शाहरुख खान की फिल्म से कंगाल होने की कगार पर पहुंचे थे राकेश रोशन, फिर बेटे ऋतिक रोशन ने यूं बचाई पिता की डूबती नैया, जानें ‘कहो ना प्यार है’ की इनसाइड स्टोरी

बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई किस्से दर्ज हैं जहाँ एक फिल्म ने किसी का करियर आसमान पर पहुंचा दिया, तो किसी को आर्थिक बर्बादी की कगार पर ला खड़ा किया। ऐसा ही एक दौर हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राकेश रोशन की जिंदगी में भी आया था। 90 के दशक में ‘करण अर्जुन’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म देने के बाद राकेश रोशन ने शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित को लेकर साल 1997 में बड़े बजट की एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘कोयला’ बनाई थी। अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम वादियों में शूट हुई इस फिल्म का बजट उस दौर के हिसाब से बहुत ज्यादा था और इसके लिए राकेश रोशन ने बाजार से भारी ब्याज पर कर्ज भी लिया था।

जब फिल्म ‘कोयला’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो वह दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी और बॉक्स ऑफिस पर पिछड़ गई। इस फिल्म के असफल होने से राकेश रोशन को इतना बड़ा वित्तीय झटका लगा कि वे पूरी तरह से कर्ज के बोझ तले दब गए थे। वितरकों का दबाव और बाजार का कर्ज इतना बढ़ चुका था कि वे लगभग दिवालिया होने की कगार पर आ पहुंचे थे। घर और दफ्तर के खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। इस भयंकर आर्थिक संकट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और एक नई प्रेम कहानी वाली फिल्म की पटकथा पर काम करना शुरू किया। उस समय उनके पास किसी बड़े सुपरस्टार (जैसे शाहरुख या सलमान खान) को भारी फीस देकर साइन करने का बजट नहीं था।

असिस्टेंट डायरेक्टर से सुपरस्टार बनने का सफर: जब बेटे की मेहनत पर पिता को हुआ भरोसा

कर्ज के संकट के बीच जब राकेश रोशन अपनी नई लव स्टोरी की स्क्रिप्ट लिख रहे थे, तब उनके बेटे ऋतिक रोशन सेट पर उनका हाथ बंटा रहे थे। ऋतिक इससे पहले अपने पिता की कई फिल्मों जैसे ‘किशन कन्हैया’, ‘करण अर्जुन’ और ‘कोयला’ में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर (सहायक निर्देशक) काम कर चुके थे। ऋतिक का काम केवल तालियां बजाना या क्लैप बोर्ड पकड़ना नहीं था, बल्कि वे सेट पर झाड़ू लगाने से लेकर कलाकारों को डायलॉग्स याद कराने तक का हर छोटा-बड़ा काम करते थे।

इसी दौरान ऋतिक रोशन खुद को अंदर ही अंदर एक अभिनेता के रूप में ढालने में लगे हुए थे। वे चोरी-छिपे एक्टिंग क्लासेस लेते, डांस की प्रैक्टिस करते और जिम में घंटों पसीना बहाते थे। जब राकेश रोशन ने नई फिल्म बनाने का फैसला किया, तो कई शुभचिंतकों ने सलाह दी कि किसी नए लड़के पर रिस्क लेने के बजाय किसी स्थापित एक्टर को लिया जाए। लेकिन राकेश रोशन ने देखा कि ऋतिक ना केवल सेट के हर काम को बारीकी से समझते हैं, बल्कि उनमें एक कम्पलीट हीरो बनने का अनोखा जुनून, शानदार पर्सनैलिटी और गजब का डांस टैलेंट है।

तंगहाली के बावजूद राकेश रोशन ने अपनी बची-कुची संपत्ति और साख को दांव पर लगाकर बेटे ऋतिक रोशन को लॉन्च करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। इस तरह साल 2000 में फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

फिल्म का रिलीज होना था कि पूरे देश में ‘ऋतिक मेनिया’ का तूफान आ गया। ऋतिक रोशन के डबल रोल, उनके आइकॉनिक डांस मूव्स और अमीषा पटेल के साथ उनकी केमिस्ट्री ने रातों-रात इतिहास रच दिया। ‘कहो ना… प्यार है’ उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म बनी और इसने सबसे ज्यादा अवॉर्ड्स जीतने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इस एक फिल्म ने न केवल ऋतिक रोशन को रातों-रात देश का नया सुपरस्टार बना दिया, बल्कि उनके पिता राकेश रोशन को सारे कर्जों से मुक्त कर बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों की कतार में वापस ला खड़ा किया।

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