US-ईरान जंग रुकवाने का पाकिस्तान ने लिया क्रेडिट: शहबाज शरीफ ने चीन और तुर्की को बताया ‘भाई’, शांति का श्रेय लेने की होड़

इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच महीने भर से ज्यादा समय तक चले भीषण संघर्ष पर आखिरकार दो हफ्तों के लिए ‘ब्रेक’ लग गया है। इस युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी पीठ थपथपाने में पीछे नहीं रहे। शरीफ ने इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय पाकिस्तान की मध्यस्थता को देते हुए चीन, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों को अपना ‘भाई’ बताया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

शहबाज शरीफ का ‘भाईचारा’ कार्ड: चीन और तुर्की की तारीफ

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि इस्लामाबाद वार्ता की ओर बढ़ते हुए वे अपने ‘भाई’ देशों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। शरीफ ने विशेष रूप से चीन, तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र (इजिप्ट) और कतर का नाम लिया।

उन्होंने कहा, “इन देशों ने कूटनीतिक प्रयासों को सफल बनाने और युद्धविराम तक पहुंचने में अमूल्य समर्थन दिया है। हमारे सभी भाई जैसे देशों और अमेरिका के नेतृत्व ने शांति को एक मौका देने के लिए असाधारण रणनीतिक समझ और धैर्य का परिचय दिया है।”

ईरानी राष्ट्रपति से हुई ‘सार्थक’ बातचीत

शहबाज शरीफ ने जानकारी दी कि उनकी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ बेहद सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान ने पाकिस्तान के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसमें इस्लामाबाद में शांति वार्ता की मेजबानी करने की बात कही गई थी। शरीफ ने इसे ईरानी नेतृत्व की ‘बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता’ करार दिया। ईरान ने भी आगामी वार्ताओं में शामिल होने की पुष्टि की है और पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की है।

दुनिया भर के दोस्तों को कहा शुक्रिया

पाकिस्तानी पीएम ने केवल पड़ोसी और मुस्लिम देशों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि वैश्विक शांति के लिए पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करने वाले सभी भागीदारों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि एक तरफ अमेरिका इस सीजफायर को ईरान की ‘विनाशकारी सैन्य हार’ बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान इसे अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर भुनाने की कोशिश में जुटा है ताकि वैश्विक मंच पर अपनी खोई हुई साख वापस पा सके।

इस्लामाबाद बनेगी शांति वार्ता का केंद्र?

इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। पाकिस्तान का दावा है कि वह इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए एक पुल का काम कर रहा है। लेकिन सीजफायर के चंद घंटों बाद ही ईरान पर हुए ताजा हमलों ने इस ‘नाजुक’ शांति समझौते और पाकिस्तान के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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