आज का पंचांग : ऋषि पंचमी पर बना दुर्लभ संयोग, जानिए मंगलवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजन विधि

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है। पंचांगीय गणना के अनुसार 15 सितंबर को पावन ऋषि पंचमी का व्रत और पूजन संपन्न किया जा रहा है। मंगलवार का दिन होने के कारण आज का दिन संकटमोचन हनुमान जी की उपासना और सप्तऋषियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार जाने-अनजाने में हुए शारीरिक, मानसिक और वाचिक पापों के प्रायश्चित के लिए ऋषि पंचमी का व्रत सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करता है।

पंचांग के पांच मुख्य अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण मनुष्य के दैनिक जीवन और कर्मों को गहराई से प्रभावित करते हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, व्यापारिक सौदे अथवा यात्रा से पूर्व दैनिक पंचांग का सूक्ष्म अध्ययन नकारात्मक ऊर्जा से बचाकर सफलता के मार्ग प्रशस्त करता है।

15 सितंबर का दैनिक पंचांग और ग्रह-नक्षत्र स्थिति

आज विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948, मास भाद्रपद, पक्ष शुक्ल पक्ष और वार मंगलवार है। सूर्य वर्तमान में सिंह राशि में संचरण कर रहे हैं और चंद्रमा का गोचर तुला राशि में रहेगा।

सूर्योदय का समय प्रातः 06:06 बजे और सूर्यास्त का समय सायं 06:27 बजे दर्ज किया गया है। चंद्रोदय का समय प्रातः 09:42 बजे और चंद्रास्त का समय रात्रि 09:18 बजे रहेगा।

तिथि विवरण के अनुसार पंचमी तिथि दोपहर तक प्रभावी रहेगी, जिसके उपरांत षष्ठी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्र अनुराधा रहेगा, जो दोपहर के बाद ज्येष्ठ नक्षत्र में परिवर्तित होगा। योग की बात करें तो ऐंद्र योग के उपरांत वैधृति योग का प्रभाव देखने को मिलेगा। करण बव के उपरांत बालव रहेगा।

ऋषि पंचमी 2026: पूजन का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

ऋषि पंचमी का पूजन सामान्यतः दोपहर के समय मध्याह्न काल में करने का विधान है। पंचांग के अनुसार आज मध्याह्न पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रातः 11:04 बजे से दोपहर 01:32 बजे तक रहेगा। इस 2 घंटे 28 मिनट की अवधि में सप्तऋषि पूजन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

चौघड़िया और अन्य विशेष मुहूर्तों की गणना इस प्रकार है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:33 बजे से 05:19 बजे तक (अध्यात्म, ध्यान और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम)

  • अमृत काल: प्रातः 08:12 बजे से 09:45 बजे तक (किसी भी नवीन और मांगलिक कार्य के लिए अनुकूल)

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:41 बजे तक (समस्त दोषों को समाप्त करने वाला सर्वश्रेष्ठ विजय मुहूर्त)

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:20 बजे से 03:09 बजे तक

  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:27 बजे से 06:51 बजे तक

  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:53 बजे से 12:39 बजे तक

मंगलवार को राहुकाल और अशुभ समय का विशेष ध्यान रखें

ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले अशुभ समय का त्याग करने का स्पष्ट निर्देश है। मंगलवार के दिन राहुकाल दोपहर के समय प्रभावी होता है, जिसमें किसी भी नए अनुबंध, लेन-देन या यात्रा से बचना चाहिए।

  • राहुकाल: दोपहर 03:22 बजे से सायं 04:54 बजे तक (इस समय में नए कार्य सर्वथा वर्जित हैं)

  • यमगंड: प्रातः 09:11 बजे से 10:44 बजे तक

  • गुलिक काल: दोपहर 12:16 बजे से 01:49 बजे तक

  • दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:36 बजे से 09:25 बजे तक तथा रात्रि 11:07 बजे से 11:53 बजे तक

  • दिशाशूल: उत्तर दिशा (यदि उत्तर दिशा में यात्रा अत्यंत अनिवार्य हो, तो गुड़ या धनिया खाकर ही प्रस्थान करें)

ऋषि पंचमी व्रत का धार्मिक महत्व और सप्तऋषि पूजन विधि

ऋषि पंचमी का व्रत किसी देवी-देवता को समर्पित न होकर हमारे वैदिक ज्ञान के मूल स्तंभ पूज्य सप्तऋषियों को समर्पित है। इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ—इन सात महान ऋषियों के साथ देवी अरुंधति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

प्रातःकाल नित्यकर्म से निवृत्त होकर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें। संभव हो तो आज के दिन अपामार्ग (चिचड़ी) की दातून करने और अपामार्ग के पत्तों से स्नान करने की परंपरा का पालन करें। पूजा स्थल पर शुद्ध मिट्टी या गोबर से वेदी बनाकर उस पर अष्टदल कमल बनाएं और सप्तऋषियों की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

ऋषियों को पंचामृत, शुद्ध जल, चंदन, श्वेत पुष्प, जनेऊ, फल और विशेष रूप से बिना जुते हुए अन्न जैसे समा के चावल (मोरधन) और कंदमूल का भोग अर्पित करें। ‘ॐ कश्यपाय नमः, ॐ अत्रये नमः, ॐ भारद्वाजाय नमः, ॐ विश्वामित्राय नमः, ॐ गौतमाय नमः, ॐ जमदग्नये नमः, ॐ वसिष्ठाय नमः’ मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करें। अंत में क्षमा याचना करते हुए आरती करें और व्रती केवल कंदमूल या मोरधन का एक समय फलाहार ग्रहण करें।

मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा से दूर होंगे समस्त संकट

आज ऋषि पंचमी के साथ मंगलवार का दिन होने से मंगल दोष और कुंडली के पाप ग्रहों की शांति का दोहरा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल कमजोर है या कर्ज और भूमि संबंधी विवाद चल रहे हैं, वे आज शाम के समय हनुमान मंदिर में चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का 7 बार पाठ करें। हनुमान जी को लाल सिंदूर और बूंदी का भोग लगाने से आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है।

ऋषि पंचमी का यह पावन पर्व हमें प्रकृति, ज्ञान और अपने पूर्वज ऋषियों के योगदान के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग करते हुए विधिपूर्वक पूजन करने से आत्मिक शांति, सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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