अयोध्या/राजनीति डेस्क: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir Donation Theft Case) को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है. इस गंभीर विवाद के बीच अब कांग्रेस ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर एक बड़ी और कूटनीतिक मांग कर दी है. उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust) को तत्काल प्रभाव से भंग करने और पूरी पारदर्शिता के साथ इसका नए सिरे से पुनर्गठन करने का आग्रह किया है.
लगातार उठ रहे विवादों से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस— कांग्रेस
युवा कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह देश-दुनिया के करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और सदियों के लंबे संघर्ष का पावन प्रतीक है. ऐसे में इस पवित्र मंदिर की पूरी व्यवस्था, प्रबंधन और वित्तीय प्रक्रियाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और जनविश्वास के अनुरूप होनी चाहिए.
गंभीर आरोपों का हवाला: पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में ट्रस्ट के भीतर से सामने आईं वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities), जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारियों और पदाधिकारियों के इस्तीफों जैसी अप्रिय घटनाओं ने राम भक्तों के मन में गहरी चिंता और कई तीखे सवाल पैदा कर दिए हैं. हालांकि, किसी भी आरोप का अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) से ही तय होगा, लेकिन तब तक देश की सर्वोच्च आस्था से जुड़े इस संस्थान की साख और जनविश्वास को बचाए रखना बेहद जरूरी है.
ट्रस्ट के पुनर्गठन के लिए कांग्रेस के 8 बड़े सुझाव
कांग्रेस नेता ने केवल ट्रस्ट पर सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि नए सिरे से बनने वाले संभावित ट्रस्ट के स्वरूप को लेकर पीएम मोदी को 8 महत्वपूर्ण सुझाव भी भेजे हैं:
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चारों शंकराचार्यों को मिले स्थान: सनातन धर्म के सर्वोच्च मार्गदर्शक चारों पूज्य शंकराचार्यों को ट्रस्ट में सीधा प्रतिनिधित्व दिया जाए.
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रामानंद संप्रदाय की भागीदारी: राम मंदिर की पूजा पद्धति और इतिहास से जुड़े रामानंद संप्रदाय के प्रतिनिधियों को इसमें अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए.
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मुकदमे के पैरोकार: राम जन्मभूमि के ऐतिहासिक कानूनी मुकदमे में दशकों तक अदालत में पक्ष रखने वाले मूल प्रतिनिधियों को स्थान मिले.
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न्यायपालिका की निगरानी: सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त (Retired) जज को ट्रस्ट का सक्रिय सदस्य बनाया जाए.
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प्रशासनिक अनुभव: सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारियों को ट्रस्ट में शामिल किया जाए.
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धार्मिक अखाड़ों को जगह: देश के प्रमुख और प्रतिष्ठित धार्मिक अखाड़ों के पीठाधीशों को इसमें उचित प्रतिनिधित्व मिले.
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बुद्धिजीवी वर्ग: समाज, धर्म, शिक्षा और गवर्नेंस से जुड़े निष्कलंक व प्रतिष्ठित नागरिकों को सदस्य नियुक्त किया जाए.
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शहीद कारसेवकों के परिवार: अयोध्या धाम के स्थानीय संतों के साथ-साथ राम मंदिर आंदोलन में अपना बलिदान देने वाले शहीद कारसेवकों के किसी एक परिजन को भी ट्रस्ट में सम्मानजनक स्थान दिया जाए.
‘ट्रस्ट को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रखा जाए’
शरद शुक्ला ने प्रधानमंत्री से विशेष रूप से आग्रह किया है कि पुनर्गठित किए जाने वाले नए ट्रस्ट को किसी भी तरह के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राजनीतिक प्रभाव (Political Influence) से पूरी तरह दूर रखा जाए, ताकि इसकी धार्मिक निष्पक्षता और वैश्विक विश्वसनीयता पर कभी कोई आंच न आए.
किसी व्यक्ति या विचारधारा का विरोध नहीं: पत्र के अंत में कांग्रेस नेता ने साफ किया कि उनका यह कदम किसी व्यक्ति विशेष, संगठन या राजनीतिक विचारधारा के विरोध में नहीं है. यह पत्र पूरी तरह से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की गरिमा, श्रद्धालुओं के भरोसे और इस पावन संस्थान की निष्कलंक प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण बनाए रखने की पवित्र भावना से लिखा गया है. अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर क्या रुख अपनाती है.
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