
सुबह की पहली चाय हो या शाम की कॉफी, ज्यादातर भारतीय घरों में चीनी मिट्टी (सेरेमिक, बोन चाइना या पोर्सिलेन) के कप-मग का ही इस्तेमाल किया जाता है। कांच या स्टील के मुकाबले ये देखने में खूबसूरत होते हैं और गर्म चाय को लंबे समय तक गर्म बनाए रखते हैं। लोग अक्सर सालों-साल एक ही कप में चाय पीते रहते हैं और जब तक कप टूट न जाए, उसे फेंकने या बदलने का विचार मन में नहीं आता।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या चीनी मिट्टी के कपों की भी कोई ‘एक्सपायरी डेट’ होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मैटेरियल साइंटिस्ट्स की मानें तो भले ही इन कपों पर कोई औपचारिक मैन्युफैक्चरिंग एक्सपायरी डेट न लिखी हो, लेकिन एक तय समय और स्थिति के बाद इनमें चाय-कॉफी पीना आपकी सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।
क्या चीनी मिट्टी के कप की कोई तय एक्सपायरी डेट होती है?
तकनीकी रूप से चीनी मिट्टी (Clay/Ceramic) एक प्राकृतिक पदार्थ है जो सैकड़ों सालों तक खराब नहीं होता। इसलिए पैकेट पर बिस्किट या दूध की तरह कोई निश्चित ‘तारीख’ नहीं लिखी होती। हालांकि, घरेलू उपयोग के मानकों के अनुसार एक सेरेमिक कप का सुरक्षित जीवनकाल लगभग 2 से 3 साल माना जाता है।
यदि कप में रोजाना कई बार गर्म चाय या कॉफी डाली जा रही है, उसे डिशवॉशर या कठोर स्क्रबर से धोया जा रहा है, तो 1.5 से 2 साल में ही कप अपनी रासायनिक सुरक्षा खोने लगता है।
कप पर चढ़ी ‘ग्लेजिंग’ हटी, तो शरीर में पहुंचेगा धीमा जहर
चीनी मिट्टी के बर्तनों को चमकदार, चिकना और वाटरप्रूफ बनाने के लिए उन पर एक विशेष कोटिंग चढ़ाई जाती है, जिसे ‘ग्लेज’ (Glaze) कहा जाता है। इसे भट्टी में उच्च तापमान पर पकाया जाता है। इसी ग्लेजिंग में चमक और रंग लाने के लिए अक्सर लेड (सीसा) और कैडमियम जैसे भारी रसायनों का इस्तेमाल होता है।
जब कप पुराना हो जाता है, तो इसके अंदरूनी हिस्से की यह सुरक्षात्मक पॉलिश या कोटिंग घिसने लगती है।
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जब आप पुराने या खुरदुरे कप में उबलती हुई गर्म चाय, कॉफी या नींबू की चाय (एसिडिक तत्व) डालते हैं, तो रासायनिक क्रिया होती है।
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इसे विज्ञान की भाषा में ‘लीचिंग’ (Leaching) कहा जाता है।
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कप की मिट्टी और रंग में मौजूद लेड और कैडमियम धीरे-धीरे घुलकर चाय के जरिए आपके पेट में जाने लगते हैं।
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लंबे समय तक सीसा शरीर में जाने से किडनी की बीमारी, पाचन तंत्र में खराबी, हार्मोनल असंतुलन और बच्चों में दिमागी विकास धीमा होने का खतरा बढ़ जाता है।
इन 4 संकेतों को देखते ही तुरंत बदल दें चीनी के कप
यदि आपके किचन में मौजूद कपों में ये लक्षण दिखाई दें, तो समझ लीजिए कि उनकी ‘एक्सपायरी’ आ चुकी है और उन्हें तुरंत कचरे में फेंक देना चाहिए:
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बारीक लकीरें या हेयरलाइन क्रैक्स (Crazing): अक्सर कप के अंदरूनी तल या किनारों पर मकड़ी के जाले जैसी बारीक दरारें नजर आने लगती हैं। ये दरारें बैक्टीरिया और फंगस के लिए सुरक्षित घर बन जाती हैं। आप कप को कितना भी साबुन से धो लें, इन दरारों में फंसी गंदगी और कीटाणु बाहर नहीं निकलते और हर घूंट के साथ पेट में जाते हैं।
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किनारे से चिप (टूटा) होना: यदि कप का ऊपरी किनारा जहां आप होंठ लगाते हैं, वहां से जरा सा भी चटक गया हो, तो उसे तुरंत हटा दें। यह न केवल होंठ काटने का खतरा पैदा करता है, बल्कि वहां की खुली कच्ची मिट्टी सीधे आपके लार के संपर्क में आती है।
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चमक का गायब होना या खुरदरापन: यदि कप के अंदर की सतह अपनी चिकनाई खो चुकी है और उंगली फेरने पर खुरदुरी लग रही है, तो इसका साफ मतलब है कि सुरक्षित ग्लेज खत्म हो चुकी है और अब केमिकल लीचिंग शुरू हो सकती है।
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जिद्दी चाय के दाग जो न छूटें: जब कप के अंदर चाय-कॉफी के गहरे भूरे दाग स्थायी हो जाएं और रगड़ने पर भी न निकलें, तो इसका अर्थ है कि कप का पोर्सिलेन छिद्रयुक्त (Porous) हो चुका है और वह तरल पदार्थों को सोखने लगा है।
सेरेमिक कप की उम्र बढ़ाने के लिए आसान टिप्स
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कप धोते समय कभी भी लोहे के तार वाले स्क्रबर (Steel Wool) का इस्तेमाल न करें। हमेशा मुलायम स्पंज का प्रयोग करें।
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कप के अंदर के दाग साफ करने के लिए हार्श केमिकल के बजाय बेकिंग सोडा और हल्के गर्म पानी का इस्तेमाल करें।
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सस्ते, बिना ब्रांड वाले या सड़क किनारे बिकने वाले अत्यधिक चटख रंगों वाले कप खरीदने से बचें, क्योंकि इनमें घटिया क्वालिटी का लेड-युक्त रंग इस्तेमाल होने का खतरा ज्यादा रहता है। हमेशा ‘Food Safe’ और ‘Lead-Free’ प्रमाणित कप ही चुनें।
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