नई दिल्ली: साल 2026 में 25 जून का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से एक अभूतपूर्व और अत्यंत शक्तिशाली महासंयोग लेकर आ रहा है। इस पावन तिथि पर न केवल साल की सबसे कठिन और फलदायी मानी जाने वाली ‘निर्जला एकादशी’ का महाव्रत रखा जाएगा, बल्कि इसी दिन वेदों की माता मां गायत्री का प्राकट्य उत्सव यानी ‘गायत्री जयंती’ भी धूमधाम से मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, जब तप (व्रत) और नाद (मंत्र) का ऐसा दुर्लभ मिलन होता है, तो ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है। आइए जानते हैं इस महासंयोग का धार्मिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले अचूक उपाय।
जब एक साथ मिलती हैं दो महाशक्तियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब दो बड़ी और सिद्ध तिथियां एक ही दिन पड़ती हैं, तो उस दिन का आध्यात्मिक प्रभाव और उसकी ऊर्जा का स्तर बेहद तीव्र हो जाता है। निर्जला एकादशी जहां जगत के पालनहार भगवान विष्णु की परम कृपा और कायिक तप (शारीरिक अनुशासन) को दर्शाती है, वहीं गायत्री जयंती मानसिक शुद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी की साधना का दिन है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस महासंयोग में किए गए जप, तप और दान का फल आम दिनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है।
निर्जला एकादशी: शरीर और संकल्प का कड़ा इम्तिहान
निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सबसे ज्यादा प्रभावशाली और कठिन माना गया है, क्योंकि इसमें जातक को सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक बिना अन्न और जल (निर्जल) के रहना होता है।
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शारीरिक अनुशासन: यह व्रत व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत और संयमी बनाता है।
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विकल्प: जो लोग स्वास्थ्य कारणों से यह कठिन व्रत नहीं रख सकते, वे इस दिन सात्विक रहते हुए केवल भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और मंत्र जाप करके भी संपूर्ण पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं।
गायत्री जयंती: मंत्र साधना से दूर होगी हर नकारात्मकता
गायत्री जयंती का दिन मां गायत्री और संसार के सबसे शक्तिशाली महामंत्र ‘गायत्री मंत्र’ की महिमा को समर्पित है। फेंगशुई और भारतीय वास्तु की तरह ही, सनातन धर्म में भी मंत्रों की ध्वनि तरंगों को घर की नकारात्मक ऊर्जा (नेगेटिव एनर्जी) को नष्ट करने का सबसे बड़ा माध्यम माना गया है। इस दिन मां गायत्री की विधि-विधान से पूजा करने और गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि प्रखर होती है, मानसिक तनाव पूरी तरह गायब हो जाता है और जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
व्रत और मंत्र का अद्भुत कनेक्शन: ऐसे उठाएं लाभ
इस 25 जून को ‘व्रत’ (निर्जला एकादशी) और ‘मंत्र’ (गायत्री मंत्र) का जो अनूठा मेल हो रहा है, उसे आत्म-कल्याण के लिए एक स्वर्णिम अवसर माना जा रहा है। इस दिन अपनी आध्यात्मिक चेतना को जगाने के लिए इन बातों का पालन जरूर करें:
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मंत्रों की दोहरी शक्ति: सुबह के समय भगवान विष्णु के महामंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें और दोपहर या संध्याकाल में मां गायत्री के सिद्ध मंत्र ‘ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्’ की कम से कम एक माला (108 बार) का जाप अवश्य करें।
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महादान का पर्व: चूंकि ज्येष्ठ का महीना चल रहा है, इसलिए इस दिन राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, शर्बत बांटना, और खरबूजा, आम या मिट्टी के घड़े का दान करना सीधे बैकुंठ धाम का टिकट दिलाता है।
यदि आप इस विशेष दिन पर उपवास और मंत्र साधना का यह अनूठा नियम अपनाते हैं, तो आपके जीवन में न केवल मानसिक शांति आएगी, बल्कि रुके हुए सारे काम भी धीरे-धीरे बनने लगेंगे।
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