वैशाख अमावस्या 2026: सूर्य-चंद्र की युति में दान का महाफल, जानें खुशहाली के लिए किन वस्तुओं का करें दान

नई दिल्ली: वैशाख मास की अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी गई है। इस वर्ष 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाने वाली वैशाख अमावस्या कई मायनों में खास है। शास्त्रों के अनुसार, वैशाख मास के समान कोई मास नहीं है और इसमें देवता स्वयं जल में निवास करते हैं। इस दिन सूर्य और चंद्रमा की युति मेष राशि में होने जा रही है, जो दान-पुण्य के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।


सूर्य-चंद्र युति और ग्रहों का संयोग

इस अमावस्या पर मेष राशि में सूर्य और चंद्रमा एक साथ विराजमान रहेंगे। इसके अलावा अन्य ग्रहों की स्थिति इस प्रकार होगी:

  • मीन राशि: शनि, मंगल और बुध का गोचर।

  • कुंभ राशि: राहु।

  • सिंह राशि: केतु।

    यह ग्रह स्थिति पितृ दोष निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी है।


खुशहाली के लिए क्या करें दान?

वैशाख मास में गर्मी अपने चरम पर होती है, इसलिए इस समय ‘परोपकार’ और ‘शीतलता’ प्रदान करने वाली वस्तुओं के दान का विधान है।

1. विश्राम और निद्रा से जुड़ी वस्तुएं

  • चटाई और बिछावन: जो व्यक्ति खजूर या तिनके की चटाई दान करता है, उस पर साक्षात् भगवान विष्णु की कृपा होती है। चटाई और कंबल देने वाला व्यक्ति जीवन के सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

  • पलंग और बिस्तर: धूप से थके हुए व्यक्ति को सुखद पलंग दान करने वाले को जन्म-मृत्यु के क्लेशों से मुक्ति मिलती है।

2. गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं

  • पंखा और छाता: ताड़ का पंखा दान करने वाले के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह श्रीहरि के धाम को प्राप्त होता है। छाया चाहने वाले को छाता देना भी अत्यंत पुण्यकारी है।

  • पादुका (चप्पल/जूते): मार्ग में चलने वाले निर्धन व्यक्ति को पादुका दान करने वाला विष्णुलोक में स्थान पाता है।

3. अन्न और जल दान (महादान)

  • शीतल जल: प्यासे व्यक्ति को शीतल जल पिलाने का फल 10 हजार यज्ञों के समान माना गया है। संभव हो तो मार्ग में प्याऊ की व्यवस्था करें।

  • भोजन: दोपहर के समय किसी भूखे या अनाथ को भोजन कराने के पुण्य का कोई अंत नहीं है।

4. वस्त्र दान

  • अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त नए वस्त्रों का दान करने से पितृ तृप्त होते हैं और कुल को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।


तिथि और मुहूर्त (17 अप्रैल 2026)

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल, रात्रि 08:11 बजे से।

  • अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल, शाम 05:21 बजे तक।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:25 बजे से 05:09 बजे तक (स्नान के लिए सर्वोत्तम समय)।

विशेष टिप: वैशाख अमावस्या पर पितृ तर्पण और दीपदान करना न भूलें। शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम का दीपक जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और खुशहाली आती है।

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