
उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। राज्य की आधी आबादी यानी महिला वोट बैंक को अपने पाले में लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच होड़ मच गई है। हाल ही में मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हुई कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए एक बड़ी योजना ला सकती है, जिसके तहत चुनाव से पहले पहली किस्त के रूप में 20 हजार रुपये और कुल मिलाकर 50 हजार रुपये तक की मदद देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
जैसे ही इस योजना की सुगबुगाहट तेज हुई, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर पलटवार करने में जरा भी देर नहीं लगाई। लखनऊ में संवाददाताओं से बात करते हुए और सोशल मीडिया के जरिए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के इस संभावित कदम को ‘चुनावी जुमला’ और ‘पाप की कमाई’ करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा दांव खेलते हुए ऐलान किया कि यदि 2027 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो महिलाओं को सालाना 20 हजार नहीं बल्कि 40 हजार रुपये से आर्थिक सहायता देने की शुरुआत की जाएगी और हर साल इस राशि में बढ़ोतरी भी की जाएगी।
10 साल का हिसाब और गणित का गणितीय हमला: ‘4% देकर 96% डकार गई सरकार’
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा की इस प्रस्तावित योजना का बड़े ही अनोखे गणितीय अंदाज में विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार महिलाओं को हर साल 50 हजार रुपये देती, तो पिछले 10 वर्षों (केंद्र व राज्य सरकार के कार्यकाल) में यह रकम 5 लाख रुपये प्रति महिला हो जाती। लेकिन सरकार ने 10 साल तक महिलाओं को कुछ नहीं दिया और अब चुनाव नजदीक आते ही केवल 20 हजार रुपये देने की बात कह रही है।
अखिलेश यादव ने निशाना साधते हुए कहा, “20 हजार रुपये तो 5 लाख रुपये का महज 4 प्रतिशत हिस्सा होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि भाजपा सरकार महिलाओं के हक का 96 प्रतिशत हिस्सा डकार चुकी है। जो लोग 80 और 20 की राजनीति की बात करते थे, उन्होंने अब 96 और 4 का भ्रष्टाचार का सुपर रिकॉर्ड बना दिया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के हक-अधिकार के हजारों करोड़ रुपये सरकार ने अपने विज्ञापनों और प्रचार-प्रसार पर खर्च करके जनता को ठेंगा दिखा दिया है।
यूपी में चुनावी रेस: ’40 हजार से करेंगे शुरुआत, हर साल होगी बढ़ोतरी’
भाजपा की 20 हजार रुपये की योजना के जवाब में अखिलेश यादव ने राज्य की महिलाओं के लिए एक बड़ा सामाजिक सुरक्षा मॉडल पेश किया है। उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी की सरकार आते ही महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि 40 हजार रुपये केवल एक शुरुआत होगी और हर वित्तीय वर्ष के साथ इस योजना की राशि में इजाफा किया जाएगा ताकि महंगाई के दौर में महिलाओं को अपना घर और जीवन चलाने में कोई तंगी न हो। सपा प्रमुख के इस ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है, क्योंकि अब तक अन्य राज्यों में 1000 रुपये से लेकर 2100 रुपये महीना देने की योजनाएं चल रही थीं, लेकिन अखिलेश यादव ने सीधे 40 हजार रुपये सालाना का ऑफर देकर वादों की रेस को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
‘धर्मभीरू महिलाएं नहीं लेंगी पाप की कमाई’: भाजपा पर नैतिक प्रहार
अखिलेश यादव ने केवल आंकड़ों के जरिए ही नहीं, बल्कि नैतिक और धार्मिक आधार पर भी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं बेहद स्वाभिमानी और धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाली (धर्मभीरू) हैं। वे भाजपा की इस कथित ‘पाप की कमाई’ को कभी स्वीकार नहीं करेंगी।
सपा अध्यक्ष ने अन्य राज्यों में भाजपा द्वारा दी गई चुनावी गारंटियों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जिन राज्यों में महिलाओं को पैसे देने का वादा करके चुनाव जीता गया था, वहां अब सरकारें किस्तों के भुगतान में आनाकानी कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर तो महिलाओं से पहले दी गई रकम वापस मांगी जा रही है और न लौटा पाने पर पुलिस और अदालती कार्रवाई की निंदनीय धमकियां दी जा रही हैं। अखिलेश ने कहा कि उप्र की जागरूक महिलाएं यह सब देख रही हैं और वे भाजपा के इस छलावे में दोबारा नहीं आने वाली हैं।
2027 का रण: महिला वोट बैंक बना यूपी राजनीति का केंद्र बिंदु
हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश में ‘लाड़ली बहना योजना’, महाराष्ट्र में ‘लड़की बहिन योजना’ और दिल्ली में ‘महिला सम्मान योजना’ जैसे कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि सीधे बैंक खातों में कैश ट्रांसफर (DBT) करने वाली योजनाएं चुनावों के परिणाम बदलने में सक्षम होती हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में भी सभी राजनीतिक दल महिलाओं को केंद्र में रखकर अपनी रणनीतियां बना रहे हैं।
भाजपा जहां अपनी कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था के दम पर महिला मतदाताओं को साधे रखना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी ’40 हजार रुपये सालाना’ का बड़ा वादा करके इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। लखनऊ के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान भाजपा के संभावित दांव की हवा निकालने के लिए तैयार की गई एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया