
वाशिंगटन/औरंगाबाद: संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में जहां एक ओर भारतीय मूल के राजनेताओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, वहीं बिहार के औरंगाबाद जिले की बेटी सबा हैदर ने एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरीं सबा हैदर ने इलिनोइस राज्य की प्रतिनिधि सभा (Illinois House of Representatives) के चुनाव में अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को भारी मतों के अंतर से शिकस्त देकर शानदार जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही सबा हैदर इलिनोइस राज्य विधानसभा में पहुंचने वाली चुनिंदा दक्षिण एशियाई और भारतीय-अमेरिकी महिलाओं की विशिष्ट सूची में शामिल हो गई हैं। जैसे ही अमेरिका से उनकी इस ऐतिहासिक जीत की खबर बिहार के औरंगाबाद पहुंची, उनके पैतृक गांव, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया जाने लगा।
बिहार के औरंगाबाद से अमेरिका तक: शिक्षा और शुरुआती संघर्ष की मजबूत नींव
सबा हैदर का जन्म और प्रारंभिक परवरिश बिहार के औरंगाबाद जिले में हुई। एक मध्यमवर्गीय और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले परिवार में पली-बढ़ी सबा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय स्तर पर पूरी की। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से उच्च शिक्षा प्राप्त की, जहां से उन्होंने विज्ञान (साइंस) और गणित में स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधियां हासिल कीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद विवाह उपरांत वह अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गईं। एक नए देश और बिल्कुल अलग सामाजिक परिवेश में खुद को स्थापित करना आसान नहीं था, लेकिन सबा हैदर ने कभी अपने आत्मविश्वास और सेवा भाव को कम नहीं होने दिया। उन्होंने अमेरिका में एक हेल्थ एंड फिटनेस कंसल्टेंट, सर्टिफाइड योग प्रशिक्षक और डेटा एनालिस्ट के रूप में अपनी पेशेवर पहचान बनाई और साथ ही स्थानीय अमेरिकी समुदाय में सक्रिय रूप से घुलमिल गईं।
समाज सेवा से राजनीति की मुख्यधारा तक: ड्यूपेज काउंटी में बनाई मजबूत पैठ
राजनीति में आने से पहले सबा हैदर ने इलिनोइस के ड्यूपेज काउंटी (DuPage County) और आसपास के उपनगरीय इलाकों में जमीनी स्तर पर व्यापक सामाजिक कार्य किए। उन्होंने स्थानीय सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार, महिलाओं के स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और बाल कल्याण से जुड़े नागरिक अभियानों का खुलकर नेतृत्व किया। उनके जनसेवा के इसी समर्पण को देखते हुए पहले उन्हें स्थानीय काउंटी बोर्ड और शिक्षा समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जहां उन्होंने अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया। आम नागरिकों, कामकाजी परिवारों और अप्रवासी समुदाय के मुद्दों को निर्भीकता से उठाने के कारण डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी नेतृत्व क्षमता को पहचाना और उन्हें इलिनोइस राज्य प्रतिनिधि सभा के महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले में अपना उम्मीदवार बनाया।
इलिनोइस के चुनावी रण में रिपब्लिकन विरोधी को दी करारी शिकस्त
इलिनोइस की जिस सीट से सबा हैदर चुनावी मैदान में उतरी थीं, वह मुकाबला बेहद कड़ा और प्रतिष्ठा का विषय माना जा रहा था। उनके सामने रिपब्लिकन पार्टी का एक कद्दावर और स्थानीय स्तर पर स्थापित चेहरा था। हालांकि, सबा हैदर ने घर-घर जाकर जनसंपर्क करने (Door-to-Door Campaigning) की पारंपरिक और असरदार रणनीति अपनाई। उन्होंने महंगाई, सार्वजनिक स्कूलों के लिए बजट में बढ़ोतरी, सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं, महिला सुरक्षा और छोटे कारोबारियों को टैक्स राहत जैसे सीधे जनहित के मुद्दों को अपने चुनावी घोषणापत्र का मुख्य हिस्सा बनाया। मतगणना के दौरान शुरुआती दौर से ही सबा हैदर ने निर्णायक बढ़त बना ली, जो अंतिम राउंड तक लगातार बढ़ती चली गई। अंतिम परिणाम घोषित होते ही उन्हें आधिकारिक रूप से इलिनोइस की स्टेट रिप्रेजेंटेटिव निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
जीत के बाद सबा हैदर का पहला बयान: “यह लोकतंत्र और आम लोगों की आवाज की जीत है”
चुनाव में मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए सबा हैदर भावुक हो उठीं। उन्होंने मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“यह जीत सिर्फ मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उस हर आम परिवार, अप्रवासी और मेहनतकश इंसान की जीत है जो एक बेहतर, निष्पक्ष और समावेशी समाज का सपना देखता है। एक छोटे शहर से निकलकर दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र की संसद में पहुंचना यह साबित करता है कि यदि आपके इरादे नेक हों और आप जनता के लिए समर्पित हों, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती। मैं इलिनोइस के हर नागरिक की उम्मीदों पर खरा उतरने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए दिन-रात काम करूंगी।”
औरंगाबाद में जश्न का माहौल: पिता और परिजनों ने बांटी मिठाइयां
सबा हैदर की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि की खबर मिलते ही बिहार के औरंगाबाद में उनके पैतृक घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। सबा के परिजनों और रिश्तेदारों का कहना है कि बचपन से ही सबा अत्यंत मेधावी, शांत स्वभाव और दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहने वाली लड़की थीं। बिहार जैसे पारंपरिक राज्य के एक छोटे जिले से निकलकर सात समंदर पार अमेरिका के राजनीतिक पटल पर अपना परचम लहराना न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए असीम प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
अमेरिकी राजनीति में बढ़ता ‘देसी’ प्रभाव: वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिभा का डंका
सबा हैदर की यह जीत वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासियों (Indian Diaspora) के बढ़ते राजनीतिक रसूख का एक और प्रमाण है। अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, सीनेट और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में भारतीय मूल के नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार जैसे सांसदों के साथ-साथ अब राज्य स्तर पर भी सबा हैदर जैसे नए चेहरों का उभरना यह दर्शाता है कि भारतीय समुदाय अब सिर्फ विज्ञान, तकनीकी (सिलिकॉन वैली) और चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अमेरिका के नीति-निर्माण और शासन व्यवस्था में भी निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
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