उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बकरीद का त्यौहार उस समय तनावपूर्ण हो गया जब मस्जिद के बाहर नमाज पढ़ने को लेकर पुलिस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। जहांगीराबाद इलाके में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर मौजूद क्षेत्राधिकारी (CO) को सपा नेताओं को शांत करने के लिए हाथ तक जोड़ने पड़ गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
घटना की शुरुआत जहांगीराबाद की ईदगाह मस्जिद के बाहर हुई। नियम के मुताबिक, सड़क पर नमाज पढ़ने पर पाबंदी है। ईदगाह मस्जिद पूरी तरह भर जाने के बाद कुछ लोगों ने बाहर सड़क पर नमाज पढ़ने की कोशिश की, जिसे वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। इसी बात को लेकर नमाजियों और पुलिस के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने बड़ा रूप ले लिया और मौके पर मौजूद लोगों ने समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक चौधरी होशियार सिंह और जिला पंचायत सदस्य सुनील चरोरा को इसकी सूचना दी।
जब पुलिस के सामने अड़े सपा नेता
सूचना मिलते ही पूर्व विधायक होशियार सिंह और सुनील चरोरा अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर मनमानी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। स्थिति को बेकाबू होता देख अनूपशहर के CO विकास चौहान मौके पर पहुंचे। उन्होंने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सपा नेताओं के सामने हाथ जोड़कर विनती की और वहां से हटने का आग्रह किया। CO का हाथ जोड़ते हुए वीडियो अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पुलिस का पक्ष: ‘माहौल बिगाड़ने की कोशिश’
इस मामले पर जिले के उच्चाधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया है। एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि ईदगाह सुबह 7:30 बजे ही पूरी तरह भर चुकी थी। इसके बाद पूर्व विधायक होशियार सिंह और ब्लॉक प्रमुख पति मनोज खालौर समेत अन्य लोग बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने आरोप लगाया कि ये नेता वहां मौजूद लोगों को उकसाने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे थे। फिलहाल, मामले की विस्तृत जांच एसपी देहात को सौंप दी गई है।
पूर्व विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर, पूर्व विधायक चौधरी होशियार सिंह ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए कहा कि ईदगाह परिसर में अभी पर्याप्त जगह थी, लेकिन पुलिस ने समय से पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर नमाजियों को जबरन रोक दिया। इसी गलत रवैये का विरोध किया जा रहा था। फिलहाल, इलाके में शांति है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है।
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