आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा तप और संयम का वरदान, इस ‘पावरफुल’ मंत्र के जाप से चमक उठेगी सोई हुई किस्मत…

नवरात्रि शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि अपने पूरे उफान पर है। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो आदि शक्ति मां दुर्गा के ‘मां ब्रह्मचारिणी’ स्वरूप को समर्पित है। देवी का यह स्वरूप अनंत फल देने वाला और तपस्या की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। सुबह से ही देश भर के शक्तिपीठों और मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन पूरी श्रद्धा के साथ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करते हैं, उनके जीवन में धैर्य, संयम और आत्मविश्वास की कभी कमी नहीं रहती।

मां ब्रह्मचारिणी: तपस्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी

शास्त्रों के अनुसार, ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली देवी। देवी के इस स्वरूप के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी, जिसके कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। आज के दिन पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण कर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि मां को ये रंग बेहद प्रिय हैं।

दुर्गा सप्तशती और चालीसा के साथ करें विशेष मंत्र का जाप

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा की शुरुआत कलश पूजन के साथ की जाती है। इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और मां दुर्गा की चालीसा का वाचन करना विशेष फलदायी होता है। लेकिन इस दिन की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक मां ब्रह्मचारिणी के सिद्ध मंत्र का जाप न किया जाए। ज्योतिषियों के अनुसार, आज के दिन ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’ या ‘दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥’ मंत्र का 108 बार जाप करने से व्यक्ति के भीतर एकाग्रता और मानसिक शक्ति का संचार होता है।

चीनी और पंचामृत का भोग लगाने से प्रसन्न होंगी मैया

मां ब्रह्मचारिणी को सादगी और तपस्या पसंद है, इसलिए उनके भोग में भी सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। आज के दिन मां को शक्कर (चीनी), सफेद मिठाई या मिश्री का भोग लगाना उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि चीनी का भोग लगाने से घर के सदस्यों की आयु लंबी होती है और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है। पूजा के अंत में मां की कपूर से आरती अवश्य करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। ऐसा करने से मां की असीम अनुकंपा आपके पूरे परिवार पर साल भर बनी रहती है।

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