नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष और उसके वैश्विक आर्थिक प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बुधवार शाम को होने वाली इस बैठक में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों का समूह शामिल होगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री असम दौरे से लौटने के तुरंत बाद इस आपातकालीन स्थिति का जायजा लेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा युद्ध के कारण भारत की खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा (Energy & Fuel Security) पर पड़ रहे असर का आकलन करना और नागरिकों को राहत देने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है।
सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के दिग्गज होंगे शामिल
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की कमान संभालने वाले दिग्गज हिस्सा लेंगे। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी और अश्विनी वैष्णव जैसे प्रमुख मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास भी मौजूद रहेंगे, जो युद्ध के आर्थिक और सामरिक पहलुओं पर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ऊर्जा संकट पर नजर
28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद शुरू हुए इस संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति होती है, वहां ईरान के कड़े नियंत्रण और जहाजों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं। प्रधानमंत्री इस बात की समीक्षा करेंगे कि भारत के तेल भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग कितने सुरक्षित हैं। इससे पहले 22 मार्च को हुई बैठक में भी पीएम ने स्पष्ट किया था कि बदलती परिस्थितियों में नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए।
‘मन की बात’ में दी थी चेतावनी, अफवाहों से बचने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस संकट को ‘राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा’ बताया था। उन्होंने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए उन लोगों को कड़ी चेतावनी दी थी जो इस अंतरराष्ट्रीय संकट का राजनीतिकरण कर रहे हैं। पीएम ने स्पष्ट किया कि युद्ध के कारण पैदा हुई चुनौतियों का सामना धैर्य और जागरूकता से करना होगा। उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं को दूर करने के लिए वैश्विक नेताओं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी देशों के सुल्तान शामिल हैं, से लगातार संवाद बनाए रखा है।
100 डॉलर के पार क्रूड, भारत के पास क्या है प्लान?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। आज की बैठक में वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय यह सुनिश्चित करेंगे कि घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर बनी रहें। सरकार पहले ही पर्याप्त आपूर्ति का भरोसा दिला चुकी है, लेकिन युद्ध के लंबा खिंचने की सूरत में ‘प्लान-बी’ पर भी मंथन किया जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी समन्वय बिठाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमाखोरी और महंगाई पर लगाम कसी जा सके।
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