
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) एक बार फिर भारत की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। एक ही साल के भीतर यह उनका दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वे मई 2026 में क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए थे। हालांकि, इस बार 17 से 22 अक्टूबर तक चलने वाले उनके छह दिवसीय दौरे का आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम सामने आते ही कूटनीतिक हलकों में खासी चर्चा छिड़ गई है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, रुबियो इस बार राजधानी नई दिल्ली नहीं जाएंगे। इसके बजाय उनके तमाम आधिकारिक कार्यक्रम और उच्चस्तरीय बैठकें देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और गुजरात के प्रमुख औद्योगिक व ऊर्जा केंद्र जामनगर में आयोजित की जाएंगी।
दिल्ली से दूरी और जामनगर-मुंबई की पसंद: क्या है इस रणनीतिक दौरे का मकसद?
किसी भी अमेरिकी विदेश मंत्री के दौरे में राजधानी दिल्ली का न होना पहली नजर में भले ही असामान्य लगे, लेकिन इसके पीछे दोनों देशों का एक स्पष्ट और सोचा-समझा आर्थिक व रणनीतिक खाका छिपा हुआ है। इस दौरे का प्राथमिक फोकस लुटियंस दिल्ली की पारंपरिक औपचारिक राजनीतिक मुलाकातों के बजाय ठोस व्यापारिक समझौतों, द्विपक्षीय निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े गठजोड़ को धरातल पर उतारना है। मुंबई में जहां रुबियो शीर्ष भारतीय उद्योगपतियों, वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों और कॉरपोरेट लीडर्स के साथ राउंडटेबल बैठकें करेंगे, वहीं जामनगर का दौरा वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। जामनगर दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का गढ़ है। पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के बीच अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी और वैकल्पिक सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहता है।
ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी पर महामंथन: जामनगर रिफाइनरी हब क्यों बना केंद्र?
जामनगर को रुबियो के यात्रा कार्यक्रम में शामिल किए जाने के पीछे कच्चे तेल के शोधन (रिफाइनिंग), पारंपरिक हाइड्रोकार्बन और भविष्य की ग्रीन एनर्जी तकनीक से जुड़ी साझेदारियां हैं। अमेरिकी प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद मित्र देशों के बीच ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। इसके अतिरिक्त, सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में अमेरिकी निवेश को भारत लाने के लिए जामनगर के औद्योगिक बुनियादी ढांचे का प्रत्यक्ष अवलोकन इस दौरे का प्रमुख हिस्सा है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, रुबियो वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों के साथ द्विपक्षीय ऊर्जा वार्ता को आगे बढ़ाएंगे ताकि दोनों देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में साझा कदम उठा सकें।
मुंबई में व्यापार और निवेश पर जोर: टैरिफ और व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने की कवायद
मुंबई प्रवास के दौरान मार्को रुबियो का पूरा ध्यान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर करने पर होगा। हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ, बौद्धिक संपदा और डेटा लोकलाइजेशन से जुड़े मुद्दों पर पर्दे के पीछे चर्चाएं चलती रही हैं। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएं एक निर्णायक मोड़ (लैंडिंग पॉइंट) की ओर बढ़ रही हैं। मुंबई में होने वाली बैठकों में अमेरिकी कंपनियों द्वारा भारत के सेमीकंडक्टर, रक्षा विनिर्माण, एआई और फार्मास्युटिकल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने के प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। स्वास्थ्य सेवा और जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में अमेरिका बड़े पैमाने पर भारत पर भरोसा करता है, और इस साझेदारी को नियामकीय स्तर पर और अधिक सरल बनाने पर बात होगी।
उज्बेकिस्तान में C5+1 बैठक के बाद भारत आगमन: मध्य एशिया से जोड़ने की कड़ी
भारत आने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित होने वाले ‘C5+1’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान उनके साथ 200 से अधिक अमेरिकी व्यापारिक दिग्गजों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा। मध्य एशिया के पांच देशों के साथ सामरिक संवाद पूरा करने के तुरंत बाद रुबियो का पश्चिमी भारत (मुंबई और गुजरात) आना यह दर्शाता है कि अमेरिका भारत को मध्य एशिया और यूरेशियाई व्यापारिक गलियारों के साथ जोड़ने के विजन को कितनी गंभीरता से देख रहा है। बंदरगाहों के विकास, समुद्री व्यापार और सुरक्षित आपूर्ति मार्गों के निर्माण में भारत की पश्चिमी तटरेखा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यही वजह है कि राजधानी की कूटनीति से हटकर सीधे औद्योगिक केंद्रों पर संवाद स्थापित करने की यह नई रूपरेखा तैयार की गई है।
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