Somvati Amavasya: जब 108 परिक्रमा से लौट आए मृत पति के प्राण! पढ़ें सोना धोबिन की यह चमत्कारी कथा

सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या को बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। जब भी अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर व्रत रखने, पीपल के वृक्ष की पूजा करने और परिक्रमा लगाने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस पावन पर्व के पीछे एक बेहद प्राचीन और चमत्कारी पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसे सुने बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं सोना धोबिन और पीपल की 108 परिक्रमा की वह पूरी कहानी, जिसने यमराज के लेखे को भी बदल दिया था।

एक गरीब कन्या की हथेली और साधु की भविष्यवाणी

पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले एक बेहद गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। उनकी एक बेटी थी जो रूपवती होने के साथ-साथ अत्यंत संस्कारी और गुणवान भी थी। कन्या विवाह के योग्य हो चुकी थी, लेकिन अत्यधिक गरीबी के कारण उसके विवाह में बार-बार बड़ी बाधाएं आ रही थीं। एक दिन उस गरीब ब्राह्मण के घर एक सिद्ध साधु का आगमन हुआ। कन्या ने निश्छल भाव से और पूरे मन से साधु महाराज की सेवा-सत्कार की।

कन्या की सेवा से प्रसन्न होकर साधु ने उसे दीर्घायु होने का आशीर्वाद तो दिया, लेकिन साथ ही उसकी हथेली देखकर एक चिंताजनक बात कही। साधु ने बताया कि इस कन्या की हस्तरेखाओं में विवाह का शुभ योग दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे इसका वैवाहिक जीवन संकट में पड़ सकता है।

साधु ने बताया उपाय: कौन थी सोना धोबिन?

साधु की बात सुनकर ब्राह्मण और उसकी पत्नी अत्यंत दुखी और चिंतित हो गए। उन्होंने रोते हुए साधु महाराज से इसका उपाय पूछा। तब साधु ने ध्यान लगाकर बताया कि पास के ही एक गांव में ‘सोना’ नाम की एक धोबिन रहती है। वह अत्यंत पतिव्रता, सदाचारी और धर्मपरायण महिला है। यदि तुम्हारी बेटी गुप्त रूप से उसकी सेवा करे और विवाह के समय सोना धोबिन अपनी मांग का सिंदूर इस कन्या की मांग में सजा दे, तो इसके जीवन का यह बड़ा दोष हमेशा के लिए दूर हो सकता है।

गुप्त सेवा और सुबह का वो रहस्यमयी मंजर

साधु की बात को शिरोधार्य कर वह ब्राह्मण कन्या अगले ही दिन से तड़के अंधेरे में उठकर सोना धोबिन के घर जाने लगी। वह बिना किसी को बताए चुपचाप सोना धोबिन के घर का सारा झाड़ू-पोछा और साफ-सफाई का काम कर देती और किसी के जागने से पहले अपने घर लौट आती। कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा।

एक दिन सोना धोबिन ने अपनी बहू की तारीफ करते हुए पूछा कि तुम रोज सुबह इतनी जल्दी उठकर घर का सारा काम कैसे निपटा लेती हो? बहू ने आश्चर्यचकित होकर कहा कि सासू मां, मुझे तो लगा कि यह काम आप खुद ही भोर में उठकर करती हैं। जब दोनों को असलियत का पता चला, तो वे हैरान रह गईं और उन्होंने इस रहस्यमयी मददगार को पकड़ने का फैसला किया।

जब पकड़ा गया राज और सोना धोबिन ने दिया वचन

अगली सुबह सोना धोबिन अंधेरे में ही जागकर छिप गई। जैसे ही वह ब्राह्मण कन्या हमेशा की तरह चुपचाप काम करने आई, सोना धोबिन ने उसे देख लिया। जब कन्या काम खत्म करके लौटने लगी, तो सोना धोबिन ने उसे रोक लिया और पूछा, “पुत्री, तुम कौन हो और इस तरह छिपकर मेरे घर की सेवा क्यों कर रही हो?”

तब उस सरल हृदय कन्या ने साधु महाराज द्वारा बताई गई पूरी बात रोते हुए कह सुनाई। कन्या की व्यथा और निश्छल भक्ति को देखकर सोना धोबिन का दिल पसीज गया। उसने भावुक होकर तुरंत उस कन्या की मदद करने का वचन दे दिया।

सिंदूर दान करते ही बिखरा वज्रपात और शुरू हुआ सोमवती अमावस्या का चमत्कार

कुछ समय बाद जब उस ब्राह्मण कन्या के विवाह का दिन आया, तो वादे के मुताबिक सोना धोबिन उसके घर पहुंची। उसने जैसे ही अपनी मांग का पवित्र सिंदूर निकालकर उस कन्या की मांग में लगाया, ठीक उसी समय चमत्कारिक रूप से फेरबदल हुआ। कन्या का दोष तो कट गया, लेकिन वहां दूर गांव में सोना धोबिन के पति के प्राण पखेरू उड़ गए। अपनी अलौकिक शक्ति से सोना धोबिन तुरंत समझ गई कि यह सब उसके सिंदूर दान और त्याग का ही परिणाम है।

संयोगवश उस दिन सोमवती अमावस्या थी। सोना धोबिन सुबह से अपने घर से बिना अन्न-जल ग्रहण किए यानी निराहार निकली थी। वापस लौटते समय रास्ते में उसे एक विशाल पीपल का पेड़ दिखाई दिया। अपने पति को दोबारा जीवित करने के दृढ़ संकल्प के साथ वह पीपल के वृक्ष के पास बैठ गई।

पीपल की 108 परिक्रमा और लौट आए पति के प्राण

चूंकि वह रास्ते में थी और उसके पास पूजा की कोई पारंपरिक सामग्री नहीं थी, इसलिए उसने जमीन से ईंट के छोटे-छोटे 108 टुकड़े उठाए। उसने प्रत्येक टुकड़े को पीपल के पास रखते हुए पूरे नियम और सच्ची श्रद्धा के साथ 108 बार भंवरी दी और पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमाएं पूरी कीं। परिक्रमा और अपनी प्रार्थना पूरी करने के बाद ही उसने जल की एक बूंद ग्रहण की।

मान्यता है कि सोना धोबिन के इस कठिन पतिव्रत धर्म, असीम त्याग और सोमवती अमावस्या के दिन की गई पीपल की 108 परिक्रमा के पुण्य प्रताप से यमराज को भी झुकना पड़ा। जैसे ही उसकी पूजा संपन्न हुई, वहां उसके घर पर मृत पड़े पति के शरीर में अचानक हलचल हुई और उसके प्राण वापस लौट आए।

तब से ही यह अटूट विश्वास चला आ रहा है कि जो भी सुहागिन महिला सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखकर पीपल के पेड़ की पूजा और 108 बार परिक्रमा करती है, उसके पति की उम्र लंबी होती है और उसके घर में कभी दरिद्रता या वैधव्य का दुख प्रवेश नहीं करता।

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