यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा: सॉल्वर गिरोहों की खैर नहीं, संपत्ति कुर्क होने के साथ मिलेगी उम्रकैद और एक करोड़ तक जुर्माना

उत्तर प्रदेश में आरक्षी नागरिक पुलिस के 32,679 पदों के लिए होने वाली बहुप्रतीक्षित लिखित परीक्षा के आयोजन को लेकर योगी सरकार ने सुरक्षा का अभूतपूर्व चक्रव्यूह तैयार कर लिया है। आगामी 8, 9 और 10 जून को प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयोजित होने वाली इस परीक्षा में 28 लाख से अधिक युवा अपनी किस्मत आजमाएंगे। सरकार ने नकल माफिया और सॉल्वर गैंग के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए सख्त चेतावनी जारी की है।

सॉल्वर गैंग के लिए सख्त प्रावधान

उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत अब परीक्षा में सॉल्वर बिठाना या खुद सॉल्वर बनना भारी पड़ सकता है। बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यदि कोई सॉल्वर पकड़ा जाता है, तो उसे पहली बार में अधिकतम सात साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना होगा। वहीं, यदि कोई आरोपी दोबारा इस कृत्य में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे उम्रकैद की सजा और 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, दोषी की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

परीक्षा की सुरक्षा और निगरानी का खाका

परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए मुख्य सचिव एसपी गोयल और डीजीपी राजीव कृष्णा ने सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • सीसीटीवी और लाइव मॉनिटरिंग: सभी स्ट्रांग रूम और परीक्षा कक्षों की सीसीटीवी कैमरों से लाइव फीड के जरिए भर्ती बोर्ड द्वारा सतत निगरानी की जाएगी।

  • सख्ती से जांच: परीक्षा परिसरों में मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, कैमरा या किसी भी प्रकार की अवांछित सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अधिकारियों के लिए भी मोबाइल ले जाना वर्जित होगा।

  • सैनिटाइजेशन: 6 जून से 10 जून तक केंद्रों का प्रतिदिन सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक तैयारी: हर स्तर पर सतर्कता

परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डबल लॉक, डबल गार्ड और निर्बाध विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, अभ्यर्थियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर पर्याप्त पुलिस एवं ट्रैफिक बल की तैनाती की जा रही है। डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी हर पाली में रेंडमाइजेशन (Randomization) के आधार पर लगाई जाए, ताकि किसी भी तरह की मिलीभगत की गुंजाइश न रहे।

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