फैशन का वो दौर जब घुटती थी महिलाओं की सांस: कोर्सेट से लेकर आज के कंफर्ट तक…

लाइफस्टाइल डेस्क। फैशन की दुनिया आज जितनी आरामदायक और खुली नजर आती है, इतिहास के पन्नों में यह उतनी ही दर्दनाक और बंदिशों भरी थी। एक दौर वह भी था जब महिलाओं को सुडौल दिखने और परफेक्ट बॉडी शेप पाने के लिए ‘कोर्सेट’ (Corset) जैसे कड़े और जानलेवा लिबास पहनने पड़ते थे। आज के दौर में जहां कंफर्ट ही सबसे बड़ा फैशन स्टेटमेंट है, वहीं पुराने समय की महिलाएं इस अंडरगारमेंट के कारण चैन की सांस लेने तक के लिए तरस जाती थीं। आइए जानते हैं कि कैसे समय के साथ महिलाओं की जरूरतों ने इस पुराने फैशन को पूरी तरह बदलकर रख दिया।

जब खूबसूरती के लिए सहना पड़ता था असहनीय दर्द

इतिहासकारों की मानें तो पुराने समय में महिलाओं की कमर को पतला और आकर्षक दिखाने के लिए कोर्सेट का इस्तेमाल अनिवार्य माना जाता था। ये कोर्सेट इतने ज्यादा टाइट होते थे कि इनसे शरीर की पसलियों पर दबाव पड़ता था, जिससे महिलाओं को सांस लेने में भारी तकलीफ होती थी। कई बार तो महिलाएं इसे पहनकर बेहोश तक हो जाती थीं। उस दौर में समाज की सोच ऐसी थी कि एक आदर्श महिला वही है जिसकी कमर बेहद पतली हो, और इसी दिखावे की होड़ में स्वास्थ्य को दांव पर लगा दिया जाता था।

जरूरतों के साथ बदली सोच और अंडरगारमेंट का डिजाइन

जैसे-जैसे समय बदला, महिलाओं की जीवनशैली में भी बड़े बदलाव आए। महिलाओं ने घर की चारदीवारी से निकलकर बाहर काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें ऐसे कपड़ों की जरूरत महसूस हुई जो उनके काम में बाधा न बनें। धीरे-धीरे समाज की सोच बदली और सुंदरता के पैमाने भी बदलने लगे। भारी-भरकम और टाइट कोर्सेट की जगह हल्के और हवादार फैब्रिक ने ले ली। अब प्राथमिकता ‘दिखावे’ से हटकर ‘कंफर्ट’ यानी आराम पर टिक गई, जिसके परिणाम स्वरूप अंडरगारमेंट्स के डिजाइन में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले।

आधुनिक दौर: कंफर्ट और कॉन्फिडेंस का मेल

आज के आधुनिक युग में अंडरगारमेंट केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास का हिस्सा बन गए हैं। अब बाजार में हर बॉडी टाइप के हिसाब से डिजाइन उपलब्ध हैं, जो शरीर को बिना कष्ट दिए सही सपोर्ट प्रदान करते हैं। अब महिलाएं अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार स्पोर्ट्स ब्रा, सीमलेस और शेपवियर चुनती हैं। कोर्सेट के उस ‘दम घोंटू’ दौर से बाहर निकलकर आज का फैशन बॉडी पॉजिटिविटी और आजादी की बात करता है, जहां हर महिला अपने प्राकृतिक शरीर को प्यार करना सीख रही है।

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