हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, और बुधवार का दिन बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों में गणपति जी को ‘प्रथम पूज्य’ का स्थान प्राप्त है, यानी किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी पूजा के बिना अधूरी है। यदि आपके बनते हुए काम बार-बार बिगड़ जाते हैं, व्यापार में घाटा हो रहा है या घर में कलह का माहौल है, तो बुधवार के दिन बप्पा की विशेष पूजा करने से आपकी बंद किस्मत का ताला खुल सकता है।
बुधवार को ही क्यों की जाती है गणेश जी की पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार का दिन और बुध ग्रह दोनों ही बुद्धि और वाणी के कारक हैं। भगवान गणेश बुद्धि के अधिष्ठाता देव हैं, इसलिए इस दिन उनकी साधना करने से कुंडली में ‘बुध दोष’ शांत होता है और मंद पड़ी बुद्धि भी तीव्र हो जाती है। जो छात्र परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या जो लोग लंबे समय से करियर में रुकावटों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए बुधवार की पूजा किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती। बप्पा की कृपा से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त और ऐसे करें शुरुआत
बुधवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। साफ-सुथरे (संभव हो तो पीले या लाल रंग के) वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें और वहां गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। इसके बाद एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत (साबुत चावल) की ढेरी बनाकर गौरी पुत्र गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। याद रखें, गणेश पूजा के लिए सुबह का समय या शाम का प्रदोष काल सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।
पंचोपचार विधि से करें बप्पा का अभिषेक और श्रृंगार
स्थापना के बाद भगवान गणेश को जल और गंगाजल से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं, क्योंकि गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। बप्पा को अक्षत, लाल रंग के फूल, गेंदे के फूलों की माला और इत्र अर्पित करें। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण सामग्री—’दूर्वा घास’ (दूब) की 11 या 21 गांठें उनके मस्तक या चरणों में अर्पित करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए “ॐ गं गणपतये नमः” या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
लड्डू और मोदक का भोग, लेकिन एक जरूरी नियम का रखें ध्यान
विघ्नहर्ता को खुश करने का सबसे आसान तरीका है उनका पसंदीदा भोजन। बुधवार के दिन बप्पा को बूंदी के लड्डू या मोदक का भोग अवश्य लगाएं। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि सनातन धर्म में हर भगवान के भोग में तुलसी दल (पत्ता) रखा जाता है, लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना गया है। इसलिए गणेश जी के भोग में भूलकर भी तुलसी का पत्ता न रखें, बल्कि इसकी जगह दूर्वा का इस्तेमाल करें।
किस्मत बदलने वाले बुधवार के अचूक और सरल उपाय
अगर कड़ी मेहनत के बाद भी आपको सफलता नहीं मिल रही है, तो बुधवार के दिन गाय को हरी घास या पालक जरूर खिलाएं। यदि संभव हो तो अपनी उम्र या वजन के बराबर हरी घास किसी गौशाला में दान करें, इससे व्यापार और धन की तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। इसके अलावा, बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को मूंग की दाल या हरे रंग के कपड़ों का दान करना भी बेहद शुभ फल देता है।
अंत में, घी का दीपक और कपूर जलाकर गणेश जी की आरती करें। आरती समाप्त होने के बाद अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और पूरे परिवार में प्रसाद वितरित करें। सच्चे मन और सही नियमों से की गई यह पूजा आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के द्वार खोल देगी।
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