90 के दशक की सुपरहिट फिल्म ‘फूल और कांटे’ (Phool Aur Kaante) से बॉलीवुड में तहलका मचाने वाली मशहूर एक्ट्रेस मधु (Madhoo) ने उस दौर की फिल्मों और आज के सिनेमा के बदलते नजरिए पर बेहद बेबाकी से अपनी राय रखी है। मधु का मानना है कि 80 और 90 के दशक के सिनेमा में ‘प्यार’ के नाम पर जो कुछ भी दिखाया और परोसा जाता था, उसे आज का आधुनिक समाज और दर्शक कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
एक होलिया इंटरव्यू (IANS) के दौरान मधु ने पुराने दौर के विलेन रंजीत (Ranjeet) को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों और अपनी ही डेब्यू फिल्म ‘फूल और कांटे’ में दिखाए गए तथाकथित रोमांस की कड़े शब्दों में आलोचना की है।
‘पुराने जमाने में रंजीत सर को कहा जाता था रेप स्पेशलिस्ट’
इंटरव्यू में जब मधु से पुराने दौर की फिल्मों में महिलाओं के चित्रण और क्रूर सीन्स के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पुरानी फिल्मों के विलेन रंजीत का जिक्र करते हुए कहा:
एक्ट्रेस मधु का बयान: “पुराने जमाने की फिल्मों में रेप सीन्स को समाज और दर्शकों द्वारा बहुत आसानी से स्वीकार कर लिया जाता था, यही वजह थी कि उस दौर की लगभग हर दूसरी फिल्म में ऐसे हिंसक सीन डाले जाते थे। उन पर कभी कोई नैतिक सवाल नहीं उठाया जाता था। सच कहूं तो, इंडस्ट्री में रंजीत सर को तो ‘रेप स्पेशलिस्ट’ या ‘रेप एक्सपर्ट’ तक कहा जाने लगा था। उन सीन्स में महिलाओं को घसीटना, उनका छटपटाना और शारीरिक असॉल्ट (हमला) सब कुछ खुलेआम दिखाया जाता था। यहां तक कि मेरे करियर के शुरुआती दौर में मेरे साथ भी एक फिल्म में ऐसा ही सीन फिल्माया गया था।”
मधु ने राहत जताते हुए कहा कि आज के दौर के सिनेमा में ऐसे सीन्स बमुश्किल ही दिखाई देते हैं। और यदि कहानी की मांग के अनुसार ऐसा कुछ दिखाना भी पड़े, तो मेकर्स बहुत सावधानी, संवेदनशीलता और तकनीकी मर्यादा के साथ इसे फिल्माते हैं।
‘फूल और कांटे’ में रोमांस नहीं, बल्कि हैरासमेंट (उत्पीड़न) था
साल 1991 में आई अजय देवगन और मधु की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘फूल और कांटे’ को याद करते हुए एक्ट्रेस ने माना कि आज के नजरिए से देखने पर उस फिल्म के कई सीन गलत और परेशान करने वाले लगते हैं:
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छेड़छाड़ को माना रोमांस: मधु ने कहा, “अगर आप ध्यान से देखें, तो हमारी फिल्म ‘फूल और कांटे’ के शुरुआती दो गाने पूरी तरह से लड़की को छेड़ने (Eve-teasing) पर ही आधारित हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि कॉलेज के लड़के एक अकेली लड़की को घेरकर छेड़ रहे हैं, फब्तियां कस रहे हैं और सीटियां मार रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि उस समय स्क्रीन पर मैं (हिरोइन) और थिएटर में बैठी जनता इसे एक ‘रोमांस’ की तरह देख रही थी।”
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पीछा करने वाले से प्यार: उन्होंने आगे कहा, “कहानी में मुझे उसी लड़के (हीरो) से प्यार हो जाता है जो मुझे पूरे कॉलेज में लगातार परेशान कर रहा था और मेरा पीछा कर रहा था। यह प्यार नहीं, बल्कि उत्पीड़न था।”
‘आज ऐसा करने वाले लड़के सीधे जेल जाएंगे’
90 के दशक और आज के साल 2026 के समाज में आए बदलावों को रेखांकित करते हुए मधु ने कहा कि आज की पीढ़ी जागरूक है।
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कानूनी कार्रवाई: मधु ने हंसते हुए कहा, “आज के जमाने में यदि कोई लड़का कॉलेज में किसी लड़की का इस तरह पीछा करे या उसे परेशान करे, तो लड़की उसे रोमांस समझने के बजाय सीधे जेल की हवा खिलवा देगी।”
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सिनेमा की जिम्मेदारी: उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आज अगर कोई फिल्म निर्माता प्यार के नाम पर ऐसी छेड़छाड़ को सही ठहराएगा, तो दर्शक उसकी तारीफ करने के बजाय उसकी कड़ी आलोचना (Criticize) करेंगे। अगर सिनेमा इसे बढ़ावा देगा, तो आज के युवाओं को लगेगा कि उन्हें असल जिंदगी में भी लड़कियों के साथ ऐसा व्यवहार करने की ‘परमिशन’ मिल गई है।
90 के दशक में सुपरहिट था ये सब: मधु ने अंत में स्वीकार किया कि वे खुद उस दौर का हिस्सा रही हैं जब ये चीजें स्क्रीन पर बहुत बड़ी हिट साबित होती थीं और कोई उन्हें ट्रोल नहीं करता था। उन्होंने कहा कि सिनेमा अक्सर वही दिखाता है जो उस समय के समाज में चल रहा होता है, लेकिन खुशी की बात यह है कि अब समाज और सिनेमा दोनों की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आ चुका है।
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