
ज्योतिष डेस्क। सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना का विशेष महत्व है, जिसमें ‘पंचक’ को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह की जिज्ञासाएं और आशंकाएं रहती हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं, तो उस कालखंड को पंचक कहा जाता है। इस बार का पंचक बेहद खास है क्योंकि इसकी शुरुआत सोमवार से हो रही है। सोमवार से शुरू होने के कारण ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘राज पंचक’ की संज्ञा दी गई है, जिसे अन्य पंचकों की तुलना में काफी प्रभावशाली और शुभ फलदायी माना जाता है।
क्या है पंचक और पांच नक्षत्रों का यह अनूठा संगम?
ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, जब पांच विशेष नक्षत्रों का संयोग बनता है, तब पंचक काल की शुरुआत होती है। इसमें धनिष्ठा नक्षत्र का अंतिम चरण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र शामिल हैं। इन पांच नक्षत्रों के मेल से बनने वाले इस समय को ही पंचक कहा जाता है। आमतौर पर पंचक को अशुभ कार्यों की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन इसकी प्रकृति इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस दिन शुरू हो रहा है। पांच नक्षत्रों का यह चक्र हर महीने आता है और मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अपना प्रभाव डालता है।
राज पंचक: शुभ कार्यों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार
इस बार पंचक का आरंभ सोमवार को हो रहा है, जिसे शास्त्रों में ‘राज पंचक’ कहा गया है। ज्योतिषियों का मानना है कि राज पंचक अशुभ नहीं बल्कि सुख-सुविधाओं में वृद्धि करने वाला होता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। विशेष रूप से सरकारी कार्यों, संपत्ति की खरीदारी, नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर और आर्थिक निवेश के लिए राज पंचक को उत्तम माना गया है। यह पंचक जातकों को मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा दिलाने में सहायक सिद्ध होता है, इसलिए इसे अन्य पंचकों की तरह वर्जित नहीं माना जाता।
पंचक के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
भले ही राज पंचक को शुभ माना गया है, लेकिन पंचक के सामान्य नियमों के अनुसार कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान लकड़ी इकट्ठा करना, घर की छत डलवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा करना और बेड या चारपाई बनाना वर्जित माना गया है। ज्योतिषियों का कहना है कि भले ही राज पंचक सफलता देने वाला हो, लेकिन इन पांच विशिष्ट निषेध कार्यों को टालना ही बेहतर होता है। यदि कोई कार्य अनिवार्य हो, तो विद्वान पुरोहित से सलाह लेकर ही कदम बढ़ाना चाहिए।
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