चेन्नै। तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी सितारों का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना कोई नई बात नहीं है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव ने एक ऐसी पटकथा लिख दी है जिसने राज्य के दशकों पुराने राजनीतिक इतिहास को हिलाकर रख दिया है। सुपरस्टार ‘थलापति’ विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के चुनावी डेब्यू ने एग्जिट पोल्स में जो आंकड़े दिखाए हैं, उसने एमके स्टालिन (DMK) और एडप्पादी पलानीस्वामी (AIADMK) की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
एग्जिट पोल्स के चौंकाने वाले आंकड़े: किंगमेकर या किंग?
23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद 29 अप्रैल को जारी हुए एग्जिट पोल्स में विजय की पार्टी को लेकर जो अनुमान सामने आए हैं, वे किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसे हैं:
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ऐक्सिस माय इंडिया (Axis My India): सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए TVK को 98 से 120 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। अगर यह सच साबित हुआ, तो विजय सीधे सत्ता की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं।
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पीपल्स इनसाइट (People’s Insight): विजय को 30-40 सीटें देकर एक मजबूत ‘तीसरे मोर्चे’ के रूप में देख रहा है।
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पी-मार्क और पीपल्स पल्स: इन्हें 16 से 26 सीटों के बीच रख रहे हैं, जिसका मतलब है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में विजय ही तय करेंगे कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
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अन्य पोल्स: मैट्रिज और वोटवाइब ने 4 से 12 सीटों का अनुमान लगाया है, जो उन्हें एक प्रभावशाली नई शुरुआत की श्रेणी में रखता है।
विजय की ‘मास्टरक्लास’ रणनीतियां: सिनेमाई स्टारडम से जमीनी जुड़ाव तक
विजय ने कमल हासन की तरह केवल रैलियों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि एम.जी. रामचंद्रन (MGR) वाले पुराने ‘मसीहा’ फॉर्मूले को डिजिटल अवतार में पेश किया:
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डिजिटल और होलोग्राम रैलियां: दूर-दराज के गांवों तक पहुंचने के लिए विजय ने होलोग्राम तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे मतदाता मंत्रमुग्ध रह गए।
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व्हिसल कोलम (रंगोली): महिलाओं को जोड़ने के लिए घर के बाहर पार्टी के चुनाव चिह्न ‘सीटी’ की रंगोली बनाने का अभियान चलाया, जो एक फ्री विज्ञापन साबित हुआ।
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किड-फ्लुएंसिंग: बच्चों के जरिए माता-पिता से वोट मांगने की भावनात्मक अपील ने सोशल मीडिया पर भारी लहर पैदा की।
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साइलेंट कैंपेन: वोटिंग के दिन समर्थकों का ‘सफेद शर्ट और खाकी पैंट’ पहनकर निकलना आचार संहिता के बीच भी एक मूक प्रचार का हिस्सा बना।
विरासत बनाम वास्तविकता: MGR जैसी सफलता या कमल हासन जैसी विफलता?
तमिलनाडु में रजनीकांत ने कभी मैदान नहीं संभाला और कमल हासन चुनावी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। लेकिन विजय की तुलना अब MGR और जयललिता से हो रही है। विजय की ताकत उनका युवाओं और महिलाओं के बीच जबरदस्त क्रेज है। हालांकि, उनके सफर में कुछ काले धब्बे भी लगे हैं:
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करूर रैली हादसा: भगदड़ में 41 लोगों की मौत ने उनके प्रबंधन पर सवाल खड़े किए।
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चेन्नई बूथ पर हंगामा: वोटिंग के दिन उनके प्रशंसकों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने से बुजुर्गों को हुई परेशानी ने उनकी ‘प्रशासनिक छवि’ को चुनौती दी है।
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