
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय वार्षिक सत्र की शुरुआत होते ही महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक तकरार खुलकर सामने आ गई है। वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच पर होने वाली चर्चाओं से ठीक पहले अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे रूस आगबबूला हो गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मामलों के प्रभारी और रूस के उप-विदेश मंत्री अलेक्सांद्र अलिमोव (Alexander Alimov) को न्यूयॉर्क आने के लिए प्रवेश वीजा देने से कथित तौर पर इनकार कर दिया है। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के नेतृत्व में जाने वाले आधिकारिक रूसी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख चेहरे को इस तरह रोके जाने के बाद मॉस्को ने वाशिंगटन के खिलाफ कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराते हुए इस कदम को ‘शत्रुतापूर्ण’ (Unfriendly) करार दिया है।
यूएन हेडक्वार्टर्स एग्रीमेंट 1947 का खुला उल्लंघन: रूस का तीखा पलटवार
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस वीजा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और मित्रहीन आचरण का प्रमाण है। रूस ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को अमेरिकी प्रशासन के समक्ष उच्चतम स्तर पर उठाएगा।
रूस के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी किरिल लोग्विनोव और संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंजिया ने याद दिलाया कि अमेरिका केवल संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय का मेजबान (Host Country) देश है, न कि पूरी दुनिया का नियामक। वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक ‘यूएन हेडक्वार्टर्स एग्रीमेंट’ (UN Headquarters Agreement) के तहत अमेरिका कानूनी रूप से बाध्य है कि वह सदस्य देशों के सभी प्रतिनिधियों, राजनयिकों और अधिकारियों को बिना किसी भेदभाव, नि:शुल्क और तुरंत वीजा उपलब्ध कराए। चाहे उस देश के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध कितने भी खराब क्यों न हों, अमेरिका किसी विदेशी प्रतिनिधि को यूएन की बैठकों में शामिल होने से नहीं रोक सकता। रूस ने आरोप लगाया है कि वाशिंगटन अपनी मेजबानी की शक्तियों का दुरुपयोग कर अंतरराष्ट्रीय संधियों की धज्जियां उड़ा रहा है।
4 महीने में दूसरी बार अलिमोव का वीजा रोका, माजरा क्या है?
यह पहला मौका नहीं है जब रूसी राजनयिक अलेक्सांद्र अलिमोव को अमेरिकी वीजा के पेंच में फंसाया गया हो। इससे पहले मई में जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, तब भी अमेरिका ने अलिमोव को अंतिम समय तक वीजा जारी नहीं किया था, जिसके चलते वे उस बैठक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। अब सितंबर में जब यूएन का मुख्य वार्षिक सत्र शुरू हुआ है, तब एक बार फिर उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोक दिया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंधों और रणनीतिक तनाव के बीच अमेरिका जानबूझकर रूसी प्रतिनिधिमंडलों, अधिकारियों और उनके साथ आने वाले सरकारी पत्रकारों के वीजा में अड़ंगे डालकर राजनयिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का अक्सर यह बहाना रहता है कि मॉस्को में उनके दूतावास के कर्मचारियों की छंटनी के कारण वीजा प्रोसेसिंग में देरी होती है, लेकिन रूस इसे सुनियोजित कूटनीतिक चाल (Diplomatic Harassment) बता रहा है।
यूएन पर भी उठ रहे सवाल, हेडक्वार्टर शिफ्ट करने की उठी मांग
अमेरिका के इस रवैये के बाद संयुक्त राष्ट्र के सचिवालय और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। यूएन प्रवक्ता ने इस पर औपचारिक बयान देते हुए केवल इतना कहा कि मेजबान देश से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने दायित्वों का पालन करते हुए सभी प्रतिनिधियों को समय पर वीजा जारी करे।
दूसरी ओर, इस लगातार जारी विवाद ने रूस के उस पुराने रुख को फिर से हवा दे दी है, जिसमें वह संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय को न्यूयॉर्क से हटाकर जिनेवा, विएना या किसी निष्पक्ष देश में स्थानांतरित करने की मांग करता रहा है। रूस का कहना है कि जब कोई देश वैश्विक बैठकों में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों की आवाजाही को अपने राजनीतिक हितों का बंधक बना ले, तो ऐसे देश में यूएन का मुख्य कार्यालय सुरक्षित और निष्पक्ष नहीं रह सकता। आने वाले दिनों में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव द्वारा यूएन महासभा के मंच से इस मुद्दे पर अमेरिका को जोरदार तरीके से घेरे जाने के पूरे आसार हैं।
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