहित कर लिया और चतुराई से सारा अमृत देवताओं को पिला दिया। जिस तिथि को भगवान ने यह दिव्य रूप धरा था, वह वैशाख शुक्ल एकादशी थी। इसीलिए इस दिन भगवान के मोहिनी स्वरूप की पूजा की जाती है।


आज बन रहा है दुर्लभ ‘त्रिवेणी’ संयोग

वर्ष 2026 की मोहिनी एकादशी बेहद खास है क्योंकि इस दिन नक्षत्रों और योगों का अद्भुत मेल हो रहा है। आज ध्रुव योग, अमृत सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग का त्रिवेणी संगम बन रहा है। ऐसे दुर्लभ संयोग में किया गया व्रत और रात्रि जागरण न केवल पिछले पापों का नाश करता है, बल्कि सुख-सौभाग्य के द्वार भी खोल देता है।


व्रत से मिलने वाले प्रमुख लाभ

  • पापों का शमन: जाने-अनजाने में हुए पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।

  • इतिहास साक्षी है: शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीराम ने सीता माता की खोज के समय और राजा युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के दौरान विजय प्राप्ति के लिए इस व्रत को किया था।

  • सौभाग्य की प्राप्ति: इस दिन ठाकुर जी का अभिषेक और पूजन करने से जीवन में ऐश्वर्य और शांति आती है।

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