खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान का सबसे बड़ा सनसनीखेज सैन्य ऑपरेशन! 36 घंटे में ढह गए 62 आतंकवादियों के ठिकाने, ड्रोन और क्वाडकोप्टर से बरसाई मौत

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने एक विशाल काउंटर-टेररिज्म अभियान शुरू किया है। पिछले 36 घंटों के भीतर प्रांत के दो बेहद संवेदनशील जिलों—उत्तरी वजीरिस्तान और बन्नू—में सिलसिलेवार खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों (Intelligence-Based Operations) को अंजाम दिया गया, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), जिसे पाकिस्तानी राज्य आधिकारिक तौर पर ‘फिटना अल-खवारिज’ कहता है, के 62 से अधिक आतंकवादी मार गिराए गए हैं। इस कार्रवाई को हाल के महीनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ की गई सबसे बड़ी और घातक सैन्य कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की योजना कई दिनों से तैयार की जा रही थी और खुफिया इनपुट मिलने के तुरंत बाद जमीनी और हवाई हमलों का समन्वित जाल बिछाया गया, जिससे आतंकवादियों को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिला।

उत्तरी वजीरिस्तान के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में शुरू हुई यह कार्रवाई मंगलवार तड़के से जारी थी, जहाँ सुरक्षा बलों ने संदिग्ध स्थानों को चौबीसों घंटे निगरानी में रखा। इसके बाद जब आतंकवादियों की मौजूदगी और उनके ठिकानों की सटीक जानकारी पुख्ता हो गई, तब सटीक निशाना साधते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए गए। अकेले उत्तरी वजीरिस्तान में ही 52 से अधिक आतंकी ढेर कर दिए गए, जिनमें 4 शीर्ष रिंग लीडर यानी मुख्य कमांडर भी शामिल थे, जो कई सालों से सुरक्षा बलों पर हमलों और लक्षित हत्याओं के मामलों में वांटेड थे। यह इलाका लंबे समय से टीटीपी और उससे जुड़े चरमपंथी गुटों का गढ़ रहा है, जहाँ से वे पूरे देश में आतंकी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।

ड्रोन और क्वाडकोप्टर से रखी गई नजर: पेड़ों के नीचे छिपे थे टीटीपी के बड़े कमांडर

इस 36 घंटे चले सनसनीखेज सैन्य ऑपरेशन में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पारंपरिक रणनीतियों के बजाय आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया। घने जंगलों और दुर्गम घाटियों में छिपे आतंकवादियों को ढूंढ निकालने के लिए हाई-टेक क्वाडकोप्टर और टोही ड्रोन तैनात किए गए थे। अधिकारियों ने खुलासा किया कि आतंकवादी अक्सर हवाई निगरानी से बचने के लिए घने पेड़ों, प्राकृतिक गुफाओं और भूमिगत बंकरों के नीचे छिपे रहते थे। लेकिन नाइट-विज़न और थर्मल इमेजिंग कैमरों से लैस क्वाडकोप्टर की मदद से उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी गई और उनकी सही लोकेशन को पिनपॉइंट किया गया। जैसे ही आतंकवादी बाहर निकलने की कोशिश करते या एक जगह से दूसरी जगह जाने का प्रयास करते, उन पर तुरंत हमला बोल दिया जाता था।

ऑपरेशन के दौरान जब घायल आतंकवादी मौके से भागने की कोशिश कर रहे थे, तब भी हवाई निगरानी के जरिए उनका पीछा किया गया और उन्हें निशाना बनाया गया। इस सटीक तकनीक-आधारित हमले का परिणाम यह हुआ कि आतंकियों के चार मुख्य कमांडर, जो अपने कैडरों को कमान दे रहे थे, मौके पर ही मारे गए। इसके अलावा, सेना ने आतंकियों के कई प्रमुख गोला-बारूद के भंडारों और कमांड सेंटरों को पूरी तरह से विस्फोटकों से उड़ा दिया। मौकों से भारी मात्रा में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियार, मशीन गन, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG), नाइट-विज़न गॉगल्स और संचार उपकरण बरामद किए गए हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि ये आतंकी किसी बहुत बड़े हमले की साजिश रच रहे थे।

बन्नू में मदरसे को बनाया था ढाल: सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 10 आतंकी ढेर

