‘किस बात का डर है? पैर तले क्या हिल रहा है?’ दिल्ली प्रदर्शन पर रोक और एक्शन को लेकर भड़के प्रकाश राज

सिनेमाई पर्दे से लेकर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चित दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले नागरिक व छात्र प्रदर्शनों से ठीक पहले सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ और कई स्थानों पर ट्रेनें रद्द किए जाने की खबरों पर प्रकाश राज का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध दर्ज कराने की आजादी पर पहरा लगाने को लेकर सत्ता प्रतिष्ठान पर तीखा तंज कसा है। अपने चिर-परिचित अंदाज ‘#JustAsking’ के साथ अभिनेता ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए सरकार को इतनी घबराहट और प्रशासनिक तामझाम की जरूरत क्यों पड़ रही है।

‘ट्रेनें रद्द, घरों से उठाए जा रहे लोग’: सोशल मीडिया पोस्ट में उठाए तीखे सवाल

प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सिलसिलेवार तरीके से विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए उठाए जा रहे प्रशासनिक कदमों की आलोचना की। उन्होंने लिखा—”देश विरोध कर रहा है… तो उन्हें प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। ट्रेनें रद्द की जा रही हैं, लोगों को उनके घरों से उठाया जा रहा है और पुलिस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे रही है। आखिर किस बात का डर है? आपके पैरों तले… क्या हिल रहा है?” अभिनेता का यह सीधा इशारा सत्ता के उस डर की ओर था जिसमें नागरिकों की असहमति की आवाज को दबाने के लिए राज्य मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन के उस रवैये पर उंगली उठाई जिसके तहत प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने वाले रास्तों को सील कर दिया गया और अनुमति खारिज कर दी गई।

लोकतांत्रिक अधिकारों और असहमति की आजादी पर उठाई आवाज

प्रकाश राज ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ किया कि एक जीवंत लोकतंत्र में जनता को अपनी चिंताओं, आपत्तियों और नीतियों के खिलाफ असहमति दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक, युवा और छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए एकजुट होते हैं, तो उन्हें सुनने और संवाद स्थापित करने के बजाय पुलिसिया बल और पूर्व-निवारक (Preventive) गिरफ्तारियों के जरिए चुप कराने की कोशिश की जाती है। जब किसी आंदोलन को दबाने के लिए सामान्य परिवहन सेवाएं प्रभावित की जाती हैं और कार्यकर्ताओं को घरों में नजरबंद किया जाता है, तो यह मजबूत शासन का नहीं बल्कि व्यवस्था की अंदरूनी घबराहट और कमजोर जमीन का संकेत होता है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस: पक्ष और विपक्ष में बंटी राय

प्रकाश राज के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में गरमा-गरम बहस छिड़ गई। विपक्ष के कई नेताओं, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने उनके बयान का पुरजोर समर्थन किया और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर बंदिशें लगाना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन के समर्थकों ने अभिनेता के बयान पर पलटवार करते हुए कानून-व्यवस्था की दलील दी। समर्थकों का कहना था कि राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, सार्वजनिक यातायात को सुचारू रखना और किसी भी संभावित उपद्रव से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है, जिसे ‘डर’ का नाम नहीं दिया जा सकता।

बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं प्रकाश राज

यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रकाश राज ने सीधे सत्ताधारी व्यवस्था और नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला हो। दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले प्रकाश राज लंबे समय से स्वतंत्र सामाजिक और राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में सक्रिय हैं। वे नागरिकता कानूनों, बेरोजगारी, शिक्षा सुधारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सांप्रदायिक सौहार्द जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अक्सर मुखर रहते हैं। लगातार ट्रोलिंग और राजनीतिक विरोध का सामना करने के बावजूद वे अपने ‘#JustAsking’ टैगलाइन के साथ सत्ता से तीखे सवाल पूछने की अपनी नीति पर अडिग बने हुए हैं।

Check Also

‘यह न्याय नहीं, अमानवीय टॉर्चर है!’ मौत की सजा के लाइव टेलीकास्ट के फैसले पर भड़का भारी जनआक्रोश, दुनिया भर में बवाल

फांसी या मृत्युदंड के निष्पादन का टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सीधा प्रसारण (Live Telecast) …