अब नक्शा पास होने पर ही मिलेगा होम लोन: विकास प्राधिकरण का बैंकों को सख्त आदेश

शहरी क्षेत्रों में बेतरतीब और अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। विकास प्राधिकरण ने सभी वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी भवन निर्माण के लिए गृह ऋण (Home Loan) केवल तभी स्वीकृत किया जाएगा, जब संबंधित भूखंड या भवन का मानचित्र (नक्शा) विकास प्राधिकरण से विधिवत पास हो चुका हो या उसके लिए औपचारिक आवेदन किया गया हो।

अब तक केवल जमीन का भू-उपयोग (Land Use) सही होने और सामान्य राजस्व दस्तावेजों के आधार पर बैंक लाखों रुपये का कंस्ट्रक्शन लोन पास कर दिया करते थे। इस ढिलाई का फायदा उठाकर बिल्डर और व्यक्तिगत निर्माणकर्ता बिना लेआउट और मानक पास कराए बहुमंजिला अवैध इमारतें खड़ी कर लेते थे। प्राधिकरण के इस नए और सख्त आदेश के बाद अब बिना अधिकृत नक्शे के बैंकों से एक भी रुपया जारी नहीं हो सकेगा। इससे न केवल अनियोजित कॉलोनियों के विकास पर रोक लगेगी, बल्कि घर खरीदने वाले आम नागरिकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।

एनेक्सी भवन में बैंकों संग अहम बैठक: सिर्फ लैंड-यूज देखकर लोन बांटने पर लगी रोक

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) के एनेक्सी भवन में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों के वरिष्ठ शाखा प्रबंधकों और प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में यह बात खुलकर सामने आई कि अधिकांश वित्तीय संस्थान लोन बांटने की जल्दबाजी में केवल इस बात की जांच करते हैं कि जमीन आवासीय श्रेणी की है या नहीं। इसके बाद आर्किटेक्ट द्वारा बनाए गए कच्चे नक्शे पर मुहर लगाकर लोन मंजूर कर दिया जाता था।

प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने इस कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सभी बैंकों को निर्देश दिया कि होम लोन की फाइलों को आगे बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण का अधिकृत नक्शा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित है। यदि कोई आवेदक नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन कर चुका है, तो उस पावती (Acknowledgment Slip) के सत्यापन के बाद ही लोन की सैद्धांतिक मंजूरी दी जाए। बिना विकास प्राधिकरण की एनओसी या स्वीकृत मानचित्र के लोन की अंतिम किस्त का भुगतान किसी भी सूरत में नहीं किया जाएगा।

बैंकों और प्राधिकरण के बीच साझा होगा डेटा: NBFCs और लीड बैंक मैनेजर भी दायरे में

अवैध निर्माणों को पूरी तरह ट्रैक करने के लिए प्राधिकरण और बैंकों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग का एक नया तंत्र विकसित किया जा रहा है। बैठक में तय किए गए प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • आवेदनों का नियमित डेटा ट्रांसफर: बैंक अब गृह ऋण के लिए प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों का ब्यौरा नियमित रूप से प्राधिकरण को सौंपेंगे। इससे प्राधिकरण को यह अग्रिम जानकारी मिल सकेगी कि शहर के किन क्षेत्रों और किन खसरा नंबरों पर निर्माण के लिए लोन मांगा जा रहा है।

  • एलटीपी (टाउन प्लानर) का ब्यौरा: आम जनता की सुविधा के लिए विकास प्राधिकरण अपने पंजीकृत लाइसेंस्ड टाउन प्लानर्स (LTP) की सूची और उनके मोबाइल नंबर सभी बैंक शाखाओं में चस्पा कराएगा, ताकि लोग आसानी से वैध नक्शा बनवा सकें।

  • एनबीएफसी पर भी सख्ती: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के अधिकारियों के सुझाव पर केवल पारंपरिक बैंकों ही नहीं, बल्कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को भी इस नियम के तहत लाया जा रहा है। इसके लिए जल्द ही लीड बैंक मैनेजर (LDM) के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी नागरिक सेवाएं: लागू होगा इंटीग्रेटेड ईआरपी

प्राधिकरण अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को बिचौलियों और दलालों से मुक्त कर पारदर्शी बनाने के लिए ‘इंटीग्रेटेड ईआरपी’ (Enterprise Resource Planning) और सिटीजन सर्विसेज प्लेटफॉर्म लागू करने जा रहा है। इस आधुनिक व्यवस्था के तहत नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस और समयबद्ध कर दिया जाएगा।

इस डिजिटल व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं:

  • फास्टपास और ओबीपीएएस: ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (OBPAS-FastPass) के जरिए निर्धारित मानकों वाले भूखंडों के नक्शे कुछ ही दिनों में ऑनलाइन स्वीकृत किए जा सकेंगे।

  • वर्कफ्लो ऑटोमेशन और फाइल ट्रैकिंग: ई-ऑफिस प्रणाली के जरिए प्रत्येक फाइल का डिजिटल ऑडिट ट्रेल तैयार होगा। इससे यह तत्काल पता चल सकेगा कि कोई नक्शा किस अधिकारी या कर्मचारी की टेबल पर कितने दिनों से लंबित है।

  • सिंगल विंडो नागरिक पोर्टल: नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन आवेदन, विकास शुल्क का भुगतान, नामांतरण, शिकायत निवारण और नीलामी की लाइव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

आम जनता को क्या होगा बड़ा फायदा और कैसे बचें नुकसान से?

प्राधिकरण के इस सख्त कदम से शुरुआती दौर में कुछ लोगों को कागजी औपचारिकताओं में अतिरिक्त समय जरूर लग सकता है, लेकिन दीर्घकालिक तौर पर यह व्यवस्था मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित होगी।

  • सीलिंग और ध्वस्तीकरण का खतरा खत्म: लोग जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर मकान बनाते हैं और बाद में प्राधिकरण द्वारा उसे अवैध घोषित कर सील या बुलडोजर चला दिया जाता है। नक्शा पहले से स्वीकृत होने पर घर पर किसी कानूनी कार्रवाई का डर नहीं रहेगा।

  • अवैध कॉलोनाइजरों के जाल से मुक्ति: बिना लेआउट पास कराए कृषि भूमि पर प्लॉट काटकर बेचने वाले भू-माफिया अब खरीदारों को गुमराह नहीं कर पाएंगे, क्योंकि बिना अप्रूव्ड लेआउट के बैंक लोन नहीं देंगे।

  • पुनर्विक्रय (रीसेल) में आसानी: अधिकृत नक्शे और वैध दस्तावेजों वाले मकानों का बाजार मूल्य हमेशा अधिक रहता है और भविष्य में उन्हें बेचने या उन पर दोबारा टॉप-अप लोन लेने में कोई बाधा नहीं आती।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भूखंड या मकान की रजिस्ट्री कराने से पहले संबंधित विकास प्राधिकरण के कार्यालय या पोर्टल पर जाकर यह अवश्य जांच लें कि वह कॉलोनी या लेआउट अधिकृत है या नहीं।

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