आमतौर पर ‘शनि की साढ़ेसाती’ का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर और अनहोनी की आशंका बैठ जाती है। हर कोई यही मान लेता है कि अब साढ़े सात साल सिर्फ परेशानियां, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव ही झेलना पड़ेगा। लेकिन क्या वाकई शनि देव हर व्यक्ति को सिर्फ कष्ट ही देते हैं? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार शनि की साढ़ेसाती जातक को फर्श से उठाकर सीधे अर्श पर बैठा देती है और उसे उम्मीद से कहीं ज्यादा मान-सम्मान और पैसा दिलाती है। आइए एक जातक की सच्ची कुंडली के उदाहरण और जाने-माने ज्योतिष एक्सपर्ट नरेंद्र उपाध्याय के नजरिए से समझते हैं कि साढ़ेसाती कब और कैसे चमत्कारिक लाभ देती है।
कुंभ राशि के कमल की कहानी: साढ़ेसाती में छू रहे हैं आसमान
कुंभ लग्न के जातक कमल की कुंडली इन दिनों सोशल मीडिया और ज्योतिष प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। कमल की राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है, जिसे लेकर वह शुरुआत में बेहद डरे हुए थे। लेकिन जब उनकी कुंडली का गहराई से विश्लेषण किया गया, तो परिणाम हैरान करने वाले थे।
दरअसल, कमल की कुंडली में इस समय लग्नेश शनि की साढ़ेसाती के साथ-साथ शुक्र की महादशा (जो 20 वर्षों के लिए होती है) और बुध की अंतर्दशा चल रही है। कुंडली में ग्रहों का यह प्लेसमेंट और कॉम्बिनेशन इतना गजब का है कि साढ़ेसाती के बावजूद कमल की किस्मत आसमान छू रही है। उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है, लव लाइफ बेहतरीन चल रही है और वह अपने करियर में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वर्तमान में उन पर शनि की उतरती साढ़ेसाती चल रही है, लेकिन शुभ दशाओं के कारण इसका नकारात्मक प्रभाव न के बराबर है।
सिर्फ साढ़ेसाती जिम्मेदार नहीं; जानिए क्या कहता है ज्योतिष विज्ञान
ज्योतिष एक्सपर्ट नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, लोगों में यह बहुत बड़ा भ्रम है कि साढ़ेसाती शुरू होते ही सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। असल में, शनि का गोचर (Transit) ही साढ़ेसाती का निर्माण करता है। जब भी किसी जातक का भविष्य देखा जाता है, तो गोचर को ध्यान में जरूर रखा जाता है, लेकिन यह मुख्य बात नहीं है।
विशेष नोट: किसी भी जातक के जीवन पर ग्रहों के गोचर या साढ़ेसाती का असर केवल 10 से 20 प्रतिशत ही होता है। बाकी का 80 से 90 प्रतिशत असर आपकी मूल ‘जन्म कुंडली’ में बैठे ग्रहों की स्थिति, आपकी वर्तमान महादशा, अंतर्दशा, आपके आसपास के परिवेश और आपके घर के वास्तु पर निर्भर करता है। इसलिए, यदि आपकी मुख्य दशाएं मजबूत हैं, तो साढ़ेसाती आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
क्या है अष्टकवर्ग (Ashtakvarga) का नियम? जिससे बदल जाता है परिणाम
जब सामान्य ज्योतिष में गोचर की गणना की जाती है, तो चंद्रमा की स्थिति के आधार पर सभी राशियों के लिए एक सामान्य फल आदेश जारी कर दिया जाता है। लेकिन सटीक फलादेश के लिए ‘अष्टकवर्ग का नियम’ सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
अष्टकवर्ग के नियम के तहत केवल चंद्रमा से ही नहीं, बल्कि ग्रह से ग्रह का गोचर देखा जाता है। उदाहरण के लिए, आपकी मूल जन्म कुंडली में शनि देव किस भाव या राशि में बैठे हैं और वर्तमान समय में आकाश में गोचर कर रहे शनि का उस मूल शनि से क्या संबंध बन रहा है, इसकी सूक्ष्म गणना की जाती है। इसके साथ ही लग्न भाव से भी गोचर को परखा जाता है। अष्टकवर्ग में यदि शनि को अच्छे अंक (बिंदु) प्राप्त हों, तो साढ़ेसाती के दौरान भी जातक राजा की तरह जीवन जीता है।
डरने की जरूरत नहीं, एक्सपर्ट से लें सलाह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साढ़ेसाती को लेकर बेवजह भयभीत होने की कतई आवश्यकता नहीं है। इतिहास गवाह है कि कई लोगों ने शनि की साढ़ेसाती के दौरान ही अपने जीवन की सबसे बड़ी सफलताएं हासिल की हैं और बहुत आगे बढ़े हैं। हां, यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मुख्य ग्रहों की दशा बेहद खराब चल रही हो और ऊपर से साढ़ेसाती भी आ जाए, तो वहां थोड़ा विचार करने और उपाय करने की जरूरत होती है। इसे केवल एक योग्य ज्योतिष एक्सपर्ट ही आपकी कुंडली देखकर सही-सही स्पष्ट कर सकता है। इसलिए साढ़ेसाती को एक सामान्य खगोलीय और ज्योतिषीय घटना की तरह ही लें, न कि किसी हौवे की तरह।
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