करवा चौथ पर दशकों बाद दुर्लभ संयोग: अपने प्रिय ‘रोहिणी नक्षत्र’ में पधारेंगे चंद्रदेव, बन रहे 3 महा-राजयोग

सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े और आस्था के पावन पर्व ‘करवा चौथ’ पर इस बार ग्रहों और नक्षत्रों की ऐसी दुर्लभ जुगलबंदी बन रही है, जो इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देगी। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह अखंड सौभाग्य का महापर्व इस बार अत्यंत विशिष्ट खगोलीय योगों के बीच मनाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दिन चंद्रमा अपने सबसे प्रिय ‘रोहिणी नक्षत्र’ में गोचर करते हुए दर्शन देंगे।

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा का रोहिणी नक्षत्र में होना अपने आप में दांपत्य प्रेम, आकर्षण और अमर सुहाग का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही आकाश मंडल में 3 अत्यंत शुभ महा-राजयोगों का निर्माण हो रहा है, जो व्रती महिलाओं के वैवाहिक जीवन में मधुरता, सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि का वरदान लेकर आ रहे हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, जब करवा चौथ पर चंद्रमा अपनी उच्च प्रिय राशि और नक्षत्र में रहता है, तो सुहागिनों द्वारा की गई प्रार्थना सीधे तौर पर पति की दीर्घायु और अटूट प्रेम को सुनिश्चित करती है।

रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा का होना क्यों है इतना विशेष?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों (नक्षत्रों) में से ‘रोहिणी’ उन्हें सर्वाधिक प्रिय हैं। यही कारण है कि जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो वे अपनी पूर्ण आभा, शीतलता और सौम्यता से युक्त होते हैं।

  1. दांपत्य में अटूट आकर्षण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र सौंदर्य, ऐश्वर्य, भोग और प्रगाढ़ प्रेम का प्रतिनिधित्व करता है। इस नक्षत्र में चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चली आ रही दूरियां, गलतफहमियां या तनाव पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।

  2. अखंड सौभाग्य का वरदान: माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। रोहिणी नक्षत्र युक्त चतुर्थी तिथि को माता करवा, भगवान शिव-पार्वती और कार्तिकेय-गणेश की संयुक्त पूजा करने से महिलाओं को ‘अखंड सौभाग्य’ का आशीर्वाद सहजता से प्राप्त होता है।

3 महा-राजयोगों का त्रिवेणी संगम: सुहागिनों पर बरसेगी विशेष कृपा

इस बार करवा चौथ के दिन सिर्फ नक्षत्र ही नहीं, बल्कि ग्रहों की विशिष्ट स्थितियों से तीन अत्यंत शक्तिशाली शुभ योग बन रहे हैं:

  • गजकेसरी योग: चंद्रमा और बृहस्पति (गुरु) के परस्पर शुभ दृष्टि संबंध अथवा युति से ‘गजकेसरी योग’ का निर्माण हो रहा है। यह योग ज्ञान, धन, संतान सुख और कुल के यश में वृद्धि करने वाला माना जाता है।

  • बुधादित्य राजयोग: सूर्य और बुध की एक साथ उपस्थिति से बनने वाला बुधादित्य योग परिवार में सम्मान, सकारात्मक ऊर्जा और पति के करियर में अप्रत्याशित सफलता के मार्ग खोलता है।

  • शश/शंख अथवा सर्वार्थ सिद्धि योग: इस दिन बन रहे तीसरे प्रमुख योग के प्रभाव से व्रती महिलाओं द्वारा किए गए सभी संकल्प और मनोकामनाएं निर्विघ्न रूप से सिद्ध होंगी। यह त्रिग्रहीय संयोजन दांपत्य जीवन में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि की गारंटी देता है।

करवा चौथ व्रत कथा पढ़ने और पूजा का ‘सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त’

करवा चौथ की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘करवा चौथ व्रत कथा’ का श्रवण और मां गौरी की विधिवत आरती होती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ यानी सूर्यास्त के ठीक बाद के समय में ही की जानी चाहिए, जब चतुर्थी तिथि पूर्ण रूप से प्रभावी हो।

  • करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। (कुल अवधि लगभग 1 घंटा 18 मिनट)

  • अमृत चौघड़िया/प्रदोष काल: शाम 05 बजकर 45 मिनट से 07 बजकर 15 मिनट के बीच का समय व्रत कथा पढ़ने, करवा फेरने और सुहाग की सामग्री अर्पित करने के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ और अचूक’ रहेगा।

शास्त्रों के अनुसार, इस निर्धारित मुहूर्त के दौरान सामूहिक रूप से या घर के पूजा स्थल पर बैठकर करवा चौथ की पौराणिक कथा सुनना, सात बार करवा फेरना और अपनी सास अथवा घर की वरिष्ठ सुहागिन महिला को बायना (करवा व उपहार) भेंट करना सबसे फलदायी माना गया है।

चंद्रोदय और अर्घ्य का समय: कैसे करें रोहिणी युक्त चंद्रमा का दर्शन?

कथा और पूजा संपन्न करने के बाद सभी व्रती महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है गगन में चंद्रदेव के दीदार का। इस बार रोहिणी नक्षत्र में चंद्रोदय होने के कारण चंद्रमा का स्वरूप अत्यंत भव्य और मनमोहक दिखाई देगा।

  • चंद्रोदय का संभावित समय: रात्रि 08 बजकर 05 मिनट से 08 बजकर 25 मिनट के बीच (अलग-अलग शहरों के भौगोलिक स्थिति के अनुसार समय में 10 से 15 मिनट का अंतर हो सकता है)।

अर्घ्य और पारण की सही विधि:

  1. जैसे ही चंद्रमा उदित हों, छलनी में जलता हुआ दीपक रखकर सबसे पहले छलनी की ओट से चंद्रदेव के दर्शन करें।

  2. इसके बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

  3. पीतल या चांदी के लोटे में शुद्ध जल, कच्चा दूध, रोली, अक्षत और सफेद पुष्प डालकर चंद्रमा को तीन बार अर्घ्य दें।

  4. अर्घ्य देते समय “ॐ सों सोमाय नमः” या “क्षीरोदार्णव सम्भूत अत्रिनेत्र समुद्भव। गृहाणार्घ्यं शशाङ्केश रोहिण्या सहितो मम॥” मंत्र का जाप अवश्य करें।

  5. पति के हाथों से जल ग्रहण करके और मिठाई खाकर अपने निर्जला व्रत का पारण करें।

रोहिणी नक्षत्र और 3 राजयोगों के इस दुर्लभ महासंयोग में करवा चौथ का व्रत रखना हर सुहागिन के जीवन में प्रेम, सुरक्षा और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगा।

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