दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी ‘आग’, म्यांमार-फिलीपींस में दाम हुए दोगुने; जानें भारत में क्यों थमी हैं कीमतें

नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026: ईरान युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) में हाहाकार मचा हुआ है। जहां दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से ऊपर जा रही हैं, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है। Globalpetrolprices.com के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कई देशों में ईंधन के दाम 100% से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं, लेकिन भारत में कीमतें अब भी स्थिर बनी हुई हैं।


ग्लोबल मार्केट का हाल: ब्रेंट क्रूड $109 के पार

युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल (Brent Crude) $71.28 प्रति बैरल पर था, जो अब उछलकर $109 के स्तर तक पहुंच गया है। इस सप्लाई संकट का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है:

  • म्यांमार: यहां सबसे बुरा हाल है। पेट्रोल के रेट में 100% और डीजल में 119.9% की भारी उछाल आई है।

  • फिलीपींस: डीजल 111% और पेट्रोल 71.6% महंगा हो गया है।

  • मलेशिया और यूएई: मलेशिया में डीजल के दाम 84.6% और यूएई में 86.1% तक चढ़ गए हैं।

  • अमेरिका और यूरोप: विकसित देशों में भी राहत नहीं है। अमेरिका में पेट्रोल 31.1% और डीजल 41.8% महंगा हुआ है, जबकि जर्मनी-फ्रांस में भी कीमतें 30% से अधिक बढ़ी हैं।


डीजल क्यों हो रहा है पेट्रोल से ज्यादा महंगा?

आंकड़ों से साफ है कि लगभग हर देश में डीजल की कीमतें पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। इसके पीछे मुख्य वजहें हैं:

  1. इंडस्ट्रियल डिमांड: फैक्ट्री और भारी ट्रांसपोर्टेशन में डीजल की भारी मांग।

  2. सप्लाई चेन: युद्ध के कारण लॉजिस्टिक्स और रिफाइनिंग लागत में जबरदस्त इजाफा।


भारत में क्यों नहीं बढ़े दाम? (सरकार का पक्ष)

दुनिया भर में मचे इस ‘ऑयल शॉक’ के बीच भारत में दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। इसके पीछे पेट्रोलियम मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कारण बताए हैं:

  • मोदी सरकार की प्रतिबद्धता: मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह स्पष्ट नीति है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटके से भारतीय नागरिकों और मिडिल क्लास की रक्षा की जाए।

  • तेल कंपनियों का घाटा: सरकार ने स्वीकार किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल महंगा होने से सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को वित्तीय घाटा हो रहा है, लेकिन फिलहाल इसका बोझ आम जनता की जेब पर नहीं डाला गया है।

  • रणनीतिक भंडार: भारत ने अपने रणनीतिक तेल भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) का प्रबंधन इस तरह किया है कि फिलहाल कीमतों को स्थिर रखा जा सके।

[Image showing global petrol price hike percentage vs India’s stable price line]


आगे क्या? विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार कब तक कीमतों को रोक पाएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्रेंट क्रूड कब तक $100 के ऊपर बना रहता है। यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है और कच्चा तेल इसी स्तर पर रहा, तो भविष्य में मामूली बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए वैश्विक संकट के बीच यह ‘स्थिरता’ किसी बड़े वरदान से कम नहीं है।

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