नई दिल्ली/मुंबई: मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण युद्ध और तनाव के बीच भारतीय रसोई के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी नाकेबंदी और खतरों को मात देते हुए भारत का विशाल एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सांवी’ (Green Sanvi) सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा है। 46,655 मीट्रिक टन रसोई गैस से लदा यह जहाज अब भारतीय तट की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे देश में गहराते गैस संकट पर लगाम लगने की उम्मीद है।
खतरनाक जलमार्ग से निकला ‘ग्रीन सांवी’, मुंबई में इस दिन देगा दस्तक
शिपिंग महानिदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘ग्रीन सांवी’ शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे चुनौतीपूर्ण उत्तरी हिस्से को पार करने के लिए तैयार था। शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 3 अप्रैल की आधी रात तक इस जहाज ने अपना सुरक्षित ट्रांजिट लगभग पूरा कर लिया है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह विशाल जहाज 6 अप्रैल तक मुंबई बंदरगाह पहुंच जाएगा। इसके आने से उन लाखों परिवारों को राहत मिलेगी जो पिछले कुछ समय से कुकिंग गैस की सप्लाई में देरी का सामना कर रहे हैं।
नौसेना की सुरक्षा में ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ भी कतार में
हालांकि कुछ जहाजों का निकलना राहत की बात है, लेकिन समुद्र में संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। भारतीय नौसेना के सूत्रों के मुताबिक, दो अन्य महत्वपूर्ण एलपीजी जहाज ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ अभी भी सुरक्षित गलियारे का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन जहाजों की निगरानी कर रहे हैं और निर्देश मिलते ही इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईंधन और कच्चे तेल वाले जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से निकाला जा रहा है।
शिप-टू-शिप ट्रांसफर से तेज हुई गैस की आपूर्ति
सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए युद्ध स्तर पर काम जारी है। ‘BW TYR’ नाम का एलपीजी टैंकर पहले ही मुंबई पहुंच चुका है। समय बचाने के लिए मुंबई आउटर पोर्ट लिमिट्स पर ‘शिप-टू-शिप’ (जहाज से जहाज) तकनीक के जरिए गैस उतारी जा रही है। वहीं, एक अन्य जहाज ‘BW ELM’ का रास्ता बदलकर उसे एन्नोर बंदरगाह भेज दिया गया है, जिसके 4 अप्रैल तक पहुंचने की संभावना है। इससे पहले ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ ने कांडला और मंगलौर में 92,000 टन गैस की सफल डिलीवरी की थी।
फारस की खाड़ी में अभी भी फंसे हैं 17 भारतीय जहाज
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में अब भी 17 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के हैं। खाड़ी क्षेत्र में इस वक्त कुल 20,500 भारतीय नाविक तैनात हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक 1,130 नाविकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत सरकार एक तरफ ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रही है, तो दूसरी तरफ नौसेना की ताकत के दम पर अपनी एनर्जी सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी है।
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