
सनातन धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा (30 जुलाई 2026, गुरुवार) का महापर्व पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पावन दिन चारों वेदों के संपादक और महाभारत व श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी समर्पित है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा केवल गुरुजनों का सम्मान करने का दिन नहीं है, बल्कि इस शुभ अवसर पर किए गए विशेष आध्यात्मिक उपाय और दान-पुण्य से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और करियर में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
आइए जानते हैं कि 30 जुलाई को गुरु पूजन के साथ-साथ कौन-कौन से 4 महत्वपूर्ण कार्य जरूर करने चाहिए।
गुरु पूर्णिमा पर जरूर करें ये 4 मुख्य कार्य
1. गुरु पूजन और दक्षिणा अर्पित करें
गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके पश्चात अपने गुरुदेव के समक्ष उपस्थित होकर उन्हें ऊंचे आसन पर विराजमान करें।
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रोली, चंदन, अक्षत और पुष्पमाला से उनका पूजन करें।
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अपनी क्षमतानुसार वस्त्र, फल, मिष्ठान और दक्षिणा भेंट कर उनके चरणों में नमन करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।
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यदि आपके प्रत्यक्ष गुरु नहीं हैं, तो भगवान शिव, श्रीकृष्ण या भगवान दत्तात्रेय को गुरु मानकर पूजन करें।
2. महर्षि वेदव्यास जी की विशेष पूजा
यह दिन महर्षि वेदव्यास का जन्मोत्सव है, जिन्हें ज्ञान का सागर माना जाता है। घर के मंदिर में उनकी तस्वीर स्थापित कर चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। उनके द्वारा रचित धार्मिक ग्रंथों (जैसे भगवद्गीता या भागवत महापुराण) का पाठ करें। इससे बुद्धि तीव्र होती है और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
3. अन्न, वस्त्र दान और गौ-सेवा
आषाढ़ पूर्णिमा पर दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है:
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दान सामग्री: जरूरतमंदों को अनाज, मौसमी वस्त्र, छाता, जूते-चप्पल और भोजन का दान करें।
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गौ-सेवा: गौशाला जाकर गायों को हरा चारा खिलाएं या उनकी देखभाल के लिए सेवा राशि दान करें।
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मंदिर सेवा: धार्मिक स्थलों या मंदिरों में पूजन सामग्री भेंट करने से गृह क्लेश समाप्त होते हैं।
4. भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना
गुरु पूर्णिमा पर भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना से करियर और जीवन के अवरोध दूर होते हैं:
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शिव अभिषेक: शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें, साथ ही ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए चंदन का लेप लगाएं।
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हनुमान पूजा: हनुमान जी के समक्ष देसी घी का दीपक जलाकर सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें। भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री और तुलसी दल का भोग लगाएं।
गुरु पूर्णिमा के शुभ कार्य और उनके फल
| विशेष कार्य | सामग्री/विधि | मिलने वाला शुभ फल |
| गुरु पूजन | वस्त्र, फल, मिष्ठान व दक्षिणा | गुरु कृपा, जीवन में सही मार्गदर्शन |
| वेदव्यास पूजा | ग्रंथ पाठ, चंदन-धूप अर्पण | बुद्धि का विकास, ज्ञान वृद्धि |
| दान-पुण्य | अन्न, वस्त्र, छाता, गौ-सेवा | सुख-समृद्धि, पापों का नाश |
| शिव-हनुमान उपासना | शिवलिंग अभिषेक, हनुमान चालीसा | भय और ग्रह दोषों से मुक्ति |
सबसे महत्वपूर्ण: गुरु की शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लें
जीवन सुधार का मूल मंत्र:
गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल पूजा-पाठ और उपहार देने तक सीमित नहीं है। इस दिन का सबसे बड़ा महत्व यह है कि साधक अपने गुरु के दिखाए मार्ग पर चलने और उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं को जीवन में उतारने का दृढ़ संकल्प ले। मन को शांत रखकर आत्मचिंतन करें और जीवन में सदाचार, अनुशासन और सकारात्मकता अपनाने का निर्णय लें।
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