‘विदेशी नेताओं के सामने देश को नीचा दिखा रहे हैं राहुल गांधी’: कांग्रेस नेता की विदेशी बैठकों और बयानों पर भड़की भाजपा

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विदेशी दौरों, विदेशी नेताओं, सांसदों व थिंक टैंकों के साथ होने वाली बैठकों को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखा हमला बोला है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि चुनावी मैदान में जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने के बाद राहुल गांधी अंतरराष्ट्रीय मंचों और विदेशी हस्तियों के सामने भारत के लोकतंत्र, चुनाव प्रणाली और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर देश को शर्मिंदा करने का काम कर रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ताओं ने दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष का यह आचरण केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विदेशी शक्तियों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए उकसाने और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने का प्रयास है।

1. ‘घरेलू राजनीति की हताशा विदेशी धरती पर निकाल रहे राहुल’: भाजपा का आरोप

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जब भी राहुल गांधी विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो उनका मुख्य एजेंडा भारत की विकास गाथा और लोकतांत्रिक मजबूती को कठघरे में खड़ा करना होता है:

  • विदेशी हस्तक्षेप का न्योता देने का आरोप: भाजपा ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेता प्रतिपक्ष जब विदेशी राजनयिकों और सांसदों से मिलकर यह कहता है कि भारत में संस्थाएं निष्पक्ष नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर विदेशी हस्तक्षेप की जमीन तैयार करने जैसा है।

  • ‘भारत की छवि खराब करने की सुपारी’: भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम भारत विरोधी ताकतों और कुछ खास अंतरराष्ट्रीय अरबपतियों व लॉबियों के नैरेटिव को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।

  • संवैधानिक मर्यादा का हनन: पार्टी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष एक संवैधानिक पद है। देश की सीमा के भीतर राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विदेश जाकर अपनी ही मातृभूमि और उसकी लोकतांत्रिक संस्थाओं को ‘तानाशाही’ या ‘कमजोर’ बताना किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता।

2. ‘संदेहास्पद बैठकों और फंडिंग पर श्वेतपत्र लाए कांग्रेस’

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और अन्य पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए:

  • गुपचुप बैठकों का आरोप: भाजपा ने सवाल दागा कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं, तो वे किन-किन गैर-सरकारी संगठनों, विचारकों और बंद कमरों की बैठकों में हिस्सा लेते हैं? इन मुलाकातों का पूरा विवरण और एजेंडा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?

  • विदेशी यात्राओं का खर्च: पार्टी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि ये यात्राएं किसी आधिकारिक संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं होतीं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन अंतरराष्ट्रीय दौरों और सम्मेलनों का वित्तीय प्रबंधन किसके द्वारा किया जा रहा है।

3. ‘भारत अब किसी के उपदेश का मोहताज नहीं’

भाजपा नेताओं ने कहा कि आज का भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था और एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है।

  • जब जी20, क्वाड और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की कूटनीति का डंका बज रहा है, तब राहुल गांधी का यह दावा करना कि ‘देश का लोकतंत्र खतरे में है’, केवल उनकी नकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है।

  • भाजपा ने स्पष्ट किया कि 140 करोड़ भारतीय अपने वोट की ताकत से सरकार चुनते हैं और भारत को अपनी व्यवस्था सुधारने के लिए किसी विदेशी ताकत की मंजूरी या प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।

4. कांग्रेस खेमे का पलटवार: ‘सच्चाई उजागर करने को देशद्रोह बताना बंद करे भाजपा’

भाजपा के इन हमलों पर कांग्रेस पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है:

  • कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी केवल वही मुद्दे उठाते हैं जो देश की जनता महसूस कर रही है—चाहे वह बेरोजगारी हो, आर्थिक असमानता हो, संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव हो या चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल हो।

  • कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार की खामियों को उजागर करना है। आलोचना को ‘देशविरोधी’ करार देना सत्ताधारी दल की असुरक्षा की भावना को दर्शाता है।

  • पार्टी ने भाजपा को चुनौती दी कि यदि नेता प्रतिपक्ष की किसी गतिविधि में कोई अवैधता है तो सरकार उसके तथ्य पेश करे, केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मनगढ़ंत आरोप लगाना बंद करे।

राहुल गांधी की वैश्विक मुलाकातों और बयानों पर छिड़ा यह ताजा राजनीतिक घमासान दर्शाता है कि आगामी चुनावों और राष्ट्रीय बहस में ‘विदेश नीति’, ‘संस्थागत निष्पक्षता’ और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ का टकराव दोनों खेमों के बीच और तीखा रूप लेने वाला है।

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