
नई दिल्ली। संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक दिलचस्प और कड़ा रुख देखने को मिला। सदन की कार्यवाही के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक केंद्रीय मंत्री को उनके लंबे-चौड़े जवाब पर टोक दिया। स्पीकर ने सख्त लहजे में हिदायत देते हुए कहा कि सदन में सवालों के जवाब संक्षिप्त और सटीक होने चाहिए, न कि लंबे भाषणों की तरह।
‘भाषण क्यों दे रहे हैं आप?’ स्पीकर के कड़े तेवर
मामला उस समय शुरू हुआ जब सदन में एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर चर्चा हो रही थी। जब संबंधित मंत्री सदन के पटल पर अपनी बात रख रहे थे, तब स्पीकर ओम बिरला को उनके जवाब देने का तरीका रास नहीं आया। मंत्री के विस्तार में जा रहे उत्तर पर हस्तक्षेप करते हुए बिरला ने उन्हें बीच में ही टोका और कहा, “आप भाषण क्यों दे रहे हैं? आप तो सिर्फ जवाब दीजिए।” अध्यक्ष की इस सीधी टिप्पणी के बाद सदन में कुछ पल के लिए सन्नाटा पसर गया।
पूरक प्रश्नों पर भी दिखी नाराजगी
नाराजगी का सिलसिला यहीं नहीं थमा। जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न (Supplementary Question) का उत्तर देने के लिए खड़े हुए और अपनी बात को विस्तार देने लगे, तो अध्यक्ष ने दोबारा हस्तक्षेप किया। ओम बिरला ने मंत्रियों और सदस्यों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कहा, “क्या आप लोग संक्षिप्त और सटीक जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते?” उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल का समय सीमित होता है और इसमें मुद्दे पर केंद्रित रहना अनिवार्य है।
संसदीय अनुशासन और समय की अहमियत
लोकसभा अध्यक्ष लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सदन की गरिमा और समय की बचत के लिए सदस्यों को लंबी भूमिका बांधने के बजाय सीधे मुद्दे पर बात करनी चाहिए। आज की इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि स्पीकर सदन के भीतर समय प्रबंधन और संसदीय नियमों के पालन को लेकर कितने गंभीर हैं। मंत्रियों को दी गई इस नसीहत के बाद सदन की कार्यवाही को अधिक सुचारू और प्रभावी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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