
उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो चुकी है। बीते लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को कड़ा मुकाबला देकर यूपी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी समाजवादी पार्टी अब किसी भी कीमत पर अपनी राजनीतिक जमीन को कमजोर नहीं होने देना चाहती। इसी चुनावी मिशन के तहत सपा के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ विधायक शिवपाल सिंह यादव ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां के सियासी गढ़ रामपुर का दौरा किया। शिवपाल यादव ने रामपुर जिला जेल में बंद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से करीब एक घंटे तक बंद कमरे में मुलाकात की। जेल से बाहर निकलते ही शिवपाल यादव ने सूबे की सियासत में हलचल मचाने वाला बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही आजम खां को राज्य का गृह मंत्री बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आजम परिवार पर हुए कथित प्रशासनिक ‘जुल्मों’ का बदला लेने और फर्जी मुकदमों को वापस लेने की दो टूक चेतावनी भी दे डाली।
जेल में मुलाकात और आजम के साथ कथित बदसलूकी पर सरकार पर बरसे शिवपाल
रामपुर जिला कारागार में आजम खां और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शिवपाल यादव बेहद आक्रामक तेवर में नजर आए। उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार पर वरिष्ठ नेता आजम खां को जेल के भीतर बुनियादी मानवीय सुविधाओं से वंचित रखने का संगीन आरोप लगाया। शिवपाल ने कहा कि 10 बार के विधायक, पूर्व सांसद और सरकार में कई बार कैबिनेट मंत्री रहे कद्दावर नेता को जेल में जमीन पर लिटाया जा रहा है और उन्हें समय पर जरूरी दवाइयां व कपड़े तक मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।
शिवपाल यादव ने कहा कि आजम खां ने तमाम जुल्म और ज्यादतियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी है और वे फौलाद की तरह डटे हुए हैं। शिवपाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बताया कि आजम खां ने जेल से पूरे प्रदेश के समाजवादियों के नाम एक स्पष्ट पैगाम भेजा है। आजम खां का संदेश है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत सभी वरिष्ठ नेता पूरे उत्तर प्रदेश का तूफानी दौरा करें, जनता के बीच जाकर माहौल तैयार करें और 2027 में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर इस दमनकारी व्यवस्था का अंत करें।
तजीन फातिमा से मिले और जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचकर दिया मजबूत समर्थन
जेल में मुलाकात संपन्न करने के बाद शिवपाल यादव सीधे आजम खां के निजी आवास पहुंचे, जहां उन्होंने आजम खां की पत्नी व पूर्व सांसद डॉ. तजीन फातिमा और बड़े बेटे अदीब आजम से मिलकर पारिवारिक हालात की जानकारी ली और हर कदम पर साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। इसके तुरंत बाद शिवपाल यादव मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के परिसर पहुंचे।
गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किए जाने के बाद से यह मामला पूरे प्रदेश में गर्म है, जिस पर फिलहाल अदालत से अंतरिम राहत मिली हुई है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों और छात्रों से संवाद करते हुए शिवपाल ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी इस शैक्षणिक संस्थान पर एक भी आंच नहीं आने देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन अधिकारियों ने कानून और नियमों की अनदेखी कर आजम खां और विश्वविद्यालय को निशाना बनाया है, सत्ता परिवर्तन के बाद उन सभी अफसरों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी जांच कराई जाएगी।
पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखने की सपा की मजबूत किलेबंदी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवपाल यादव का यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि 2027 के महासमर से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सोची-समझी घेराबंदी का हिस्सा है। रुहेलखंड और मुरादाबाद मंडल को सपा का सबसे मजबूत दुर्ग माना जाता रहा है, जिसकी मुख्य धुरी हमेशा आजम खां रहे हैं।
पिछले कुछ समय से जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के एनडीए पाले में चले जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा के सामने जाट-मुस्लिम समीकरण के बिखरने का खतरा पैदा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) लगातार सपा के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की ताक में हैं। ऐसे संवेदनशील वक्त में आजम खां के प्रति उपेक्षा का कोई भी संदेश सपा के लिए घातक साबित हो सकता था। यही कारण है कि पहले नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में विधायकों का दल, फिर सांसदों का प्रतिनिधिमंडल और अब खुद शिवपाल यादव रामपुर पहुंचे ताकि यह साफ संदेश जाए कि पूरी पार्टी आजम खां के पीछे चट्टान की तरह खड़ी है।
पार्टी के अंदरूनी मतभेद और मोहीबुल्लाह नदवी विवाद को थामने की कवायद
रामपुर की स्थानीय राजनीति में हाल के दिनों में आजम खां गुट और रामपुर से नवनिर्वाचित सपा सांसद मौलाना मोहीबुल्लाह नदवी के बीच दूरियों की खबरें सामने आ रही थीं। आजम समर्थकों में इस बात को लेकर नाराजगी थी कि उनके धुर विरोधियों को पार्टी संगठन में जगह दी जा रही है। इसके चलते एक तरह का ‘कोल्ड वॉर’ शुरू हो गया था, जिसे समय रहते खत्म करना सपा नेतृत्व के लिए बेहद जरूरी था।
अखिलेश यादव ने इस राजनीतिक गांठ को खोलने के लिए अपने सबसे अनुभवी रणनीतिकार शिवपाल यादव को आगे किया। शिवपाल यादव के आजम खां के साथ मुलायम सिंह यादव के दौर से ही बेहद आत्मीय और गहरे संबंध रहे हैं। शिवपाल ने रामपुर पहुंचकर आजम समर्थकों के गुस्से को शांत करने, पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और अंदरूनी गुटबाजी को समाप्त कर एक साझा मंच पर लाने का बड़ा काम किया है।
संभल से लेकर रामपुर तक आक्रामक तेवर: 2027 का सियासी रोडमैप तैयार
शिवपाल यादव ने अपने दौरे के दौरान संभल हिंसा और वहां दर्ज मुकदमों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संभल में बेकसूर लोगों पर दर्ज किए गए सभी झूठे मुकदमे सपा सरकार बनते ही वापस लिए जाएंगे और फर्जी रिपोर्ट बनाने वालों की जवाबदेही तय होगी। यह बयान दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी अब केवल सॉफ्ट अप्रोच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर और आक्रामक तरीके से स्टैंड लेगी।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी का यह रुख साफ करता है कि वह अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की सबसे अहम कड़ी यानी मुस्लिम समाज को किसी भी सूरत में छिटकने नहीं देना चाहती। शिवपाल यादव द्वारा आजम खां को ‘भावी गृह मंत्री’ घोषित करना न केवल आजम के राजनीतिक कद को पार्टी में सर्वोच्च बनाए रखने का प्रयास है, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाने का मास्टरस्ट्रोक भी है कि सत्ता में वापसी के बाद आजम खां का सम्मान और प्रभाव पहले से भी अधिक मजबूत होगा।
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