Vastu Tips for Mandir: घर के मंदिर में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकती हैं लक्ष्मी; जानें पूजा के सही वास्तु नियम

नई दिल्ली | सनातन धर्म में घर का मंदिर सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यह वह केंद्र है जहां से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर मंदिर की दिशा या वहां रखी वस्तुएं वास्तु के अनुसार न हों, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है? वास्तु शास्त्री कौशिक शर्मा ने बताया है कि मंदिर सजाते समय किन छोटी-छोटी गलतियों से बचना चाहिए और किन नियमों का पालन करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


1. मंदिर के लिए सबसे शुभ दिशा: ‘ईशान कोण’

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा (North-East) जिसे ‘ईशान कोण’ कहा जाता है, सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।

  • क्यों: इस दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और पूजा सफल होती है।

  • कहां न बनाएं: भूलकर भी मंदिर को दक्षिण दिशा, बेडरूम या सीढ़ियों के नीचे न रखें। शौचालय के पास या उसके ऊपर-नीचे भी मंदिर होना अशुभ माना जाता है।

2. पूजा करते समय मुख की दिशा

पूजा का पूरा लाभ तभी मिलता है जब आपका मुख सही दिशा में हो। वास्तु के अनुसार, पूजा करते समय जातक का मुख हमेशा पूर्व दिशा (East) की ओर होना चाहिए। यदि यह संभव न हो तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके भी पूजा की जा सकती है।

3. मंदिर में न रखें पितरों की तस्वीरें

अक्सर लोग श्रद्धावश अपने पूर्वजों या पितरों की फोटो मंदिर में देवी-देवताओं के साथ रख देते हैं। वास्तु के अनुसार यह एक बड़ी गलती है।

  • नियम: पितरों का स्थान और देवताओं का स्थान अलग-अलग होता है। पितरों की तस्वीर हमेशा घर की दक्षिण दिशा (South) की दीवार पर लगानी चाहिए। मंदिर में रखने से मानसिक अशांति और कार्य में बाधा आ सकती है।

4. उग्र मूर्तियों और तस्वीरों से बचें

घर के मंदिर में हमेशा शांत और आशीर्वाद देते हुए देवी-देवताओं की प्रतिमा रखनी चाहिए।

  • वर्जित: भगवान शिव का तांडव करते हुए स्वरूप, कालभैरव, या हनुमान जी के युद्ध करते हुए उग्र स्वरूप की तस्वीरें घर के भीतर नहीं रखनी चाहिए। इससे घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ सकता है।

5. दीपक और कलश का सही स्थान

  • दीपक: आरती या पूजा का दीपक हमेशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा में रखना शुभ होता है। दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, उसके नीचे चावल या फूल जरूर रखें।

  • कलश: मंगल कलश को हमेशा भगवान के दाहिने हाथ (Right Side) की ओर स्थापित करना चाहिए।

6. साफ-सफाई और बासी फूल

देवी लक्ष्मी वहीं वास करती हैं जहां स्वच्छता होती है। मंदिर में कभी भी सूखे हुए फूल, फटी हुई धार्मिक पुस्तकें या टूटी हुई मूर्तियां (खंडित मूर्तियां) न रखें। बासी फूलों को तुरंत हटाकर किसी पवित्र नदी या गमले की मिट्टी में डाल देना चाहिए।

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