उत्तरी वजीरिस्तान के अलावा बन्नू जिले में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी रही, जहाँ सुरक्षा बलों ने बहुस्तरीय ऑपरेशन चलाए। बन्नू के जानी खेल इलाके में अदनान क्रिकेट स्टेडियम के पास और अन्य इलाकों में आतंकियों की गतिविधियों की सूचना मिलने पर सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ आतंकवादियों ने अपनी पहचान छिपाने और स्थानीय आबादी का सुरक्षा कवच इस्तेमाल करने के लिए एक धार्मिक मदरसे को अपना ठिकाना बना लिया था। जब सुरक्षा बलों ने मदरसे और उसके आसपास की घेराबंदी की, तो अंदर छिपे आतंकियों ने उन पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी।

सुरक्षा बलों ने नागरिक हताहतों से बचने के लिए बेहद संयम और सूझबूझ का परिचय दिया। पहले परिसर के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों और छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उसके बाद सटीक काउंटर-अटैक शुरू किया गया। बन्नू में चले इस भीषण मुठभेड़ में 10 आतंकवादी ढेर हो गए जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यहाँ भी सशस्त्र ड्रोन की मदद से आतंकियों के छिपने के ठिकानों को निशाना बनाया गया। बन्नू में कई ठिकानों के नष्ट होने के साथ ही सेना ने आसपास के पूरे इलाके में सर्च और क्लियरेंस (सैनिटाइजेशन) अभियान चलाकर हर एक संदिग्ध घर और ठिकाने की तलाशी ली।

टीटीपी के बढ़ते हमलों से परेशान पाकिस्तान: ‘फिटना अल-खवारिज’ के खिलाफ आर-पार की जंग

पाकिस्तान में हाल के महीनों में आतंकवादी घटनाओं में अचानक अप्रत्याशित उछाल देखा गया है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में। नवंबर 2022 में टीटीपी और पाकिस्तान सरकार के बीच हुआ संघर्षविराम समझौता टूटने के बाद से ही इस उग्रवादी संगठन ने सेना, पुलिस और खुफिया अधिकारियों को निशाना बनाना तेज कर दिया था। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की रिपोर्टों के अनुसार, देश में सुरक्षा स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी, जिसके बाद सरकार और सैन्य नेतृत्व पर कड़े कदम उठाने का भारी दबाव था। राज्य द्वारा टीटीपी को आधिकारिक तौर पर ‘फिटना अल-खवारिज’ नाम दिया गया है, ताकि उसकी धार्मिक वैधता को खत्म किया जा सके और उसे पूरी तरह से राष्ट्र-विरोधी उग्रवादी गुट के रूप में चिन्हित किया जा सके।

पाकिस्तान की यह आक्रामक सैन्य कार्रवाई न केवल घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके तार पड़ोसी देश अफगानिस्तान से भी जुड़े हुए हैं। पाकिस्तान लगातार काबुल में सत्तारूढ़ अफगान तालिबान पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह टीटीपी के उग्रवादियों को अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करने की छूट दे रहा है। हालाँकि अफगान तालिबान इन दावों का खंडन करता रहा है, लेकिन सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और हमलों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को काफी बढ़ा दिया है। यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना ने अब अपनी सीमा के भीतर मौजूद तमाम आतंकी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने का सख्त रुख अपनाया है।

पाकिस्तान के अशांत इलाकों में आगे की रणनीति और सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा दावा

36 घंटों में 62 आतंकवादियों के खात्मे के बाद इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) और सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि खैबर पख्तूनख्वा से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होने तक यह अभियान बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेगा। सेना के शीर्ष कमांडरों ने साफ कर दिया है कि किसी भी आतंकवादी गुट को राज्य की संप्रभुता को चुनौती देने या समानांतर शासन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बड़े ऑपरेशन के बाद उत्तरी वजीरिस्तान, दक्षिण वजीरिस्तान, बन्नू और डेरा इस्माइल खान जैसे इलाकों में हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया है और प्रमुख मार्गों पर चेकिंग बढ़ा दी गई है।

दक्षिण एशिया के इस अशांत क्षेत्र में सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि 62 आतंकियों और उनके 4 बड़े कमांडरों की मौत टीटीपी के ढाँचे के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। हालांकि, यह देखना बाकी होगा कि क्या इस बड़े सैन्य प्रहार के बाद उग्रवादी संगठन अपने हमलों में कमी लाएंगे या फिर वे नए सिरे से अपने कैडरों को एकजुट करके पलटवार करने की कोशिश करेंगे। फिलहाल, खैबर पख्तूनख्वा के इस पूरे इलाके में पाकिस्तानी सेना का दबदबा कायम है और सैनिटाइजेशन ऑपरेशन के जरिए बचे-खुचे आतंकियों की तलाश जोर-शोर से की जा रही है।

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