
सनातन धर्म परंपरा और वैदिक ज्योतिषशास्त्र में सावन मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या का विशेष धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह पावन तिथि न केवल प्रकृति और पितृ तर्पण को समर्पित है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कुंडली में मौजूद ग्रहों के दोषों को शांत करने के लिए भी एक दुर्लभ और सिद्ध अवसर मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक पापी, छाया और रहस्यमयी ग्रह माना गया है। जब किसी जातक की कुंडली में राहु का अशुभ प्रभाव या ‘राहु महादशा’ चल रही होती है, तो उसके जीवन में अचानक धन हानि, व्यापार में घाटा, मानसिक बीमारियां, अनजाना भय, पारिवारिक कलह और बनते कामों में अंतिम समय पर रुकावटें आने लगती हैं। हरियाली अमावस्या की तिथि राहु ग्रह से जुड़ी हर छोटी-बड़ी परेशानी को जड़ से समाप्त करने के लिए सबसे अधिक फलदायी मानी गई है। यदि आप भी लंबे समय से राहु की पीड़ा, कालसर्प दोष या जीवन में अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, तो हरियाली अमावस्या पर यह 1 विशेष उपाय करके अपने सोए हुए भाग्य को जगा सकते हैं और जीवन में अपार सुख-शांति ला सकते हैं।
राहु दोष के लक्षण और हरियाली अमावस्या पर इसका ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को भ्रम, अनिश्चितता, अचानक होने वाली घटनाओं और मानसिक असंतुलन का कारक माना गया है। जब जातक की कुंडली में राहु कमजोर या पीड़ित होता है, तो व्यक्ति का मन चंचल और व्यथित रहने लगता है। रात में अचानक डरावने सपने आना, घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान का बार-बार खराब होना, व्यापारिक साझेदारों के साथ धोखा होना, नशे या गलत संगति की ओर झुकाव बढ़ना और सिरदर्द व अनिद्रा जैसी समस्याएं राहु दोष के प्रमुख लक्षण हैं।
अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव और भगवान शिव माने जाते हैं। राहु एक छाया ग्रह है और अमावस्या की रात्रि अंधकार का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए इस दिन किए गए ज्योतिषीय उपाय सीधे राहु की नकारात्मक ऊर्जा को भस्म कर देते हैं। हरियाली अमावस्या के दिन जब पृथ्वी पर प्राकृतिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है, तब किए गए दान, स्नान, जलार्पण और मंत्र जाप का प्रभाव सौ गुना अधिक हो जाता है। यही कारण है कि ज्योतिषाचार्य हरियाली अमावस्या पर राहु शांति के उपाय करने की विशेष सलाह देते हैं।
हरियाली अमावस्या पर राहु दोष मुक्ति का वह 1 चमत्कारी महा-उपाय
हरियाली अमावस्या के दिन राहु दोष, कालसर्प योग और पितृ दोष से मुक्ति पाने का सबसे अचूक और सर्वमान्य 1 उपाय है: “जटा वाले नारियल का सिर से उतारा करके बहते जल में प्रवाह और पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीप प्रज्वलन”।
इस महा-उपाय को करने के लिए हरियाली अमावस्या के दिन एक जटावाला (पानी वाला) सूखा नारियल लें। उस नारियल पर थोड़ा सा नीले या काले रंग का सूती कपड़ा लपेटें और उस पर काले तिल तथा थोड़ा सा सरसों का तेल छिड़कें। इसके पश्चात जिस व्यक्ति पर राहु का प्रभाव या कष्ट है, उसके सिर से पैर तक घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में 7 बार उस नारियल को घुमाएं (उतारा करें)। उतारा करते समय मन ही मन ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र का जप करते रहें। उतारा करने के बाद उस नारियल को किसी पवित्र नदी या बहते हुए जल में भक्तिभाव से प्रवाहित कर दें। यदि बहता जल उपलब्ध न हो, तो उस नारियल को पीपल के पेड़ की जड़ में रख आएं।
यह 1 उपाय राहु की छाया और उससे उत्पन्न होने वाली समस्त नकारात्मक तरंगों को तुरंत खींच लेता है और जातक को अचानक आने वाली विपत्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
पीपल वृक्ष और शिवलिंग पूजा से जुड़ी संपूर्ण शास्त्रीय विधि
नारियल का उपाय करने के पश्चात हरियाली अमावस्या की शाम को पीपल के वृक्ष और शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जो इस उपाय के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।
सबसे पहले शाम ढलने (प्रदोष काल) के समय एक स्वच्छ तांबे या पीतल के लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल और कुश घास मिला लें। इस पावन जल से शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का 108 बार पाठ करें। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं गले में नाग धारण किया हुआ है और वे राहु-केतु के स्वामी माने जाते हैं, इसलिए शिव जी पर काले तिल अर्पित करने से राहु का कुप्रभाव पूरी तरह शांत हो जाता है।
इसके बाद किसी पवित्र पीपल के पेड़ के पास जाएं। पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ-साथ सभी देवी-देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। पीपल की जड़ में कच्चा दूध मिश्रित जल अर्पित करें। इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखी (चार बत्तियों वाला) दीपक जलाएं। दीपक में 4 काले तिल के दाने जरूर डालें। तत्पश्चात पीपल के वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें और राहु देव से अपने जाने-अनजाने पापों और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करें।
राहु मंत्र जाप, दान सामग्री और ध्यान रखने योग्य विशेष नियम
हरियाली अमावस्या पर उपाय करने के साथ-साथ मंत्र जाप और दान करने का बहुत बड़ा महात्म्य है। इस दिन राहु के सिद्ध बीजाक्षर मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है:
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राहु बीजाक्षर मंत्र: ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ अथवा ‘ॐ राहवे नमः’।
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जाप विधि: हरियाली अमावस्या की रात्रि में रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का कम से कम 1 या 3 माला जाप करें। यह मंत्र मानसिक स्पष्टता देता है और राहु के कारण होने वाले भ्रम को दूर करता है।
इसके साथ ही हरियाली अमावस्या के दिन राहु से जुड़ी सामग्रियों का दान करने से ग्रह शांति होती है। इस दिन किसी जरूरतमंद, निर्धन या दिव्यांग व्यक्ति को काले तिल, उड़द की दाल, काला कपड़ा, लोहे के बर्तन, जूते-चप्पल, सरसों का तेल या नारियल का दान करें। कोढ़ियों या सफाई कर्मचारियों को भोजन कराने से भी राहु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने अशुभ परिणाम देना बंद कर देते हैं।
उपाय करते समय कुछ सावधानियां रखना भी बेहद जरूरी है। हरियाली अमावस्या के पूरे दिन सात्विक आहार का सेवन करें। मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहें। घर में किसी वृद्ध, असहाय व्यक्ति या माता-पिता का अनादर न करें। घर के वातावरण को साफ-सुथरा रखें, विशेषकर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और शौचालय की सफाई पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि अशुद्धि से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है। पूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और अटूट विश्वास के साथ किया गया यह 1 उपाय आपके जीवन से राहु के सारे कष्ट मिटाकर सुख, समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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