Ravi Pradosh Vrat Katha 2026: 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत पर जरूर पढ़ें यह कथा, सूर्यदेव और शिव जी दूर करेंगे हर संकट

सनातन धर्म में महादेव की विशेष कृपा दिलाने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। 12 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास का पहला रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इस व्रत के प्रभाव से भगवान शिव के साथ-साथ सूर्यदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि प्रदोष काल में इसकी पौराणिक व्रत कथा का पाठ या श्रवण न किया जाए। इस कथा को सुनने मात्र से जीवन के बड़े से बड़े संकट और आर्थिक तंगी का नाश होता है।

डाकुओं का घेराव और बालक की सादगी

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त का भोजन भी बड़ी मुश्किल से जुट पाता था। इन सबके बावजूद ब्राह्मण की पत्नी महादेव की अनन्य भक्त थी और पूरी निष्ठा से हर महीने प्रदोष व्रत रखती थी। एक दिन उनका पुत्र स्नान के लिए घर से दूर निकला, तो रास्ते में उसे कुछ खूंखार डाकुओं ने घेर लिया। डाकुओं को लगा कि इसके पास कोई कीमती सामान होगा, लेकिन तलाशी में केवल भोजन की एक छोटी सी पोटली मिली। बालक की दीनता और सादगी को देखकर डाकुओं का दिल पसीज गया और उन्होंने उसे बिना कोई नुकसान पहुंचाए छोड़ दिया।

सैनिकों की भूल और राजा का भयंकर न्याय

डाकुओं से छूटने के बाद आगे बढ़ते हुए शाम हो गई। थकान के कारण बालक एक घने पेड़ के नीचे बैठ गया और वहीं उसकी आंख लग गई। इत्तेफाक से उसी समय उस राज्य में एक बड़ी चोरी हुई थी और शाही सैनिक चोरों की तलाश में घूम रहे थे। पेड़ के नीचे सो रहे बालक को अकेला देखकर सैनिकों ने बिना जांच-पड़ताल किए उसे ही चोर समझ लिया और बंदी बनाकर राजा के दरबार में पेश कर दिया। राजा ने भी बिना किसी गहन जांच के उस अबोध ब्राह्मण पुत्र को दोषी करार देते हुए कालकोठरी में बंद करने का क्रूर आदेश सुना दिया।

मां की करुण पुकार और महादेव का राजा को स्वप्न

उधर, जब बेटा रात तक घर नहीं लौटा, तो मां का दिल किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा। संयोगवश अगले ही दिन रवि प्रदोष व्रत था। दुखी मां ने महादेव पर अपना अटूट विश्वास बनाए रखा और पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर प्रदोष काल में शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया। उसने रोते हुए भोलेनाथ से अपने निर्दोष बेटे की सकुशल वापसी की गुहार लगाई। मां की यह सच्ची और निष्काम भक्ति देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। उसी रात महादेव ने राजा के स्वप्न में आकर साक्षात दर्शन दिए और कहा, “जिस बालक को तुमने जेल में डाला है, वह सर्वथा निर्दोष है। उसे सुबह ही आदर सहित रिहा करो, अन्यथा तुम्हारा पूरा साम्राज्य तहस-नहस हो जाएगा।”

राजा की क्षमा याचना और ब्राह्मण परिवार का उद्धार

भयभीत राजा ने सुबह होते ही तुरंत उस ब्राह्मण पुत्र को कारागार से मुक्त कर अपने सामने बुलाया। जब राजा को पूरी सच्चाई का पता चला, तो उन्हें अपनी जल्दबाजी पर गहरा पछतावा हुआ। राजा ने बालक और उसके माता-पिता से हाथ जोड़कर क्षमा मांगी। राजा ने प्रायश्चित के रूप में उस गरीब ब्राह्मण परिवार को प्रचुर धन, भूमि और बहुमूल्य उपहार देकर सम्मानपूर्वक विदा किया। भगवान शिव की कृपा से उस परिवार की दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो गई। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु प्रदोष काल में इस कथा को पढ़ता है, महादेव उसके घर को धन-धान्य से भर देते हैं।

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