Pukhraj Stone Rules: पुखराज पहनते वक्त जरूर पढ़ें यह चमत्कारी मंत्र, इन 2 रत्नों के साथ पहनने की भूल कतई न करें

पुखराज पहनने के नियम: रत्नशास्त्र में पुखराज (येलो सफायर) को नवग्रहों में सबसे भारी और शुभ ग्रह ‘बृहस्पति’ (गुरु) का प्रतिनिधित्व करने वाला बेहद शक्तिशाली रत्न माना गया है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से पुखराज धारण करने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य जाग उठता है, करियर में मनचाही तरक्की मिलती है, विवाह के योग बनते हैं और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। हालांकि, पुखराज का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब इसे सही उंगली, सही दिन और जागृत मंत्रों के साथ धारण किया जाए।

पुखराज धारण करने की सही विधि और महामंत्र

पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन सुबह के समय धारण करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे धारण करने से पहले एक कटोरी में कच्चे दूध और गंगाजल के मिश्रण में डालकर शुद्ध कर लें। इसके बाद भगवान विष्णु या देवगुरु बृहस्पति का ध्यान करते हुए रत्न को दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली (Index Finger) में धारण करें। पुखराज पहनते समय नीचे दिए गए दो मंत्रों में से किसी भी एक मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें:

  1. ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

  2. ॐ बुं बृहस्पतये नमः

इन 2 रत्नों के साथ गलती से भी ना पहनें पुखराज

रत्न विज्ञान के अनुसार, पुखराज की ऊर्जा बहुत ही सात्विक और शांत होती है। इसलिए इसे निम्नलिखित रत्नों के साथ पहनने से ऊर्जा का भयंकर टकराव होता है:

  • हीरा या ओपल (Diamond or Opal): हीरा और ओपल धन-वैभव के कारक शुक्र ग्रह के रत्न हैं। ज्योतिष में गुरु और शुक्र के बीच शत्रुता का भाव होने के कारण पुखराज के साथ इन्हें पहनने से वैवाहिक जीवन में दरार आ सकती है और सुख-सुविधाओं में भारी कमी होने लगती है।

  • नीलम (Blue Sapphire): नीलम न्याय के देवता शनि देव का अत्यंत उग्र और तीव्र प्रभावी रत्न है। गुरु और शनि की प्रकृति पूरी तरह भिन्न होने के कारण पुखराज और नीलम को एक साथ पहनने से मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट और दुर्घटनाओं का योग बन सकता है।

किन रत्नों के साथ पहन सकते हैं पुखराज?

यदि आप पुखराज के साथ कोई अन्य रत्न धारण करना चाहते हैं, तो देवगुरु बृहस्पति के परम मित्र ग्रहों के रत्न जैसे माणिक्य (सूर्य का रत्न), मूंगा (मंगल का रत्न) और मोती (चंद्रमा का रत्न) को बेझिझक पहन सकते हैं। यह संयोजन जातक के मान-सम्मान और पराक्रम में चार चांद लगाता है। (विशेष ध्यान दें: किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अपनी व्यक्तिगत कुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषी से अवश्य करवाएं।)

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