अजा एकादशी: शाम ढलने से पहले कर लें ये 8 चमत्कारी उपाय, धन-धान्य से भर जाएगी तिजोरी

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को शास्त्रों में अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि यह समस्त पापों का नाश करके जीवन में अटके हुए धन और ऐश्वर्य के द्वार खोलती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज-पाट, परिवार और मान-सम्मान को पुनः प्राप्त करने के लिए महर्षि गौतम के निर्देश पर अजा एकादशी का ही व्रत रखा था। एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और माता महालक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है। एकादशी की शाम को ‘अमृत वेला’ और ‘गोधूलि काल’ के रूप में देखा जाता है, जब ग्रहों की स्थिति और आध्यात्मिक तरंगे चरम पर होती हैं। यदि किसी व्यक्ति के घर में बरकत नहीं हो रही है, धन संचय में बाधाएं आ रही हैं या लगातार आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है, तो अजा एकादशी के दिन शाम ढलने से पूर्व किए गए ये 8 शास्त्रसम्मत उपाय जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

1. तुलसी के सम्मुख नौ मुखी घी का दीपक और परिक्रमा

तुलसी को साक्षात वृंदा और श्रीहरि विष्णु की परम प्रिया माना गया है। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल अर्पित करना शास्त्रों में वर्जित माना गया है क्योंकि देवी तुलसी इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं, परंतु शाम के समय तुलसी पूजन अत्यंत फलदायी होता है। शाम ढलते ही तुलसी के पौधे के समीप गाय के शुद्ध घी का नौ मुखी या चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें। दीपक में थोड़ी सी हल्दी और कलावे की बाती का प्रयोग करें। इसके उपरांत तुलसी माता की 11 बार परिक्रमा करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जप करें। यह उपाय घर से वास्तु दोषों को मिटाता है और धन आगमन के नए मार्ग प्रशस्त करता है।

2. पीपल वृक्ष की जड़ में चौमुखी दीपक और मीठा जल

पीपल के वृक्ष में तीनों लोकों के देवताओं का वास होता है और गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं को वृक्षों में ‘अश्वत्थ’ यानी पीपल कहा है। अजा एकादशी की शाम को सूर्यास्त से ठीक पहले पीपल के पेड़ की जड़ में थोड़ा सा कच्चा दूध, मिश्री और गंगाजल मिश्रित जल अर्पित करें। इसके तुरंत बाद पेड़ के नीचे सरसों के तेल या तिल के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक प्रज्वलित करने के बाद अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार और कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें। ध्यान रखें कि सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ का स्पर्श वर्जित माना गया है, इसलिए जल अर्पित करने का कार्य शाम होने से पहले ही पूर्ण कर लें और केवल दीपदान गोधूलि काल में करें।

3. दक्षिणावर्ती शंख से श्रीहरि का अभिषेक और कनकधारा स्तोत्र

अजा एकादशी की शाम को घर के पूजा मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या लड्डू गोपाल का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख से करना बेहद चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। दक्षिणावर्ती शंख को मां लक्ष्मी का सहोदर भ्राता माना गया है क्योंकि दोनों की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शंख में थोड़ा कच्चा गाय का दूध और केसर घोल लें। इस मिश्रण से श्रीहरि का अभिषेक करें और इसके साथ ही कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इस उपाय से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है और अचानक आने वाले आर्थिक संकट हमेशा के लिए टल जाते हैं।

4. तिजोरी में रखें पीली कौड़ियां और हल्दी की 5 गांठें

धन वृद्धि के लिए एकादशी की शाम को मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का विशेष अनुष्ठान करें। एक पीले या लाल रेशमी कपड़े पर 5 पीली कौड़ियां, 5 गोमती चक्र और हल्दी की 5 साबुत गांठें रखें। इन सभी वस्तुओं पर गंगाजल छिड़कें और अष्टगंध या कुमकुम से तिलक करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर माता लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः” मंत्र की एक माला जपें। पूजा संपन्न होने के बाद इस कपड़े की पोटली बनाकर अपनी तिजोरी, गल्ले या धन रखने के स्थान पर रख दें। यह पोटली नकारात्मक ऊर्जा को रोकती है और तिजोरी में धन का ठहराव सुनिश्चित करती है।

5. मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक और घी का दीपदान

घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से सकारात्मक ऊर्जा और देवी लक्ष्मी का आगमन होता है। अजा एकादशी के दिन शाम को घर के मुख्य दरवाजे की अच्छे से सफाई करें। प्रवेश द्वार के दोनों तरफ सिंदूर और गाय के घी के मिश्रण से या कुमकुम से शुभ स्वास्तिक चिन्ह बनाएं। स्वास्तिक के मध्य में अक्षत लगाएं। इसके बाद द्वार के दोनों कोनों पर गाय के शुद्ध घी का एक-एक दीपक रखें। दीपक का मुख बाहर की ओर होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी की शाम को इस प्रकार का दीपदान करने से दरिद्रता घर की चौखट लांघने का साहस नहीं कर पाती और सुख-समृद्धि का वास होता है।

6. भगवान विष्णु को पीले फल, खीर और तुलसी दल का भोग

भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें पीतांबरधारी भी कहा जाता है। अजा एकादशी की शाम की आरती के समय श्रीहरि को केसर युक्त चावल की खीर, पीले केले या पपीते का भोग अवश्य लगाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य शामिल होना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी दल के बिना भगवान नारायण किसी भी भोग को स्वीकार नहीं करते हैं। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना महापाप माना गया है, इसलिए पूजन के लिए तुलसी दल एक दिन पहले (दशमी तिथि) ही तोड़कर रख लें या पौधे से स्वतः गिरे हुए पत्तों का ही उपयोग करें। भोग लगाने के बाद इस प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करें।

7. अजा एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा का श्रवण और आरती

अजा एकादशी के व्रत का पूर्ण पुण्य तभी प्राप्त होता है जब शाम की पूजा के दौरान इस दिन की पावन व्रत कथा का श्रवण या वाचन किया जाए। शाम को पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाकर बैठें और राजा हरिश्चंद्र के उद्धार की कथा को श्रद्धापूर्वक पढ़ें या सुनें। कथा समाप्ति के बाद भगवान विष्णु की कपूर से आरती करें। कपूर की सुगंध वातावरण से समस्त नकारात्मक जीवाणुओं और अशुभ स्पंदनों को समाप्त करती है। आरती के बाद पूरे घर में शंखनाद करें और घंटी बजाएं, जिससे घर के हर कोने में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

8. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और पीले अनाज का गुप्त दान

शास्त्रों में एकादशी के दिन किए गए दान को महादान माना गया है। अजा एकादशी की शाम को किसी योग्य ब्राह्मण, साधु या गरीब जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की खाद्य सामग्री जैसे चने की दाल, बेसन, हल्दी, पीले वस्त्र या ऋतु फल का दान करें। यदि संभव हो तो किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराएं या गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाएं। सनातन धर्म में गौ माता के भीतर तैंतीस कोटि देवताओं का वास माना गया है, अतः एकादशी की शाम को गाय की सेवा करने से कुंडली के समस्त अशुभ ग्रह शांत होते हैं और जातक के घर-आंगन में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं रहती।

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