आज का पंचांग : आज है स्कंद षष्ठी, जानिए बुधवार के पूजन के लिए शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया

सनातन परंपरा में प्रत्येक दिन की शुरुआत पंचांग दर्शन और ईष्ट देव के स्मरण के साथ करने का विधान है। पंचांग के पांच प्रमुख अंग—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण मनुष्य के दैनिक जीवन, शुभ कार्यों और आध्यात्मिक साधना के सटीक समय का निर्धारण करते हैं। आज बुधवार, 16 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जा रहा है। आज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र एवं देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय (मुरुगन स्वामी) को समर्पित ‘स्कंद षष्ठी’ का पावन व्रत किया जा रहा है।

इसके साथ ही बुधवार का दिन होने के कारण प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुध देव की विशेष उपासना का भी अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। यदि आप आज किसी नए कार्य की शुरुआत करने जा रहे हैं, भूमि-भवन या वाहन का क्रय-विक्रय करने की योजना बना रहे हैं, अथवा कोई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराना चाहते हैं, तो शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भली-भांति आकलन करना अनिवार्य है। शास्त्रों के अनुसार राहुकाल जैसे दुष्ट कालखंड में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं उत्पन्न होती हैं, जबकि शुभ चौघड़िया और अमृत मुहूर्त में किए गए प्रयास सफलता के शिखर तक ले जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं आज 16 सितंबर 2026 का संपूर्ण पंचांग।

आज की तिथि, नक्षत्र और पंचांग के मुख्य घटक

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार आज 16 सितंबर 2026 के प्रमुख ज्योतिषीय घटक इस प्रकार हैं:

  • विक्रम संवत: 2083 (कालयुक्त)

  • शक संवत: 1948 (शोभकृत)

  • गुजराती संवत: 2082

  • मास: आश्विन (पूर्णिमांत) / भाद्रपद (अमांत)

  • पक्ष: शुक्ल पक्ष

  • वार: बुधवार

  • ऋतु: शरद ऋतु

  • अयन: दक्षिणायन

  • तिथि: षष्ठी तिथि (आज पूरे दिन षष्ठी तिथि का प्रभाव रहेगा, जो स्कंद षष्ठी व्रत के लिए पूर्णतः फलदायी है)

  • नक्षत्र: विशाखा नक्षत्र (इसके उपरांत अनुराधा नक्षत्र का संचरण होगा)

  • योग: प्रीति योग (इसके बाद आयुष्मान योग आरंभ होगा, जो मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम है)

  • करण: कौलव करण (तत्पश्चात तैतिल करण रहेगा)

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र गणना

  • सूर्योदय का समय: प्रातः 06:06 बजे

  • सूर्यास्त का समय: सायं 06:25 बजे

  • चंद्रोदय का समय: प्रातः 10:45 बजे

  • चंद्रास्त का समय: रात्रि 09:50 बजे

  • चंद्रमा की स्थिति: चंद्रमा दिनभर वृश्चिक राशि में संचरण करेंगे।

आज के अत्यंत शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त में किए गए पूजा-पाठ, दान-पुण्य और नए उपक्रम दीर्घकालिक लाभ और शांति प्रदान करते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:33 बजे से 05:20 बजे तक (ईश्वर आराधना, ध्यान और अध्ययन हेतु सर्वोत्तम)

  • प्रातः सन्ध्या: प्रातः 04:56 बजे से 06:06 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: आज बुधवार होने के कारण सामान्यतः अभिजित मुहूर्त का विचार नहीं किया जाता है या यह अनुपस्थित रहता है, अतः दिन के अन्य शुभ चौघड़िया का उपयोग करना श्रेयस्कर रहेगा।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:18 बजे से 03:07 बजे तक (मुकदमे, प्रतिस्पर्धा और नए अनुबंधों के लिए उपयुक्त)

  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:25 बजे से 06:49 बजे तक (संध्या कालीन आरती और दीपदान हेतु उत्तम)

  • अमृत काल: दोपहर 12:40 बजे से 02:15 बजे तक

  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:52 बजे से मध्यरात्रि 12:39 बजे तक (विशेष तांत्रिक व आध्यात्मिक साधनाओं के लिए)

आज का राहुकाल और अशुभ समय

ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल और भद्रा को अशुभ समय माना गया है। इस कालखंड में कोई भी महत्वपूर्ण अनुबंध, लेन-देन, यात्रा या नवीन कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए:

  • राहुकाल: दोपहर 12:15 बजे से 01:48 बजे तक (इस समय नए कार्य का शुभारंभ पूर्णतः वर्जित है)

  • यमगण्ड: प्रातः 07:38 बजे से 09:11 बजे तक

  • गुलिक काल: प्रातः 10:43 बजे से 12:15 बजे तक

  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:40 बजे तक

  • वर्ज्यम्: प्रातः 08:20 बजे से 09:55 बजे तक

  • दिशाशूल: उत्तर दिशा (आज उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा अत्यंत अपरिहार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा गुड़, धनिया या तिल खाकर और भगवान गणेश का स्मरण करके ही प्रस्थान करें)।

दिन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • लाभ चौघड़िया: प्रातः 06:06 बजे से 07:38 बजे तक

  • अमृत चौघड़िया: प्रातः 07:38 बजे से 09:11 बजे तक

  • शुभ चौघड़िया: प्रातः 10:43 बजे से 12:15 बजे तक

  • चर चौघड़िया: दोपहर 03:20 बजे से सायं 04:52 बजे तक

  • लाभ चौघड़िया: सायं 04:52 बजे से 06:25 बजे तक

स्कंद षष्ठी व्रत और बुधवार पूजन का विशेष महत्व

आज के दिन स्कंद षष्ठी का व्रत रखने से जीवन के बड़े से बड़े संकट, भय और शत्रुओं का नाश होता है। भगवान कार्तिकेय शक्ति, पराक्रम और उच्च ऊर्जा के देवता हैं। आज प्रातः काल स्नान के उपरांत दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भगवान कार्तिकेय को लाल पुष्प, रोली, अक्षत और फल अर्पित करें तथा ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महासैन्याय धीमहि तन्नो स्कन्दः प्रचोदयात्’ अथवा ‘ॐ शं षण्मुखाय नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें। जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष या साहस की कमी है, उनके लिए यह उपासना विशेष फलदायी साबित होती है।

चूंकि आज बुधवार का दिन भी है, इसलिए प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को दूर्वा की 21 गांठें और मोदक का भोग अवश्य लगाएं। साथ ही बुध ग्रह की शांति के लिए गाय को हरी घास या पालक खिलाएं। ऐसा करने से व्यापार में उन्नति, वाणी में ओज और पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

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