हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी और दोहरी जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को हाशिए पर धकेल देती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि 25 से 45 वर्ष की उम्र महिलाओं के शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है? इसी उम्र में हार्मोनल बदलाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का जोखिम सबसे अधिक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बीमार होने पर डॉक्टर के पास जाना समझदारी नहीं है, बल्कि समय पर कराए गए प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप ही आपको भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। आइए जानते हैं वे 5 टेस्ट जो हर महिला के लिए जरूरी हैं।
हड्डियों की मजबूती के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट
उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में कैल्शियम की कमी और हड्डियां खोखली होने की समस्या आम हो जाती है। बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) यह बताता है कि आपकी हड्डियों में कैल्शियम का स्तर क्या है। इस टेस्ट के जरिए ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ जैसे खामोश रोगों का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सकता है। अगर टेस्ट में कमी आती है, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स और सही डाइट लेकर आप भविष्य में होने वाले फ्रैक्चर के खतरे को टाल सकती हैं।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए पैप स्मीयर टेस्ट
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर एक गंभीर समस्या है, लेकिन राहत की बात यह है कि इसे शुरुआती दौर में पकड़ा जा सकता है। पैप टेस्ट के जरिए गर्भाशय की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों की पहचान होती है। 21 वर्ष की आयु के बाद या यौन सक्रिय होने पर हर महिला को नियमित अंतराल पर यह जांच जरूर करानी चाहिए। यह साधारण सा टेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को रोकने में सबसे प्रभावी हथियार है।
दिल की सेहत और कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच
गलत खान-पान और स्ट्रेस की वजह से अब कम उम्र में ही महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। कोलेस्ट्रॉल लेवल टेस्ट से यह पता चलता है कि आपकी धमनियों में प्लाक (गंदगी) तो नहीं जम रही है। हाई कोलेस्ट्रॉल का समय पर पता चलने से आप केवल जीवनशैली और व्यायाम के जरिए भी अपने दिल को सुरक्षित रख सकती हैं और गंभीर कार्डियक अरेस्ट से बच सकती हैं।
हार्मोनल बैलेंस और थायराइड फंक्शन टेस्ट
अचानक वजन बढ़ना, थकान, बालों का झड़ना या चिड़चिड़ापन—ये सभी थायराइड असंतुलन के लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में थायराइड की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है। थायराइड फंक्शन टेस्ट (TFT) के जरिए हार्मोन के स्तर की सटीक जानकारी मिलती है। समय रहते उपचार मिलने से न केवल आपका मेटाबॉलिज्म सही रहता है, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी दुरुस्त रखता है।
किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट है अनिवार्य
लिवर और किडनी शरीर के ‘फिल्टर’ हैं जो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं। आजकल की गतिहीन जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड के कारण ‘फैटी लिवर’ की समस्या आम हो गई है। किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट के माध्यम से इन अंगों की कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है। यदि किडनी सही से यूरिया या क्रिएटिनिन को फिल्टर नहीं कर रही है, तो समय पर जांच ही आपको ऑर्गन फेलियर जैसी स्थिति से बचा सकती है।
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