‘हम CM के काम तय नहीं कर सकते’, विजय को मुआवजा बांटने से रोकने वाली DMK की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

तमिलनाडु की राजनीति और न्यायिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय (CM Vijay) को करूर हादसे के पीड़ितों से मिलकर मुआवजा और सरकारी नौकरी का पत्र सौंपने से रोकने वाली द्रमुक (DMK) की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका किसी राज्य के मुख्यमंत्री के प्रशासनिक कार्यों और गतिविधियों में दखल नहीं देगी।

कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच न बनाएं: सुप्रीम कोर्ट की DMK को नसीहत

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने तब पहुंचा जब विपक्षी दल DMK ने मौजूदा टीवीके (तमिलगा वेत्री कड़गम) सरकार के खिलाफ एक विशेष याचिका दाखिल की थी। DMK का तर्क था कि मुख्यमंत्री विजय को पीड़ितों से मिलने और मुआवजा बांटने से रोका जाना चाहिए।

इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने DMK के वकील को कड़ी फटकार लगाई और कहा:

  • कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच बिल्कुल न बनाया जाए।

  • हम देश के किसी भी मुख्यमंत्री की गतिविधियों या उनके दैनिक कार्यों को तय नहीं करेंगे।

  • अगर सत्ताधारी टीवीके के नेता हादसे को लेकर किसी तरह के बयान दे रहे हैं, तो DMK भी उसके जवाब में अपने राजनीतिक बयान दे सकती है। यह लड़ाई अदालत के बाहर लड़ी जानी चाहिए।

पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये और सरकारी नौकरी देंगे सीएम विजय

DMK ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि पिछले साल टीवीके की रैली के दौरान हुए हादसे की चल रही जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री विजय इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले 41 लोगों के पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और साथ ही सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र देने के लिए खुद करूर जाने वाले हैं। DMK ने इसी जन-कल्याणकारी कदम का विरोध करते हुए इसे रोकने की मांग की थी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया।

क्या है पूरा करूर भगदड़ मामला?

इस पूरे विवाद की शुरुआत पिछले साल सितंबर में हुई थी, जब करूर में टीवीके (TVK) की एक विशाल राजनीतिक रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली के दौरान अचानक भारी भगदड़ मच गई थी, जिसमें दुखद रूप से 41 लोगों की जान चली गई थी।

शुरुआत में इस संवेदनशील घटना की जांच मद्रास हाई कोर्ट ने एक विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का जिम्मा राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई (CBI) के हाथों में सौंप दिया था। वर्तमान में इस पूरी जांच की निगरानी कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष कमेटी कर रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री विजय का पीड़ित परिवारों से मिलने का कार्यक्रम तय हुआ है, जिसे अब कानूनी हरी झंडी मिल गई है।

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