बंगाल चुनाव में ‘नोट’ पर कड़ा पहरा: भबानीपुर समेत 55 सीटें ‘अति-संवेदनशील’ घोषित, इलेक्शन कमीशन ने क्यों तैनात किए 100 पर्यवेक्षक

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच निर्वाचन आयोग (EC) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हाई-प्रोफाइल सीट भबानीपुर सहित राज्य की 55 विधानसभा सीटों को ‘खर्च के लिहाज से संवेदनशील’ घोषित कर दिया गया है। आयोग को अंदेशा है कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं को लुभाने के लिए तय सीमा से अधिक धन और अवैध सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी के मद्देनजर, बंगाल के इतिहास में पहली बार 100 व्यय पर्यवेक्षकों (Expenditure Observers) की भारी-भरकम फौज तैनात की गई है।

कैश और फ्रीबीज की जब्ती में बंगाल दूसरे नंबर पर

चुनाव आयोग द्वारा इतनी कड़ाई बरतने के पीछे ठोस आंकड़े हैं। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, चुनावी राज्यों में अवैध कैश, शराब और नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले में तमिलनाडु के बाद बंगाल देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

  • अब तक चुनावी राज्यों से कुल 1,281 करोड़ रुपये की अवैध सामग्री जब्त की जा चुकी है।

  • अकेले बंगाल में 17 अप्रैल तक 430 करोड़ रुपये का सामान पकड़ा गया है।

  • जब्त सामानों में 105 करोड़ के जवाहरात और 178 करोड़ का वह सामान शामिल है, जिसे ‘फ्री’ बांटने के लिए रखा गया था।

सीमावर्ती इलाके और कोलकाता की 7 सीटें रडार पर

आयोग ने उन क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी है जहां से भारी मात्रा में अवैध नकदी बरामद हुई है। इसमें उत्तर 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे सीमांत जिले शामिल हैं।

  • बांग्लादेश सीमा से सटी 8 सीटें: बिधाननगर, राजरहाट-न्यूटाउन, बारासात और भाटपारा जैसी सीटों पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है।

  • कोलकाता का पहरा: महानगर की 7 सीटों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जिनमें उत्तर कोलकाता की 3 और दक्षिण कोलकाता की 4 सीटें शामिल हैं।

भबानीपुर: सबसे बड़ी ‘जंग’ और सबसे सख्त ‘निगरानी’

भबानीपुर सीट को इस सूची में शामिल करना सबसे ज्यादा चर्चा बटोर रहा है। यह बंगाल की सबसे चर्चित ‘हॉट सीट’ है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा और कांटे का मुकाबला है। चूंकि दोनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है, इसलिए आयोग को डर है कि यहां धनबल का अत्यधिक प्रयोग हो सकता है। बता दें कि 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता बनर्जी ने भबानीपुर उपचुनाव जीतकर ही अपनी सत्ता बरकरार रखी थी।

100 पर्यवेक्षक: बंगाल को क्यों मिली इतनी प्राथमिकता?

फिलहाल देश के 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने सबसे ज्यादा फोकस बंगाल पर किया है। आयोग का मानना है कि यदि यहां सख्त निगरानी नहीं की गई, तो अवैध तरीकों से वोटरों को प्रभावित करने की कोशिशें चुनाव की निष्पक्षता बिगाड़ सकती हैं। 100 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का उद्देश्य हर उम्मीदवार के चुनावी खर्च के एक-एक रुपये का हिसाब रखना और संदिग्ध लेन-देन पर तत्काल कार्रवाई करना है।

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