निर्जला एकादशी पर तुलसी के पास दीया जलाते समय डाल दें यह एक गुप्त चीज, खिंचा चला आएगा पैसा, दूर होगी कंगाली!

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सभी एकादशी व्रतों में ‘निर्जला एकादशी’ को सबसे कठिन और सर्वोच्च स्थान दिया गया है। साल 2026 में यह बेहद पवित्र व्रत 25 जून को रखा जा रहा है। यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आप इस दिन व्रत नहीं भी रख पा रहे हैं, तो भी शाम के समय तुलसी जी के पास एक छोटा सा अचूक उपाय करके अपनी बंद किस्मत के ताले खोल सकते हैं। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की शाम को किए जाने वाले तुलसी के इस चमत्कारी उपाय के बारे में।

दीए में डालें ‘एक चुटकी हल्दी’ और देखें चमत्कार

सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना गया है और भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। निर्जला एकादशी की शाम को आपको तुलसी के पास एक विशेष दीया जलाना है:

  • विधि: शाम के समय तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं।

  • गुप्त उपाय: दीया जलाने के बाद उसमें एक चुटकी हल्दी डाल दें।

  • महत्व: ज्योतिष शास्त्र में हल्दी का संबंध देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु से माना गया है। घी के दीए में हल्दी डालने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे पैसों से जुड़ी सारी दिक्कतें खत्म होने लगती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

परिक्रमा के साथ करें इस महामंत्र का 108 बार जाप

तुलसी के पास हल्दी वाला दीया जलाने के बाद वहीं खड़े होकर माता तुलसी और भगवान विष्णु से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति की प्रार्थना करें। इसके बाद तुलसी के पौधे की 11 या 21 बार परिक्रमा करें।

परिक्रमा करते समय भगवान विष्णु के इस परम कल्याणकारी महामंत्र का जाप करते रहें। यदि संभव हो तो परिक्रमा के बाद इस मंत्र की एक माला (108 बार) का जाप जरूर करें:

मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

धार्मिक मान्यता है कि एकादशी की रात इस उपाय को करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा (नेगेटिव एनर्जी) पूरी तरह नष्ट हो जाती है और तरक्की के बंद रास्ते खुल जाते हैं।

भूलकर भी न करें ये गलती: एकादशी पर वर्जित है यह काम

निर्जला एकादशी के दिन एक बात का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही उनके पत्ते तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से व्रत खंडित माना जाता है और दोष लगता है। इस दिन जल चढ़ाने की बजाय केवल संध्याकाल में दीपक जलाना, परिक्रमा करना और मंत्र जाप करना ही सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है।

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